दुनिया भर में तेल रिफाइनिंग पर संकट से रिलायंस को कैसे फायदा हो रहा है?
दुनिया भर में तेल रिफाइनिंग संकट होने से रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बना हुआ है। भारत की रिलायंस और अमेरिका की वैलरो जैसी कंपनियां इसका खूब फायदा उठा रही हैं।
नई दिल्ली, 22 जूनः दुनिया भर के ड्राइवर पेट्रोल पंप पर जब ईंधन भराने जाते हैं तब उनके चेहरे पर अचानक मायूसी बढ़ जाती है क्योंकि ईंधन की कीमतें बढ़ने के साथ ही बिजली उत्पादन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ रही है। दुनिया भर में तेल रिफाइनिंग संकट होने से रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बना हुआ है। भारत की रिलायंस और अमेरिका की वैलरो जैसी कंपनियां इसका खूब फायदा उठा रही हैं।

यूक्रेन संकट के बाद खराब हुए हालात
यूं तो 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले ही तेलों की कीमतें बढ़ा दी गई थीं, लेकिन मार्च के मध्य के बाद से, ईंधन की लागत बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है। उच्च वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए कच्चे पेट्रोल और डीजल को संसाधित करने के लिए पर्याप्त शोधन क्षमता की कमी इसका मुख्य कारण है।

विश्व रिफाइनरी कितना उत्पादन कर सकती है?
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक हर दिन लगभग 100 मिलियन बैरल तेल को परिष्कृत करने की पर्याप्त क्षमता है, लेकिन उस क्षमता का लगभग 20% अनुपयोगी है। उस अनुपयोगी क्षमता का अधिकांश भाग लैटिन अमेरिका और अन्य जगहों पर है जहां निवेश की कमी है। ऐसे में यह लगभग 82-83 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन करता है।

कितनी रिफाइनरियां हुईं बंद?
रिफाइनिंग उद्योग का अनुमान है कि 2020 की शुरुआत से दुनिया ने कुल 3.3 मिलियन बैरल दैनिक रिफाइनिंग क्षमता खो दी है। इनमें से लगभग एक तिहाई नुकसान संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ, बाकी रूस, चीन और यूरोप में हुआ है। महामारी की शुरुआत में लॉकडाउन और रिमोट वर्क से ईंधन की मांग में काफी कमी आयी। इससे पहले, कम से कम तीन दशकों तक किसी भी वर्ष में रिफाइनिंग क्षमता में इतनी गिरावट नहीं हुई थी। हालांकि आने वाले वक्त में वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता 2022 में 1 मिलियन बीपीडी प्रति दिन और 2023 में 1.6 मिलियन बीपीडी तक बढ़ जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बीते अप्रैल में, 78 मिलियन बैरल प्रति दिन रिफाइन किया गया था, जो पूर्व-महामारी औसत 82.1 मिलियन बीपीडी से काफी कम है। आईईए को उम्मीद है कि गर्मियों के दौरान यह रिबाउंड होकर 81.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो जाएगा।

विकसित देशों में हो रहा कम परिचालन
संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस और यूरोप महामारी से पहले की तुलना में कम क्षमता पर परिचालन कर रही हैं। अमेरिकी रिफाइनर ने विभिन्न कारणों से 2019 से लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्षमता बंद कर दी है। रूस की रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 20 फीसदी मई में बेकार हो गया था। वहीं, कई पश्चिमी देश रूसी ईंधन को नकार रहे हैं। चीन के पास सबसे अधिक रिफाइनिंग क्षमता है। यहां परिष्कृत उत्पादों को केवल आधिकारिक कोटा के तहत निर्यात किया जा रहा है। मुख्य रूप से राज्य के स्वामित्व वाली बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों को, न कि छोटी स्वतंत्र कंपनियों को जिनके पास चीन की अतिरिक्त क्षमता है। पिछले सप्ताह तक, चीन की सरकारी रिफाइनरियों में औसत रन रेट लगभग 71.3% और स्वतंत्र रिफाइनरियों में लगभग 65.5% थी। यह वर्ष की शुरुआत से बढ़ा है, लेकिन ऐतिहासिक मानकों से कम हो गया है।

मौजूदा कंडीशन में किसे फायदा हो रहा है?
रिफाइनर, विशेष रूप से वे जो अन्य देशों को बड़ी मात्रा में ईंधन का निर्यात करते हैं, जैसे कि यूएस रिफाइनर। वैश्विक ईंधन घाटे ने रिफाइनिंग मार्जिन को ऐतिहासिक ऊंचाई पर धकेल दिया है, जो लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल तक फैल गई है। इससे अमेरिका स्थित वैलेरो और भारत स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज को भारी मुनाफा हुआ है। आईईए के अनुसार, भारत जो 5 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक का तेल रिफाइन करता है, फिलहाल घरेलू उपयोग और निर्यात के लिए सस्ते रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है।












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