इस्लाम को चायनीज बनाने की जिद, 5 सालों में शी जिनपिंग ने उइगर मुस्लिमों की जिंदगी कैसे नर्क बना दी?
चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के बीच जर्मनी स्थिति उइगर अधिकार समूह, वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को शांति, लोकतंत्र के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।

Uyghur rights group Nobel Prize: पिछले साल जुलाई महीने में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने एक भाषण में कहा था, कि देश के मुसलमानों को चीनी परंपरा के मुताबिक ढलना होगा और चीन को इस्लाम के मुताबिक नहीं, बल्कि इस्लाम को चीनी समाज के मुताबिक ढलना होगा। उन्होंने कहा था, कि इस्लाम को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान को मानना होगा, देश की नीतियों को कबूल करना होगा और इस्लाम को देश में फलने-फुलने के लिए चीनी परंपरा को अपनाने की जरूरत है। चीनी राष्ट्रपति का ये भाषण साफ तौर पर दर्शाता है, कि देश के मुसलमानों को लेकर उनकी सोच क्या है और उन्होंने अपनी जिद को लागू करने के लिए काफी सख्त प्लान को अपनाया है। पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद ही शी जिनपिंग ने मुसलमानों के लिए पंचवर्षीय प्लान पर काम शुरू कर दिया था। आइये जानते हैं, कि शी जिनपिंग का प्लान क्या था और अपने प्लान में वो कहां तक कामयाब हुए हैं?

चीन में उइगर मुस्लिमों की स्थिति क्या है?
चीन का शिनजियांग प्रांत उइगर मुस्लिमों की सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रांत है और ये प्रांत स्वायत्त है। इसे शिनजियांग ऑटोनॉमन रीजन यानि XQAR कहा जाता है, जो चीन के पश्चिमोत्तर हिस्से में है। इस क्षेत्र में पिछले कई सालों से उइगर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें कैंपों में रखा जाता है, उनके अंगों को काटकर बेचा जाता है, उनकी नशबंदी कर दी जाती है और उनसे जबरन काम लिया जाता है। हालांकि, उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन हर दिन अलग अलग सफाई पेश करता रहता है और हर सफाई में वो नई नई दलील पेश करता है। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वक्त चीन ने शिनजियांग प्रांत में करीब 10 लाख से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को कन्सट्रेशन कैंप में बंदी बनाकर रखा हुआ है। जिसके बारे में चीन दुनिया से कहता रहा है, कि उसने 10 लाख मुस्लिमों को बंदी नहीं बनाया है, बल्कि उन्हें 'व्यावसायिक ट्रेनिंग सेंटर' में रखा है, जहां उन्हें रोजगार करने लायक ट्रेनिंग दी जाती है।

उइगर मुस्लिमों से क्यों डरता है चीन?
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को डर है, कि कहीं चीन के अंदर रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग चीन में अस्थिरता की वजह ना बन जाएं, लिहाजा वो अल्पसंख्यकों को लगातार प्रताड़ित करते हैं। उइगर मुस्लिमों के अलावा, चीन में रहने वाले 12 करोड़ से ज्यादा अलग अलग अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के बड़े नेताओं का सोच काफी सख्त है। ये नेता इन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को चीन की मूल परंपरा और डीएनए में ढालना चाहते हैं। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी चाहती है, कि चीन में रहने वाले 12 करोड़ से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी चीन की बहुसंख्यक हान समुदाय में परिवर्तित हो जाएं, ताकि चीन के लिए आने वाले वक्त में भी कोई खतरा उत्पन्न ना हो। इन्हीं मंशाओं के साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और उनके नेता लगातार काम करते रहते हैं और अपने इस प्लान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए वो क्रूरता के हर स्तर को पार करने से भी परहेज नहीं करते हैं।

उइगर आबादी पर शी जिनपिंग का कहर
साल 2012 में पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने 'सेंन्ट्रल एथनिक वर्क' कॉन्फ्रेंस में कहा था, कि 'जो सड़ चुका है, उसे लेकर हमें शुरूआत नहीं करनी चाहिए और चीन में जो खत्म हो चुका है, उसे हटाते हुए नये सिरे से शुरूआत करनी चाहिए। पुरानी और सड़ चुकी जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना चाहिए, ताकि नई और अच्छी जड़ें जमीन से निकल सके।' शी जिनपिंग के इस बयान ने उइगर मुस्लिमों को लेकर उनकी नीति जाहिर कर दी थी। शी जिनपिंग के शुरूआती शासनकाल में यानि शुरूआती दो साल में शिनजियांग प्रांत में कई बम धमाके हुए थे। कई उइगर मुस्लिम आतंकियों ने सरकारी अधिकारियों पर हमले किए थे। जिसने कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं को क्रोधित कर दिया और फिर उइगर मुस्लिमों के खिलाफ शी जिनपिंग का थर्ड डिग्री टॉर्चर कार्यक्रम शुरू हुआ। शी जिनपिंग ने उइगर मुस्लिमों को लेकर पांच सालों का एक प्लान तैयार किया और इसके लिए उन्होंने साल 2016 में चेन क्वांगो नाम के एक नेता के हाथ में शिनजियांग प्रांत को सुधारने की जिम्मेदारी सौंप दी। चेन क्वांगो अपनी 'बंद मुठ्ठी' वाली पहचान के लिए जाने जाते थे। शी जिनपिंग से 'फ्री हैंड' मिलने के बाद चेन क्वांगो ने शिनजियांग में बन गये छोटे छोटे कट्टरपंथी और चरमपंथी उइगर मुस्लिमों के ग्रुप का पूरी तरह से सफाया कर दिया। सैकड़ों कट्टरपंथी को खामोश कर दिया गया और फिर मुस्लिमों के मन से कट्टरपंथी विचारधारा को निकालने के लिए कैंपों की स्थापना की गई।

शिनजियांग के लिए पांच सालों का प्लान क्या था?
चेन क्वांगो ने पहले साल में शिनजियांग पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करनी शुरू कर दी और प्रांत से सभी उग्रवादी समूहों का खात्मा कर दिया। उनसे निपटने के लिए किसी तरह की दया नहीं दिखाई गई। दूसरे साल में शिनजियांग में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की गई। तीसरे साल में उइगर मुस्लिमों को सामान्य करने की कोशिश की गई। चौथे साल में शिनजियांग प्रांत में व्यापक स्तर पर स्थिरता लाने की कोशिश करना था और पांचवें साल में चेन क्वांगों को एक शांत शिनजियांग क्षेत्र, शी जिनपिंग के हाथों में सौप देना था। लेकिन, पांच साल होने के बाद भी चेन क्वांगों अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए। कट्टरपंथी ग्रुप सफाए के बाद भी पनपते रहे और कम्युनिस्ट पार्टी की कन्सट्रेशन कैंप को छिपानेकी कोशिश भी नाकाम हो गई। धीरे धीरे उइगर मुस्लिमों पर किए जाने वाले अत्याचार की खबर दुनिया में फैलने लगी, जिसे चीन ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं पाया।

कन्सट्रेशन कैंप को बताया रोजगार कैंप
शुरूआती सालों चीन किसी भी तरह के कैंप होने की बात से ही इनकार करता रहा, लेकन जब चीन को सबूत दिए जाने लगे, तो फिर उसने रोजगार कैंप होने की बात कहनी शुरू कर दी। चीन कहता है, कि वो उइगर मुस्लिमों के लिए रोजगार ट्रेनिंग कैंप चलाता है, जहां उन्हें काम सिखाया जाता है। लेकिन, सवाल ये उठता है कि अगर कैंप के जरिए वास्तव में उइगर मुस्लिमों का विकास हो रहा है, तो फिर चीन कैंप्स को लेकर बार बार झूठ क्यों बोलता रहा। इस वक्त कम्यूनिस्ट पार्टी अपनी गुलाम मीडिया के जरिए शिनजियांग के बारे में प्रोपेगेंडा चलाने में व्यस्त है। वहीं, साल 2019 में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस शोहरत जाकिर, जो शिनजियांग सरकार के चेयरमैन हैं, उन्होंने कहा था कि 'साफ साफ कहूं तो इन कैंपो में काफी कम संख्या में लोग हैं और एक दिन समाज को इन कैंप्स की जरूरत नहीं होगी, और फिर ये कैंप्स अपने आप हट जाएंगे'। ऐसे में सवाल फिर से उठे, कि जब ये कैंप इतने जरूरी हैं, तो फिर इन्हें हटाया क्यों जाएगा और यहां इतने कम लोग क्यों हैं?
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उइगर मुस्लिमों की तस्करी
अक्टूबर 2021 में एक ऑस्ट्रेलियन अखबार ने ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था, कि साल 2017 से 2019 के बीच देश भर के कारखानों में लगभग 80 हजार उइगर मुसलमानों की तस्करी की गई। एएसपीआई की रिपोर्ट में कहा गया था, कि "घर से दूर कारखानों में उइगर मुस्लिम आम तौर पर अलग-अलग डॉर्मिटरी में रहते हैं, काम के घंटों के बाहर संगठित मंदारिन और वैचारिक प्रशिक्षण से गुजरते हैं, उनकी हर वक्त निगरानी की जाती है और उन्हें नमाज पढ़ने से लेकर किसी भी इस्लामिक विचार को मानने की इजाजत नहीं होती है।" ऑस्ट्रेलियन अखबार ने ये भी दावा किया था, कि कन्सट्रेशन कैंप में उइगर मुस्लिमों के अंग भी काट दिए जाते हैं और फिर उन्हें बेच दिया जाता है। लिहाजा, अब जब जर्मनी स्थिति वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है, तो फिर चीन का सख्त प्रतिक्रिया देना तय माना जा रहा है।












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