Hormuz Crisis: सीजफायर के बावजूद नहीं खुला होर्मुज! ईरान भूल गया अपनी बिछाई Sea-Mines! गलती या साजिश?
Hormuz Crisis: अमेरिका-ईरान के बीच में 40 दिन चली जंग के बाद सीजफायर हो गया है। बावजूद इसके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कार्गो शिप के लिए नहीं खुला है। जिसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को चेतावनी देते हुए शर्त याद दिला रहे हैं। लेकिन ईरान का कहना है कि होर्मुज बंद करने के लिए उसने जिन Sea-Mines को बिछाया था उन्हें ढूंढने में उसे परेशानी हो रही है। इस वजह से होर्मुज नहीं खुल पा रहा है। जानते हैं इस मामले पर एक्सपर्ट का क्या कहना है।
एक्सपर्ट ने बताया- प्लानिंग या खो गईं माइंस
इंडियन नेवी से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कमांडर और नेवी मामलों के जानकार अविनाश कुमार ने वनइंडिया से हुई बातचीत में बताया कि "समुद्र में सी-माइंस बिछाना आसान है लेकिन उन्हें हटाना काफी मुश्किल काम है। इसके अलावा ईरान ने माइंस युद्ध के दौरान जल्दबाजी में लगाई थीं, ऐसे में उनकी लोकेशन समझना पहले ही मुश्किल था, साथ ही समुद्र में जो माइंस बिछाई जाती हैं वे ज्यादातर अपनी जगह से पानी के साथ बहकर दूसरी जगह पर मिलती हैं। इनका साइज भी एक फुटबॉल से लेकर एक ट्रॉली बैग तक होता है। ऐसे में इन्हें ढूंढना और कठिन काम है।"

जमीनी माइंस से कितनी अलग होती हैं समुद्री माइंस?
Lt. CDR कुमार ने बताया कि "जमीन पर जब कोई माइंस लगाई जाती हैं, तो उन्हें जियो लोकेशन के साथ लगाया जाता है और जब उन्हें निकालना हो तो उसी लोकेशन से उन्हें बिना ज्यादा मेहनत के ढूंढा जा सकता है। लेकिन समुंदर में स्थिति दूसरी रहती है। एक फेक्टर ये भी है कि ईरान के पास माइंस बिछाने और हटाने दोनों के टेक्नोलॉजी बहुत पुरानी है। बहुत संभव है के इन्हें बिछाने में छोटे-छोटे नेवी बोट का इस्तेमाल किया होगा। वहीं जब उन्हें हटाने की बारी आ रही है तो उसे उन्हें छोटे बोट्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसलिए उसे माइंस ढूंढने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।"
अमेरिका ने दोबारा हमला करने के लिए तैयार रखे सैनिक
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताओं से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए करीब 2,000 सैनिक और जेट विमान तैनात किए हैं। इसी बीच, Donald Trump का ईरान में संघर्ष विराम पर होने वाला टीवी संबोधन अंतिम समय में रद्द कर दिया गया, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई।
ईरान की सख्त चेतावनी और इजरायल फैक्टर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर इजरायल बेरूत पर हमले नहीं रोकता, तो वह पाकिस्तान में होने वाली वार्ता से किसी भी वक्त हट सकता है। इस बयान ने बातचीत से पहले ही माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
आगे क्या होगा?
इस्लामाबाद में अमेरिका की तरफ से जेडी वेंस और ईरान की तरफ से अब्बास अराघची और मोम्मद बाघेरी गलिबाफ पहुंचे हैं। दोनों के साथ वरिष्ठ अधिकारी और नेता भी हैं। इस चर्चा में भी माइंस का मुद्दा उठाया जा सकता है। देखना होगा क्या इन्हें हटाने में अमेरिका मदद की पेशकश करता है या नहीं और अगर करता भी तो क्या ईरान उसे स्वीकार करेगा।
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