जूडो-कराटे में ब्लैक बेल्ट पुतिन कैसे लड़ रहे हैं कोरोना से ?
मॉस्को। शुरू में लापरवाह दिख रहे रूस ने अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई तेज कर दी है। कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए रूस ने 20 दिन में ही 18 मोड्यूलर अस्पताल बना लिये जिनमें कुल 10 हजार कोरोना मरीजों के इलाज की सुविधा है। इन सभी अस्पतालों में जांच के तमाम उपकरण भी इंस्टॉल कर दिये गये हैं। इतने कम समय में इतने अधिक बेड का अस्पताल बनाने में रूस ने चीन को भी पछाड़ दिया है। इतना ही नहीं रूसी वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सिन की खोज में भी बहुत तेजी दिखायी है। रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि एंटी कोरोना वैक्सिन तैयार कर लिया गया है। इंसानों पर इस वैक्सिन की परीक्षा बाकी है। इसके परीक्षण के लिए सरकार से इजाजत मांगी गयी है। संभावना है कि जून के अंत में इस वैक्सिन के परीक्षण का पहला चरण शुरू हो जाएगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कोरोना से निबटने के लिए उस प्रोफेसर (इवान डिडोव) को अपना सलाहकार बनाया है जो उनकी बेटी मारिया का शिक्षक रहा है। इवान डिडोव नेशनल एंडोक्रिनोलॉजी (हारमोन ग्रंथियों का अध्ययन करने वाला विज्ञान) सेंटर के अध्यक्ष हैं। वे पुतिन के नौ सलाहकारों में एक प्रमुख व्यक्ति हैं।

रहस्यमय पुतिन
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले केजीबी में जासूस थे इसलिए वे अपनी निजी जिंदगी को बहुत गोपनीय रखते हैं। माना जाता है कि मारिया वोरोनोत्सोवा पुतिन की बड़ी बेटी हैं। मारिया जब 2011 में मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी में जीव विज्ञान में रिसर्च कर रही थीं तब इवान डिडोव ही उनके गाइड थे। वैसे इवान जीव विज्ञान के विद्वान माने जाते हैं जिनके 600 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी के कागजातों में कहीं भी इस बात पुष्टि नहीं की गयी है कि मारिया, पुतिन की बेटी हैं। पुतिन ने इस बात का न तो कभी खंडन किया है और न ही कभी स्वीकार किया है। उन्होंने 2013 में अपनी पत्नी ल्यूडमिला को तलाक दे दिया था। ल्यूडमिला और पुतिन बहुत कम मौकों पर सार्वजनिक होते थे। उनकी दो बेटियां हैं। पुतिन ने हमेशा इन्हें दुनिया से छिपा कर रखा। उनकी बेटियों के बारे में आधिकारिक रूप से कहीं कोई प्रमाणिक दस्तावेज नहीं है। चर्चा के मुताबिक मारिया अभी हॉलैंड में रहती हैं। जब कि उनकी दूसरी बेटी कटरिना तिखोनोवा रॉक एंड रोल डांसर हैं। अब इवान डिडोव को कोरोना एक्सपर्ट के रूप में सलाहकार बनाये जाने से पुतिन की बेटी मारिया एक बार फिर चर्चा में हैं।

शुरू में बेपरवाह थे पुतिन
रूस में अभी कोरोना मरीजों की संख्या साढ़े 13 हजार को पार कर गयी है। 105 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को वहां 1667 नये मामले सामने आये जो एक दिन में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। रूस में कोरोना के 69 फीसदी मरीज राजधानी मास्को में ही पाये गये हैं। इसलिए रूस ने मास्को के आसपास बड़े पैमाने पर नये अस्पताल बवनाये हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुरू में कोरोना से बेपरवाह दिखे थे। उन्होंने अपने देश को कोरोना से सुरक्षित माना था इसलिए लॉकडाउन और क्वारेंटाइन के विकल्प पर गौर नहीं किया था। 13 मार्च तक वहां कोरोना का एक भी मरीज नहीं था। लेकिन इसके बाद तेजी से स्थिति बदलने लगी। 19 मार्च को कोरोना से पहली मौत हुई। 28 मार्च तक रूस में 228 लोग कोरोना पोजिटिव पाये गये। इसके बाद पुतिन की नींद खुली। 30 मार्च को देश की सीमा सील कर दी गयी। रेल और मोटर गाडियों के चलने पर रोक लगा दी गयी। फिर मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और दुकानें बंद की गयीं।

27 दिन में 13 हजार मरीज
रूस में कोरोना का कहर 27 दिन में ही जीरो से 13 हजार कैसे पहुंच गया ? विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के अधिकारियों ने कोरोना जांच की प्रक्रिया में बहुत बाधा पहुंचायी। कोरोना की जांच को लेकर ब्यूरोक्रेसी मुगालते में रही। सही समय पर जांच शुरू नहीं हुई जिसके वजह से कोरोना संक्रिमितों की सही संख्या सामने नहीं आ सकी। वैसे भी रूस में अफसर उस काम से डरते हैं जिससे सरकार की छवि पर आंच आती हो। जब तक नींद खुली तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मास्को टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबित अभी पुतिन सरकार कोरोना को लेकर जो आंकड़ा पेश कर रही है, वह हकीकत में इससे अधिक हो सकती है। 15 करोड़ की आबादी वाले रूस में 25 मार्च को कोरोना की संक्रमितों की संख्या केवल 495 बतायी गयी उस समय भी रूस के आंकड़ों पर सवाल उठाया गया था।

क्वारंटाइन तोड़ा तो सात साल की जेल
लेकिन अब राष्ट्रपति पुतिन की इस बात के लिए सराहना हो है कि उन्होंने कोरोना से निबटने में बहुत तेजी दिखायी है। सेना, पब्लिक कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट और हेल्थ डिपार्टमेंट में ने दिन रात मेहनत कर 10 हजार लोगों के इलाज के लिए सुविधा सम्पन्न अस्पताल बना दिया। इन अस्पतालों के अलावा बड़े पैमाने पर जांच केन्द्र भी काम कर रहे हैं। जब से जांच में तेजी आयी है, कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से सामने आती जा रही है। लेकिन इसको लेकर कोई अफरा-तफरी नहीं है क्यों कि इलाज की सुविधा मौजूद है। सराकर ने क्वारेंटाइन के नियमें को भी सख्त कर दिया है। पुतिन ने उस कानून पर दस्तखत कर दिये हैं जिसमें क्वारेंटाइन के नियमों को तोड़ने पर दंड कड़े किये गये हैं। अब क्वारंटाइन नियम तोड़ने पर सात साल जेल का दंड निर्धारित किया गया है। चूंकि कोरोना प्रभावितों की संख्या सबसे अधिक मास्को में है इसलिए यहां निगरानी के 17 हजार कैमरे लगाये गये हैं। इसके अलावा रूस में लॉकडाउन की अवधि 19 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी गयी है। रूस के लोग राष्ट्रपति पुतिन को एक फाइटर के रूप में देखते हैं। वे जूडो-कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं। आइस हॉकी के भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। कुछ देर हुई, लेकिन अब उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई तेज कर दी है।












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