छोटे देशों को लोन देकर बर्बाद करने वाला चीन खुद लोन के चक्कर में कैसे बर्बाद हो रहा है?
बीजिंग, 24 जुलाईः दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन गंभीर बैंकिंग संकट के दौर से गुजर रहा है। चीन में बैंकों के बुरे दौर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैंकों ने ग्राहकों के खाते से पैसे निकालने पर रोक लगा दिया है। बैंकों के इस फैसले के विरोध में चीन में हजारों लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। इस विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए सरकार ने बैंकों के बाहर टैंक उतार दिए हैं।

बैंकों के आगे टैंक हुए तैनात
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन में बीते अप्रैल महीने से ही लोगों का प्रदर्शन जारी है। कई जगहों पर तो हिंसक प्रदर्शन की भी खबरें सुनाई दे रही हैं। ऐसे में बिगड़ती स्थिति पर काबू पाने के लिए चीन की सरकार ने अब बैंकों के आस-पास टैंक तैनात कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है। बताया जाता है कि यह वीडियो चीन के हेनान प्रांत का है। यहां कई टैंक कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन ने लोगों को बैंक के अंदर जाने देने से रोकने के लिए टैंक तैनात करने का आदेश दिया है।

बैंकों से गायब हुए रुपये
चीन में बीते अप्रैल महीने में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में एक खबर प्रकाशित हुए थी। इस खबर में चीनी बैंकों में हुए घोटलों के बारे में बताया गया था। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि 40 बिलियन युआन, यानी करीब (6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) चीन के बैंकों से गायब हो गए हैं। खबरों के मुताबिक चीन के हेनान और अनहुई प्रांतों में बैंकों से निकासी पर भी रोक लगा दी गई थी। उस समय बैंकों ने कहा था कि वे अपने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए ग्रहकों के खातों से निकासी पर रोक लगा रहे हैं।

पैसा निकालने के लिए लोग परेशान
चीन में जारी इस बैंकिंग संकट से न्यू ओरिएंटल कंट्री बैंक ऑफ कैफेंग, जिचेंग हुआंगहुई कम्युनिटी बैंक, शांगकाई हुइमिन काउंटी बैंक और युजौ शिन मिन शेंग विलेज बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लोग बैंकों से पैसा निकालने के लिए पिछले तीन तीन महीनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें बैंक के भीतर नहीं घुसने दे रहा है।

रियल स्टेट सेक्टर भी वजह
बैंकिंग सेक्टर की इस स्थिति का एक और कारण चीन में ठप चल रहे रियल एस्टेट कारोबार को भी बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक बैंकों ने बड़े-बड़े प्रॉपर्टी डीलर्स को पैसा दे रखा है, लेकिन वे पैसे लौटा नहीं रहे हैं। कहा जा रहा है कि शी जिनपिंग सरकार के करीबी होने के चलते बैंक उन पर कार्रवाई भी नहीं कर पा रहे हैं. खामियाजा आम ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है

बैंकों को नहीं मिल रही ईएमआई
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के अधिकांश उच्चमध्यमवर्गीय लोगों ने रियल स्टेट में अपना पैसा लगा रखा है। लोग बैंकों से लोन लेकर महंगे फ्लैट खरीदते रहे हैं। लेकिन चीन में बीते कुछ समय से रियल स्टेट का बबल फूट गया है। अचानक फ्लैट सस्ते हो गए हैं। यहां तक कि लहसून, गेहूं, तरबूज देकर भी फ्लैट के किश्त चुकाए जा रहे हैं। ऐसे में लोग महंगे फ्लैटों की किश्त चुकाने के बदले सस्ते फ्लैट खरीद रहे हैं। लोगों ने पुरानी ईएमआई चुकानी बंद कर दी है। जिसकी वजह से बैंकों में कैश क्रंच आना शुरू हो गया है।

लोगों ने कर्ज चुकाना किया बंद
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने के कारण लोगों ने कर्ज की किस्तें चुकाना बंद कर दिया है। बिल्डर खुद कर्ज से दबे हुए हैं। इस कारण उनमें से बहुतों ने उन प्रोजेक्ट्स पर भी काम रोक दिया है, जिनके फ्लैट वे बेच चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय बैंक एएनजेड की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं में खरीदे गए मकानों पर 220 बिलियन डॉलर का कर्ज है।

बैंकों में बढ़ती गई कर्ज की मात्रा
जापानी बैंक नोमुरा का अनुमान है मुताबिक 2013 से 2020 के बीच रियल एस्टेट कंपनियों ने सिर्फ 60 फीसदी मकान ही तैयार कर खरीदारों को सौंपे हैं। इस बीच चीन में मकान खरीदने के मकसद से लिये गए कर्ज की मात्रा बढ़ती चली गई है। चीन में बर्बाद हो रहे बैंकिंग सेक्टर का मूल कारण जो भी हो लेकिन इतना तय है कि देश में बैंकिंग सेक्टर गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

ढ़ह सकती हैं रियल स्टेट कंपनियां
हांगसेंग बैंक चाइना के मुख्य अर्थशास्त्री दान वांग ने वेबसाइट निक्कई एशिया डॉट कॉम से बातचीत में कहा-'अगर दसियों हजार मकान खरीदार सचमुच कर्ज की किस्तें चुकाना रोक देते हैं, तो रियल एस्टेट की कंपनियां ढह जाएंगी। तब उनके पास बिल्कुल ही नकदी नहीं बचेगी। बैंकों के लिए भी भारी जोखिम है। खास कर ये जोखिम स्थानीय बैंकों के लिए है, जिनका मुख्य कारोबार आवासीय क्षेत्र में ही है। यह संभव नहीं है कि सेंट्रल बैंक उन सभी बैंकों को बचा ले।'












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