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Hurricane Milton: लैला, कैटरीना, आइला, मिल्टन...कैसे रखा जाता है खतरनाक तूफानों का नाम? ये भी होते हैं रिटायर 

Hurricane Milton Naming Process: तूफान और तबाही एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। जब-जब दुनिया में तूफान का सिलसिला शुरू होता है, जानमाल का नुकसान देखा गया है। पलक झपकते ही जिंदगियां काल के गाल में समा जाती हैं। पीछे छूट जाती हैं, उधड़ी हुई लाशों के ढेर और जख्म। दृश्य देख प्रतित होता है कि मानों 'पाताल लोक' का दरवाजा खुल गया हो।

लैला, कैटरीना, आइला, मिल्टेन...जैसे तूफानों के नाम सुनने में भले ही मोहक लगे, लेकिन आपदाओं को याद कर अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाती है। क्या आपको पता है, तूफानों के खतरनाक नाम के पीछे एक पूरी संस्था काम करती है।

Hurricane Milton

शुरुआत में, तूफानों को भौगोलिक स्थानों, तिथियों, या धर्मिक प्रतीकों के नाम पर जाना जाता था। लेकिन, 1950 के दशक में, अटलांटिक तूफानों के लिए नामकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, ताकि संचार और चेतावनी ज्यादा सटीक हो। पहले केवल महिलाओं के नाम का इस्तेमाल होता था, लेकिन 1979 से पुरुषों के नाम भी शामिल किए गए। आइए आपको रूबरू कराते हैं तूफानों के 'पंडितों से', जो नामकरण की पूरी कुंडली तैयार करते हैं...

कैसे रखा गया फ्लोरिडा के तूफान 'हरिकेन मिल्टन' का नाम?
हरिकेन मिल्टन जैसे खतरनाक तूफानों के नामकरण की एक विशेष प्रक्रिया होती है। ये नामकरण विभिन्न संगठनों द्वारा किया जाता है, ताकि तूफानों की पहचान आसान हो और आपात स्थिति में जानकारी को जल्दी से संप्रेषित किया जा सके। मिल्टन तूफान का नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संबंधित राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवाओं द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के आधार पर रखा गया है।

तूफानों के नामकरण का क्या है महत्व?
तूफानों का नाम रखना इसलिए आवश्यक होता है ताकि कई सक्रिय तूफानों के बीच पहचान स्पष्ट हो सके और चेतावनी जारी करना आसान हो। इससे आपातकालीन सेवाओं, मीडिया और जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिलती है। नामकरण प्रक्रिया ने तूफानों को ट्रैक करने और उनकी चर्चा करने में आसानी प्रदान की है, साथ ही यह तूफान के प्रभावों और इतिहास को रिकॉर्ड करने में भी मदद करती है।

ये भी पढ़ें- Hurricane Milton: टॉरनेडो और टाइफून से कैसे अलग है हरिकेन? कैसे बनता है और कितना जानलेवा है? यहां सबकुछ

क्या है तूफानों के नामकरण का प्रोसेस ?
प्रमुख संगठन

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवाएं मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के लिए तूफानों के नाम तय करते हैं।
  • ये संगठन विभिन्न क्षेत्रीय निकायों के माध्यम से चक्रवातों और तूफानों का नामकरण करते हैं, जैसे ESCAP/WMO टाइफून समिति, ट्रॉपिकल चक्रवातों पर पैनल, RA IV तूफान समिति।

नामों की लिस्ट:

  • हर क्षेत्र की मौसम सेवाएं नामों की सूची तैयार करती हैं, जिनका इस्तेमाल भविष्य में आने वाले चक्रवातों और तूफानों के लिए किया जाता है।
  • खास बात यह है कि एक बार किसी नाम का इस्तेमाल हो जाने के बाद, उसे लिस्ट से हटा दिया जाता है, खासकर अगर वह तूफान बहुत ज्यादा विनाशकारी हो।

नाम चुनने का तरीका

  • नामों को ऐसा चुना जाता है, जो उच्चारण में आसान हों और संबंधित क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और लोगों के लिए परिचित हों।
  • हरिकेन के नाम आमतौर पर वर्णमाला क्रम में रखे जाते हैं, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के नामों का बारी-बारी से उपयोग किया जाता है।

तूफानों के नाम कैसे चुने जाते हैं? क्या होती है माइथॉलीजि?

  • भाषाई सरलता: नामों का चयन इस आधार पर किया जाता है कि वे आसानी से बोले जा सकें और समझने में कठिन न हों।
  • सांस्कृतिक टच: नामों को संबंधित क्षेत्र की सांस्कृतिक टच और स्थानीय महत्व के अनुसार चुना जाता है।
  • विशिष्टता: एक ही क्षेत्र में एक ही नाम का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता है, खासकर जब किसी तूफान ने अत्यधिक नुकसान पहुंचाया हो।

ये भी पढ़ें- Hurricane Milton Update: फ्लोरिडा में तबाही! खतरे में 20 लाख से ज्यादा की आबादी, 15 दिनों में दूसरा तूफान

विभिन्न क्षेत्रों में तूफानों के नाम

  • अटलांटिक और कैरेबियन में: तूफानों को 'हरिकेन' कहा जाता है।
  • प्रशांत महासागर में: इन्हें 'टाइफून' कहा जाता है।
  • भारतीय महासागर और बंगाल की खाड़ी में: इन्हें 'चक्रवात' कहा जाता है।
  • दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में: इन्हें 'ट्रॉपिकल चक्रवात' कहा जाता है।

नामों का रिटायरमेंट
अगर, कोई तूफान बहुत अधिक विनाशकारी हो, तो उसका नाम रिटायर कर दिया जाता है ताकि उसकी भयानक यादों को सम्मान दिया जा सके। आइए जानते हैं कौन-कौन से हैं?

  • कैटरीना (2005)
  • सैंडी (2012)
  • हार्वे (2017)
  • इरमा (2017)

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अटलांटिक हरिकेन तूफान और उनकी टाइमलाइन

  • 1954: हरिकेन कैरोल - न्यू इंग्लैंड में भारी नुकसान।
  • 1955:हरिकेन डायन - पूर्वी तट पर व्यापक बाढ़।
  • 1957: हरिकेन ऑड्रे - लुइसियाना में 400 से अधिक मौतें।
  • 1969: हरिकेन कैमिली - मिसिसिपी में 190 मील/घंटा की हवाओं के साथ एक सबसे विनाशकारी हरिकेन।
  • 1972: हरिकेन एग्नेस- $2.1 बिलियन का नुकसान, भारी बाढ़।
  • 1988: हरिकेन गिल्बर्ट - कैरिबियन और मैक्सिको में भारी तबाही।
  • 1992: हरिकेन एंड्रयू - फ्लोरिडा में $25 बिलियन का नुकसान, लगभग 65 लोग मारे गए।
  • 1999: हरिकेन फ्लॉयड - पूर्वी तट पर बड़े पैमाने पर बाढ़ और $6 बिलियन का नुकसान।
  • 2005: हरिकेन कैटरीना- अमेरिकी इतिहास का सबसे विनाशकारी हरिकेन, न्यू ऑरलियन्स में 1,800 से अधिक मौतें।
  • 2017: हरिकेन इरमा - कैरिबियन और फ्लोरिडा में $77 बिलियन का नुकसान।
  • 2017: हरिकेन मारिया- प्यूर्टो रिको में भारी तबाही, 3,000 से अधिक मौतें।
  • 2018: हरिकेन माइकल - कैटेगरी 5 का तूफान, फ्लोरिडा में $25 बिलियन का नुकसान।
  • 2020: हरिकेन लॉरा - लुइसियाना में तबाही मचाई।
  • 2021: हरिकेन आइडा - कैटेगरी 4 का तूफान, लुइसियाना से पूर्वी अमेरिका तक भारी नुकसान।
  • 2022: हरिकेन इयान - फ्लोरिडा में भारी तबाही, 150 से अधिक मौतें और $113 बिलियन से अधिक का नुकसान।
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