Explained: बाइडेन का कोर्ट पर कंट्रोल और ट्रंप को सजा! अमेरिका में लोकतंत्र कैसे बन रहा है तमाशा?
Joe Biden Donald Trump: अमेरिका में अकसर लोकतंत्र को लेकर अलग अलग थिंक टैंक्स में बहस होती रहती है, जिसमें भारत की विशाल लोकतांत्रिक प्रणाली पर सवाल उठाए जाते हैं और लोकतंत्र और मीडिया की स्वतंत्रता की रैंकिंग में अकसर भारत को सबसे निचले पायदान पर रखा जाता है।
लेकिन, इन थिंक टैंक्स और लोकतंत्र के कथित रक्षकों ने डोनाल्ड ट्रंप को न्यूयॉर्क कोर्ट से मिली सजा पर एक शब्द भी नहीं लिखा है, जबकि ट्रंप के खिलाफ सजा का ऐलान और ये पूरा मुकदमा ही लोकतंत्र पर सीधा हमला और लोगों की आजादी का हनन है।

द संडे गार्जियन में लिखे एक लेख में CVoter Foundation के एडिटर इन चीफ यशवंत देशमुख ने एक ओपिनियन आर्टिकिल में लिखा है, कि "अगली बार जब कोई उदारवादी पत्रकार भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से भारत में लोकतंत्र के तथाकथित पतन के बारे में अमेरिकी चिंताओं पर प्रतिक्रिया मांगे, तो उसको लेकर एकमात्र वैध प्रतिक्रिया ये होगी, कि उस सवाल के जवाब में जोरदार ठहाका लगाया जाए।"
न्यूयार्क कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया है, अमेरिका में लोकतंत्र अब एक मजाक बनकर रह गया है और अमेरिका जैसे देश को अब भारत जैसे देशों को लोकतंत्र पर ज्ञान देना किसी भद्दे मजाक से कम नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप, जो अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं, उन्हें एक एडल्ट स्टार को पैसे देने के एक मामले में ना सिर्फ घसीटा गया, बल्कि सभी 34 आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया गया है। डोनाल्ड ट्रंप, जो रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी हैं और जिनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है, उन्होंने बाइडेन के खेमे में खलबली मचा दी है।
विडंबना ये है, कि डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया गया, कि 2016 अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव से पहले उन्होंने स्टॉर्मी डेनियल्स नाम की एडल्ट स्टार को मुंह बंद रखने के लिए एक लाख 30 हजार डॉलर दिए थे, जिसमें कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप और स्टॉर्मी डेनियल्स ने साल 2006 में संबंध बनाए थे और पैसों का भुगतान करने के लिए अपने व्यावसायिक रिकॉर्ड में हेराफेरी की थी।
जबकि, तथ्य ये है कि लाखों डॉलर कमाने के लालच में स्टॉर्मी डेनियल्स इस स्टोरी को बार बार बेचने की कोशिश की, कई मैग्जीन के साथ डील करते हुए इंटरव्यू किए और सबसे दिलचस्प बात ये, कि स्टॉर्मी डेनियल्स ने इन बातों को कबूल भी किया है।
फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
डोनाल्ड ट्रंप को सभी 34 आरोपों में दोषी ठहराने वाले जज का नाम है जुआन मर्चेन, जो एक सक्रिय डेमोक्रेट हैं। यानि, जो बाइडेन की पार्टी के नेता हैं और उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में, जो बाइडेन के लिए चंदा जुटाने की मुहिम चलाई थी।
वहीं प्रॉसीक्यूटर का नाम है एल्विन ब्रैग, और उन्हें इस पद पर इसी शर्त पर चुना गया, कि उन्होंने वादा किया था, कि वो डोनाल्ड ट्रंप को जेल भेज देंगे।
वहीं, न्यूयॉर्क की कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप हश मनी केस में जो ज्यूरी बनाई थी, उसके सदस्य न्यूयॉर्क का वो 'लिबरल गैंग' है, जो हद से ज्यादा रिपब्लिकन पार्टी से नफरत करता है। जाहिर तौर पर, डोनाल्ड ट्रंप को लेकर उनसे इंसाफ की उम्मीद रखना बेमानी है।
हश मनी केस की सुनवाई अदालत में करीब 6 हफ्तों तर चली और इस दौरान कोर्ट ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हर सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिठाया और अमेरिकी मीडिया में इस दौरान ब्रेकिंग न्यूज चलते रहे, ताकि उन्हें हर बार बदनाम किया जाए। वहीं, इस वक्त जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए कैम्पेनिंग युद्धस्तर पर चल रही है, उन्हें 6 हफ्तों तक प्रचार करने के मौलिक अधिकार से दूर रखा गया।
इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क के जज ने एक ऑर्डर भी जारी किया, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को इस मामले में कुछ भी बोलने से रोक दिया गया।
वहीं, इस मामले में कोर्ट ने जिस गवाह के बयान को आधार बनाकर डोनाल्ड ट्रंप को गुनहगार ठहराया, उस गवाह का नाम है माइकल कोहेन। माइकल कोहेन वो शख्स हैं, जो डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व अटॉर्नी रह चुके हैं और वो एक सजायाफ्ता अपराधी हैं। उसपर से भी विडंबना ये है, कि माइकल कोहेन ने ट्रंप मामले में सुनवाई के दौरान भी कोर्ट रूम में माना है, कि उन्होंने हश मनी केस में जांचकर्ताओं, कोर्ट्स और अमेरिकी कांग्रस में झूठ बोला है। इतना ही नहीं, ट्रंप के खिलाफ चल रहे मुकदमे के दौरान भी उन्होंने कबूल किया, कि उन्होंने ट्रंप के कैंपेन फंड से पैसे चुराए थे। लिहाजा ऐसे गवाह की गवाही कितनी विश्वसनीय होगी, इसका अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता।
यशवंत देशमुख कहते हैं, कि चीजें उस वक्त और हास्यास्पद हो जाती हैं, जब जज जुआन मर्चेन इस बात पर अपना फैसला सुनाएंगे, कि ट्रंप जेल जाएंगे या नहीं।
सैद्धांतिक रूप से, ट्रंप को चार साल के लिए सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है। और ये सजा उस वक्त सुनाई जाएगी, जब रिपब्लिकन पार्टी औपचारिक तौर पर अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम का ऐलान करने वाली है।
सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि ट्रंप विरोधी अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी एक्सपर्ट्स यही कह रहे हैं, कि कोई भी समझदार जज इस मामले को फौरन खारिज कर देता। एक्सपर्ट्स इस बात पर एकमत हैं, कि अपील के दौरान दोषसिद्धि को पलट दिया जाएगा। फिर भी, डेमोक्रेट "प्रतिष्ठान" ट्रंप को 82 वर्षीय मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ चुनाव लड़ने के उनके अधिकार से वंचित करने पर आमादा है।
इसकी वजह बिल्कुल साफ है, कि अभी तक अमेरिका में जितने भी ओपिनियन पोल्स करवाए गये हैं, उनमें बाइडेन की तुलना में ट्रंप काफी ज्यादा आगे हैं। लिहाजा, जुलाई महीने में उनकी दोषसिद्धि और सज़ा सुनाए जाने से यह चुनाव अमेरिकी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव बन जाएगा।
हैरानी ये भी है, कि जो बाइडेन, जिनके खुद के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, जिनके बेटे भ्रष्टाचार के साथ साथ सेक्स स्कैंडल में फंसे हुए हैं, उन्हें अमेरिकी मीडिया पाक सफा बता रहा है।
लिहाजा, कई थिंक-टैंक जो नियमित रूप से भारत को लोकतंत्र और मीडिया फ्रीडम इंडेक्स में सबसे निचले पायदान पर रखते हैं, उन्होंने इस बारे में एक शब्द भी नहीं कहा है, कि डोनाल्ड ट्रम्प का यह मुकदमा लोकतंत्र पर सीधा और सीधा हमला है।
जबकि, कई कथित भारतीय "उदारवादी" भी, जो नियमित रूप से भारत में लोकतंत्र की "मृत्यु" पर विलाप करते हैं, वो डोनाल्ड ट्रंप मामले पर मुंह में दही जमाए बैठे हैं।
यशवंत देशमुख ने लिखा है, कि अमेरिका के बनाना रिपब्लिक में तब्दील होने पर खुशी मनाने का कोई मतलब नहीं है। भारत खुद कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिन पर भारतीयों को ध्यान देने की जरूरत है। फिर भी, अगली बार जब कोई नस्लवादी और अहंकारी अमेरिकी या यूरोपीय व्यक्ति या कथित भारतीय उदारदावी, भारतीयों को लोकतंत्र पर व्याख्यान दे, तो हमें उनके मुंह पर हंसना चाहिए।












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