'मैं झूठ बोलकर जीतने के बजाय हारना पसंद करूंगा', ऋषि सुनक ने ऐसा क्यों कहा?
टोरी की कमान कौन संभालेगा, कौन बनेगा देश का अगला प्रधानमंत्री? ऐसे कई सवाल हैं जो आने वाले दिनों में सबको पता लग जाएगा। हालांकि, मौजूदा समय में लिज ट्रस ऋषि सुनक से आगे चल रही हैं।
लंदन, 11 अगस्त : ऋषि सुनक काफी समय से मीडिया की सुर्खियों में बने हुए हैं। वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री की दौड़ में बने हुए हैं। हालांकि, वे अपने प्रतिद्वंदी विदेश मंत्री लिज ट्रस से पीछे चल रहे हैं। अब तक हुए दो जनमत सर्वेक्षणों में ट्रस ने सुनक पर बढ़त बना ली है। वहीं, ऋषि को पीएम की रेस में लिज ट्रस से आगे ले जाने के लिए लंदन के प्रवासी भारतीयों ने हवन करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि, उन्हें लगता है कि ऋषि में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने की काबलियत है, वे देश को आगे ले जा सकते हैं। वहीं ऋषि सुनक ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बड़ी बात कह दी है। उन्होंने कहा कि, वे झूठ बोलकर जीतने के बजाय हारना पसंद करेंगे।

....इसलिए मैं हारना पसंद करूंगा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने जोर देकर कहा है कि, वह आर्थिक संकट से निपटने की योजना के झूठे वादे पर जीतने के बजाय हारना पसंद करेंगे। बीबीसी को दिए अपने इंटरव्यू में ऋषि सुनक ने कहा कि, बोरिस जॉनसन की जगह लेने के लिए वह झूठ का सहारा लेना छोड़कर कंजर्वेटिव पार्टी नेतृत्व की दौर में हारना पसंद करेंगे। वे झूठा वादा नहीं करेंगे।

कमजोर लोगों को सुरक्षा देना मेरा लक्ष्य
बीबीसी के साक्षात्कार में ब्रिटेन के पूर्व चांसलर सुनक ने कहा कि, वे ब्रिटेन के सबसे कमजोर परिवारों को जीवन यापन के संकट में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में गरीबों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करना उनकी प्राथिमिकता है। बता दें कि, कई मुद्दों पर लिज ट्रस और ऋषि सुनक के बीच विभाजन की गहरी रेखा खिंच दी है। जैसे की लिज ट्रस का कर कटौती का वादा। इससे पूर्व वित्त मंत्री इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि, इससे सिर्फ अमीर परिवारों को ही फायदा पहुंचेगा ना कि, उन लोगों को जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। ऋषि सुनक ने साफ कर दिया कि, वे झूठे वादे करने के बजाय हारना पसंद करेंगे।

संकट की दौर से गुजर रहा ब्रिटेन
बता दें कि, ब्रिटेन इस वक्त घोर ऊर्जा संकट की दौर से गुजर रहा है। इसका देश की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ा है। जिसके कारण बढ़ती मुद्रास्फीति और कीमतों का मुद्दा एजेंडे पर हावी हो गया है। ऋषि सुनक इंटरव्यू में कहा कि, कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान उन्होंने बतौर चांसलर रहते काफी काम किया था, लोग मेरे रिकॉर्ड के आधार पर मुझे आंक सकते हैं। उन्होंने कहा, "लोग अपने रिकॉर्ड पर मुझे आंक सकते हैं - जब इस साल की शुरुआत में बिल लगभग 1,200 पाउंड बढ़ रहे थे, तो मैंने सुनिश्चित किया कि सबसे कमजोर लोगों को लगभग 1,200 पाउंड मिले।"

ऋषि ने कहा मुश्किल वक्त में निकलने के उपायों की घोषणा की थी
देश की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए पीएम पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने आगे कहा कि, उन्हें पता है कि, लाखों लोग मुद्रास्फीति, विशेष रूप से अपने ऊर्जा बिलों की लागत के बारे में चिंतित हैं। अगर मैं प्रधानमंत्री बनता हूं तो मैं उन परिवारों का समर्थन करने की दिशा में आगे बढ़ूंगा जिन्हें मदद की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि, अभी स्थिति ज्यादा ही खराब है इसलिए साल के शुरूआत में उन्होंने मुश्किल से निकलने के उपायों की घोषणा की थी।












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