भारत से विनाशक शस्त्र पाकर इस छोटे से देश ने चीन की नाक में किया दम, भड़के ड्रैगन ने दी औकात दिखाने की धमकी
China-Philippines Conflict: दक्षिण चीन सागर में बसे फिलीपींस ने चीन की नाक में दम कर दिया है और चीन की सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया है, कि फिलीपींस ने विवादित जगह सेकेंड थॉमस शोल में अपने ग्राउंडेड जहाज सिएरा माद्रे को आपूर्ति पहुंचाकर एक बार फिर सैन्य उकसावे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
आपको बता दें, कि सेकंड थॉमस शोल नाम का एक जगह दक्षिण चीन सागर में स्थित है, जहां पर उथले पानी में साल 1999 में फिलीपींस का एक जहाज, जिसका नाम सिएरा माद्रे है, वो फंस गया था। फिलीपींस ने आज तक अपने उस जहाज को वहां से हटाया नहीं है, बल्कि फिलीपींस के कुछ लोगों का दल रहता है।

सेकंड थॉमस शोल दक्षिण चीन सागर में स्थित है, जिसपर चीन अपना दावा करता है, लेकिन फिलीपींस उस जगह को अपना कहता है और नियमति तौर पर जहाज में मौजूद अपने दल को खाने पीने की सामानों की आपूर्ति करता रहता है, जिससे चीन चिढ़ा रहता है।
सिएरा माद्रे जहाज अब पूरी तरह से खराब हो चुका है और सालों से पानी में रहने की वजह से और मरम्मत नहीं होने की वजह से जहाज में अब जंग लग चुकी है और बड़े बड़े छेद हो चुके हैं। कुल मिलाकर ये जहाज अब किसी काम का नहीं है, लेकिन जहाज पर मौजूद 9 लोगों के दल के लिए फिलीपींस जब अपने बोट्स में समान भेजता है, तो उन बोट्स को चीन निशाना बनाता रहता है और इसी बात को लेकर दोनों देशों में विवाद होता रहता है।
फिलीपींस अपने जहाज को नहीं हटाने पर अड़ा हुआ है। पिछले साल अक्टूबर में फिलीपींस ने दावा किया था, कि उसके सप्लाई बोट को चीनी कोस्ट गार्ड ने टक्कर मारी थी और बोट को रोक दिया था।
कुल मिलाकर सिएरा माद्रे जहाज को लेकर फिलीपींस एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है, क्योंकि अगर फिलीपींस हटता है, तो उस इलाके पर चीन कब्जा कर लेगा।
फिलीपींस-चीन में बढ़ता तनाव
फिलीपींस ने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का करार किया था और माना जा रहा है, कि अगरे 10 से 15 दिनों में भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल फिलीपींस पहुंच जाएंगे, जिसे चीन से लगती सीमा में फिलीपींस तैनात करेगा। चीन का एयर डिफेंस सिस्टम उतना शक्तिशाली नहीं है, कि वो भारतीय ब्रह्मोस को डिटेक्ट कर सके, जिससे चीन काफी ज्यादा गुस्से में है।

दूसरी तरफ, इस महीने की शुरुआत में, एक फिलीपींस के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने मीडिया को बताया था, कि फिलीपींस के सशस्त्र बलों (एएफपी) ने 21 जनवरी को फिलीपीन नेवी आइलैंडर समुद्री गश्ती विमान का उपयोग करके सिएरा माद्रे जहाज के लिए एक एयरड्रॉप मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
जिसके बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि "रेनाई जियाओ" (दूसरा थॉमस शोल) पर 'अवैध' रूप से खड़े अपने युद्धपोत पर हवाई आपूर्ति पहुंचाकर फिलीपींस ने चीन को उकसाने की कोशिश की है। चीनी मीडिया ने इसे फिलीपींस का अतिक्रमण करार दिया है और मनीला की आलोचना की है।
चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया, "21 जनवरी को जहाज पर सामानों की आपूर्ति कर फिलीपींस ने तनाव को भड़का दिया है।" हालांकि, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि चीन ने फिलीपींस के हेलीकॉप्टर को जहाज पर सामान पहुंचाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वो नाकाम हो गया।
लेकिन, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर साउथ चाइना सी स्टडीज में वर्ल्ड नेवी रिसर्च सेंटर के निदेशक चेन जियांगमियाओ का कहना है, कि सामान पहुंचाने के लिए फिलीपींस विमान का इस्तेमाल इसलिए करता है, ताकि चीन इसमें बाधा ना डाले, क्योंकि चीन जानता है, कि बाधा डालने पर विमान हादसे का शिकार हो सकता है।
चेन ने कहा, "ऐसा नहीं है कि चीन के पास फिलीपीन के विमानों को रोकने के साधन नहीं हैं, सवाल यह है कि दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाएगा।

यूरेशियन टाइम्स ने एक अज्ञात विशेषज्ञ के हवाले से कहा है, कि भले ही चीन और ताइवान के बीच काफी तनाव है, लेकिन हकीकत ये है, कि चीन और फिलीपींस के बीच टकराव की स्थिति बन रही है।
उन्होंने कहा, कि फिलीपींस अमेरिका के इशारे पर चीन से उलझ रहा है और अमेरिका चाहता है, कि ऐसा हो, ताकि ताइवान की तरफ से चीन का प्रेशर कम हो। क्योंकि फिलीपींस से उलझने की स्थिति में चीनी आर्मी, दक्षिण चीन सागर में दूसरे विवादित जगहों पर सेना तैनात करने के लिए मजबूर हो जाएगी।
फिलीपींस को अमेरिका और भारत से मदद
रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की आक्रामक कार्रवाइयों का विरोध करने के लिए को लेकर अमेरिका और फिलीपींस, मार्च महीने मनीला में वरिष्ठ रक्षा और राजनयिक अधिकारियों के एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
यदि यह अमल में आता है, तो 2012 के बाद फिलीपींस में यह पहली टू-प्लस-टू बैठक होगी। वाशिंगटन और मनीला ने सात साल के लंबे अंतराल के बाद पिछले साल बातचीत फिर से शुरू की।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के इस साल मार्च में अपने फिलिपिनो समकक्षों एनरिक मनालो और गिल्बर्ट टेओडोरो से मिलने की उम्मीद है। इस संवाद से चीन को यह संदेश जाता है, कि गठबंधन दक्षिण चीन सागर में विस्तार करने की उसकी आक्रामक योजनाओं के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा रहेगा।
वाशिंगटन और मनीला 1951 की पारस्परिक रक्षा संधि के अनुसार सहयोगी हैं। बाइडेन प्रशासन ने मनीला के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, "मैं स्पष्ट होना चाहता हूं, कि फिलीपींस के प्रति संयुक्त राज्य अमेरिका की रक्षा प्रतिबद्धता दृढ़ है।" यानि, अगर फिलीपींस पर चीन हमला करता है, तो फिलीपींस की मदद करने के लिए अमेरिका आगे बढ़ेगा।

वहीं, चीन की चेतावनियों को फिलीपींस अनसुना कर रहा है, क्योंकि उसे बहुत जल्द भारत से ब्रह्मोस मिसाइल मिलने वाला है। मनीला में भारतीय राजदूत शंभू कुमारन ने कहा, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का पहला बैच "जल्द ही" फिलीपींस पहुंचाया जाएगा।
साल 2022 में फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए समझौता किया था। फिलीपींस के तत्कालीन रक्षा सचिव डेल्फ़िन लोरेंजाना ने अनुबंध पर हस्ताक्षर के दौरान कहा था, कि "दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों के रूप में, ब्रह्मोस मिसाइलें हमारी संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ प्रतिरोध प्रदान करेंगी, खासकर पश्चिमी फिलीपींस सागर में।"
माना जा रहा है, कि अगर चीन आक्रामकता दिखाता है, तो फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे दक्षिण चीन सागर युद्ध का मैदान बन जाएगा और फिलहाल चीन, ऐसा करके अपनी बर्बाद होती अर्थव्यवस्था के लिए और जोखिम मोल लेना नहीं चाहेगा।
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