तालिबान के पास कितनी है संपत्ति और कहां से आता है संगठन चलाने के लिए 'अथाह' पैसा? जानिए बजट
फोर्ब्स पत्रिका ने 2016 में दावा किया था कि तालिबान के पास अथाह संपत्ति है और अब स्थिति काफी बदल चुकी है।
काबुल, अगस्त 14: अफगानिस्तान में तालिबान राज स्थापित हुए डेढ़ महीने का वक्त हो चुका है और अफगानिस्तान आर्थिक मदद के लिए दुनिया की तरफ देख रहा है। तालिबान ने दुनिया से एक ऐसी सरकार बनाने का वादा किया था, जिसमें सभी जाति, धर्म और महिलाओं की भागीदारी हो, लेकिन तालिबान अपने वादे से मुकरता नजर आ रहा है। फिर भी देखा जाए तो 2021 का तालिबान 1990 के दशक के अंत के तालिबान से अलग दिख रहा है। तालिबान की तरफ से जो वीडियो जारी किया जाता है और अलग अलग मीडिया स्रोतों के हवाले से तालिबान को लेकर जो वीडियो फूटेज मिलते हैं, उससे साफ पता चलता है कि तालिबानी नेताओं की भेषभूषा और कार्य करने की शैली में भी परिवर्तन हुआ है। लेकिन, क्या आप जानते हैं तालिबान की संपत्ति कितनी है और तालिबान के पास पैसा कहां से आता है?
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कितना बदल गया है तालिबान?
तालिबान को लेकर जो रिपोर्ट मिल रही हैं और जो वीडियो फूटेज मिलते हैं, उससे पता चलता है कि तालिबान के पास अत्याधुनिक हथियार आ गये हैं और उनके पास आधुनिक एसयूवी गाड़ियां आ गई हैं। खासकर अमेरिकी सेना द्वारा अफगानिस्तान में छोड़े गये हथियार भी तालिबान के हाथ लग चुके हैं। तालिबान के लड़ाके जो कपड़े पहनते हैं, वो नये और काफी हद तक साफ दिखते हैं, जबकि पुराने तालिबान की भेषभूषा भी पुराना होता था और उनका रहन-सहन भी कबीलों के जैसा होता था। हालांकि, देखा जाए तो विचारधारा के स्तर पर तालिबान की सोच अभी भी बहुत हद कर पुराने तालिबान जैसा ही है और महिलाओं को लेकर तालिबान के विचार खतरनाक ही हैं, लेकिन 2021 के तालिबान में 1990 के दशक के तालिबान जैसा पागलपन नहीं दिख रहा है। तालिबान के लड़ाके अब अनुशासित नजर आते हैं और ऐसा लगता है कि उन्हें काफी अच्छी ट्रेनिंग दी गई है और वो आत्मविश्वास से लबरेज दिखते हैं और वो क्यों नहीं आत्मविश्वास से भरे दिखेंगे, आखिर उनके खजाने में पैसा भरा हुआ जो है।

2016 में पांचवें नंबर पर था तालिबान
तो सवाल ये उठता है कि तालिबान के पास कितना पैसा है और ये पैसा कहां से आता है? 2016 में फोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया के सबसे अमीर आतंकवादी संगठनों की लिस्ट जारी की थी, जिसमें तालिबान को पांचवां सबसे अमीर आतंकी संगठन बताया गया था। उस वक्त आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को सबसे अमीर आतंकी संगठन बताया गया था और उसकी संपत्ति करीब 2 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई थी। हालांकि, आईएसआईएस ने इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था और उसे कई देशों में स्थिति इस्लामिक चरमपंथी संगठनों से फंड मिला गुआ था, लेकिन अमेरिका ने आईएसआईएस को तबाह कर दिया और उसके मुखिया अबु बकर अल बगदादी को अमेरिका ने बम से उड़ा दिया था। लेकिन, फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में तालिबान का वार्षिक कारोबार करीब 400 मिलियन डॉलर आंकी गई थी।

तालिबान के पास कितनी संपत्ति
फोर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि तालिबान के पास पैसे कमाने का मूल स्रोत मादक पदार्थों की तस्करी, सुरक्षा देने के नाम पर वसूली, अलग अलग चरमपंथी संगठनों से मिला दान और उन इलाकों से वसूला गया धन था, जहां तालिबान का नियंत्रण था। फोर्ब्स ने 400 मिलियन वार्षिक 'व्यापार' की ये रिपोर्ट 2016 में जारी की थी और उस वक्त तालिबान काफी कमजोर था और उसके पास कुछ ही छोटे छोटे इलाकों पर नियंत्रण था। लेकिन अब तालिबान का नियंत्रण अफगानिस्तान के कई बड़े और महत्वपूर्ण शहरों पर हो गया है और उसकी संपत्ति में काफी ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।

काफी ज्यादा बढ़ी तालिबान की संपत्ति
रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी ने नाटो की गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से तालिबान की संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान की संपत्ति में कई गुना इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-2020 वित्त वर्ष में तालिबान का वार्षिक बजट 1.6 अरब डॉलर था, तो 2016 के फोर्ब्स के आंकड़ों की तुलना में चार सालों में 400 प्रतिशत की वृद्धि है। इस रिपोर्ट में लिस्ट बनाकर दिखाया गया है कि तालिबान के पास कहां से इतने पैसे आते हैं और इन पैसों को तालिबान किन मदों में कहां कहां खर्च करता है।

तालिबान के राजस्व का स्रोत
रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी ने नाटो के खुफिया दस्तावेज से जो रिपोर्ट हासिल की है, उसमें तालिबान की कमाई का पूरा किस्सा दर्ज है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान माइनिंग से 464 मिलियन डॉलर कमाता है तो मादक पदार्थों की तस्करी से उसे 416 मिलियन डॉलर की आमदनी होती है। वहीं, अलग अलग चरमपंथी संगठनों से तालिबान को 240 मिलियन डॉलर चंदा मिलता है और तालिबान अलग अलग तरीके से लोगों से करीब 240 मिलियन डॉलर की उगाही करता है। वहीं, जिन इलाकों पर तालिबान का कब्जा है, वहां से तालिबान बतौर टैक्स करीब 160 मिलियन वसूलता है, जिसमें प्रोटेक्शन मनी और एक्सटॉर्शन मनी भी शामिल है। वहीं, रीयल स्टेस से तालिबान को 80 मिलियन डॉलर की कमाई होती है।

आत्मनिर्भर बनने की कोशिश में तालिबान
गोपनीय नाटो रिपोर्ट ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला है कि तालिबान नेतृत्व एक स्वतंत्र राजनीतिक और सैन्य इकाई बनने के लिए आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है और इस कोशिश में है कि उसे पैसों के लिए किसी और देश या किसी और संगठन पर मोहताज नहीं होना पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक, कई सालों से तालिबान इस कोशिश में है कि पैसों के लिए विदेशी संगठनों और विदेशी देशों खासकर पाकिस्तान पर निर्भरता कम की जाए। नाटो की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में कथित तौर पर तालिबान को विदेशी स्रोतों से अनुमानित $ 500 मिलियन डॉलर मिले थे, जिसे 2020 में तालिबान काफी कम कर चुका है।

अफगानिस्तान सरकार पर सवाल
सबसे हैरानी की बात ये है कि 2020 में जारी बजट के मुताबिक अफगानिस्तान सरकार का आधिकारिक बजट 5.5 अरब डॉलर था, जिसमें 2 प्रतिशत से कम रक्षा बजट को दिया गया था। हालांकि, 'तालिबान को अफगानिस्तान की सीमा पर खदेड़कर रखने में ज्यादातर पैसा अमेरिका खर्च कर रहा था, लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि अफगानिस्तान सरकार ने रक्षा बजट पर पैसे खर्च नहीं किए हैं, जिसकी स्थिति पूरी तरह बदल गई और अफगानिस्तान सरकार की हार हो गई।और तालिबान को रोकने में अफगानिस्तान सरकार पूरी तरह से नाकाम हो गई।

अमेरिका ने किए 1 ट्रिलियन खर्च
अमेरिका दावा करता है कि उसने पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान में सैनिकों को ट्रेनिंग और हथियार देने में करीब एक ट्रिलियन डॉलर खर्च किए हैं, जिसमें तालिबान से लड़ना भी शामिल है। लेकिन, अब अमेरिका के जाने के बाद पता चल रहा है कि महज डेढ़ महीने में ही अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था ढह गई है। जो अमेरिकी निवेश को सवालों के घेरे में ला रहे हैं। व्यापारिक नजरिए से देखा जाए तो तालिबान ने लगातार तरक्की की है और उसने पैसों का स्रोत बनाए रखा है और उसी की बदौलत आज का तालिबान काफी बदला- बदला नजर आता है और उसने अपनी विचारधारा में थोड़ा परिवर्तन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से बातचीत शुरू की थी, क्योंकि तालिबान अब जानने लगा है कि अगर उसे वैश्विक मंच पर रहना है तो उसे बातचीत करनी होगी और उसे अगर अपने संगठन को जिंदा रखना है तो पैसे कमाने के अलग अलग स्रोतों के बारे में सोचना होगा।
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