आसान नहीं है अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन हासिल करना
वाशिंगटन। अमेरिका में इन दिनों चुनावों का मौसम है। भारत की ही तरह वहां भी राजनेता जनता के बीच जा रहे हैं। बड़ी-बड़ी रैलियां कर रहे हैं और बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं।
नवंबर 2016 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होंगे जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के एक-एक उम्मीदवार के बीच बादशाहत की जंग होगी। जो जीतेगा वह अमेरिका का बादशाह बनेगा।
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फिलहाल तो उम्मीदवार नामांकन की रेस में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हाल ही में आयोवा कॉकस में हिलेरी क्लिंटन, टेड क्रूज और डोनाल्ड ट्रंप के बीच रेस थी।
डेमोक्रेटिक पार्टी से जहां हिलेरी क्लिंटन को जीत हासिल हुई तो वहीं रिपब्लिकन कैंडीडेट और बिजनेस टायकून डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही पार्टी के टेड क्रूज के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।
अमेरिका में राष्ट्रपति पद की रेस के लिए उम्मीदवारी में अपना नाम दर्ज कराना भी बड़ी टेढ़ी खीर है। इस जंग को जीतना भी एक तरह से किसी किले पर फतह हासिल करना है।
आप अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के बारे में जानें इससे पहले आपका उम्मीदवार कैसे चुने जाते हैं, यह जानना बहुत जरूरी है। एक नजर डालिए और जानिए कैसे होता है अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों का चयन।

सबसे पहली प्रॉसेस
कॉकस उम्मीदवारों के चयन की सबसे पहली प्रॉसेस है। कॉकस सपोर्टर्स या फिर किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्यों की उम्मीदवार के समर्थन हेतु होने वाली मीटिंग होती है। इस शब्द का जन्म अमेरिका में हुआ और यह ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और नेपाल में फैल गया। उम्मीदवारों का चयन प्राइमरी या फिर कॉकस प्रॉसेस के तहत होता है। इसमें अमेरिका में रहने वाले अमेरिकियों के साथ दूसरे देशों में बसे अमेरिकी भी हिस्सा लेते हैं।

प्राइमरी से अलग
कॉकस और प्राइमरी प्रॉसेस दोनों ही अलग-अलग प्रॉसेस हैं। कॉकस में पार्टी के मेंबर्स इकट्ठा होते हैं। वे स्कूलों में, घरों में या फिर पब्लिक प्लेसेज पर उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करते हैं। इसके बाद इन जगहों पर मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार को अपना समर्थन देते हैं और उनका चयन करते हैं।

वोटिंग में तय होता है नाम
कॉकस प्रॉसेस से अलग प्राइमरी प्रॉसेस में बैलेट में उम्मीदवारों के नाम के पर्चे डाले जाते हैं। वोटिंग पेपर बॉक्स में होते जिनकी गिनती के हिसाब से उम्मीदवार तय होते हैं। आपको बता दें कि अमेरिका के हर राज्य में नियमों के मुताबिक अलग-अलग तरह से प्राइमरी प्रॉसेस को पूरा किया जाता है।

क्या है ओपेन प्राइमरी प्रॉसेसे
प्राइमरी प्रॉसेस तीन प्रकार की होती है जिसमें पहली है ओपेन प्राइमरी। इस प्रॉसेस इसमें किसी भी राज्य के रजिस्टर्ड वोटर्स के पास वोट करके उम्मीदवारों के चयन का अधिकार होता है। वह डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन प्राइमरी में अपने मनमाफिक कैंडीडेट को वोट कर सकते हैं।

सिर्फ पार्टी के वोटर्स के लिए
यह प्रक्रिया सिर्फ पार्टी के रजिस्टर्ड वोटर्स के लिए ही होती है। हालांकि इसमें इंडिपेंडेंट वोटर्स को भी वोट करने का अधिकार मिला होता है। यहां आपको बताना चाहेंगे कि अमेरिका के राज्य न्यू हैंपशायर में सेमी क्लोज्ड प्राइमरी है।

दोनों से अलग
इस प्रॉसेस में सिर्फ दोनों पार्टी से जुड़ रजिस्टर्ड वोटर्स ही अपनी पार्टी के प्राइमरी इलेक्शन में वोट कर सकते हैं।

राज्य के कानून निर्धारित करते हैं कॉकस
कॉकस प्रॉसेस भी अमेरिका के राज्यों में बने कानून के हिसाब से अलग-अलग हो जाती है। यहां पर अगर उम्मीदवार डेमोक्रेटिक है तो फिर कॉकस में वोटर्स पब्लिक ग्रुप्स में नजर आते हैं। वोटर्स अलग-अलग हिस्सों में इकट्ठा होता अपने उम्मीदवार के लिए समर्थन जाहिर क रते हैं। आपको बता दें कि रिपब्ल्किन कॉकस में सीक्रेट वोटिंग के जरिए प्रतिनिधियों का चयन होता है।

पार्टी के मेंबर्स होते हैं प्रतिनिधि
कॉकस और प्राइमरी प्रॉसेस में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को नहीं चुना जाता है। पार्टी की मीटिंग में प्रतिनिधि इस काम को अंजाम देते हैं। यह प्रतिनिधि पार्टी के ही मेंबर्स होते हैं। इनका काम अपने उम्मीदवारों के लिए वोट करना होता है और इनका सेलेक्शन प्राइमरी में कर लिया जाता है। अगर उम्मीदवार को समर्थन या बहुमत हासिल नहीं होता है तो फिर कई मीटिंग्स के बाद नए उम्मीदवार का नाम तय किया जाता है।

आयोवा और न्यू हैंपशायर से ही शुरू होती है जंग
जैसे ही उम्मीदवारों का नाम तय होता है पार्टी उसकी फाइनल कैंपेनिंग में लग जाती है। यहां यह बात भी ध्यान देने वाली है कि अमेरिका में कॉकस और प्राइमरी प्रॉसेस आयोवा और न्यू हैंपशायर से शुरू होती है। अमेरिका के छोटे राज्य आयोवा और न्यू हैंपशायर में उम्मीदवारों को मिली जीत उसके आगे का भविष्य करती है।

मंगलवार को होते सभी अहम चुनाव
अमेरिका में जहां राष्ट्रपति चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होते हैं तो इसी दिन कई राज्यों में एक साथ प्राइमरी या फिर कॉकस इलेक्शंस होते और इसे,'सुपर ट्यूज्डे'कहते हैं। फरवरी 2008 में 24 राज्यों ने एक साथ 'सुपर ट्यूज्डे' आया तो वर्ष 2012 में 10 राज्यों में आया था। इस बार एक मार्च को अमेरिका के 16 राज्यों में एक साथ वोटिंग के साथ फिर से सुपर ट्यूज्डे आएगा।

उम्मीदवारों को चाहिए जरूरी समर्थन
कॉकस और प्राइमरी चुनावाों के खत्म होने के बाद जुलाई में पार्टियों की मीटिंग होती है जिसमें प्रतिनिधियों को चुना जाता है। रिपब्लिकन कैंडीडेट को राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी के लिए 1236 प्रतिनिधि या डेलीगेट्स का समर्थन चाहिए और डेमोक्रेटिक कैंडीडेट को 2383 प्रतिनिधियों या डेलीगेट्स का समर्थन चाहिए।
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