HelsinkiSummit: तो इस वजह से डोनाल्‍ड ट्रंप से हो रही है व्‍लादिमिर पुतिन की मुलाकात

हेलसिंकी। रूस में फीफा का फीवर रविवार को फ्रांस की जीत के साथ समाप्त हो गया और राष्ट्रपति पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता करने के लिए खूबसूरत देश फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी पहुंच गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच पहली और अप्रत्याशित मीटिंग सोमवार को हेलसिंकी में शुरू हो रही है। ट्रंप-पुतिन की इस समिट पर पुरी दुनिया की निगाह है, खासकर पश्चिमी देश इस समिट पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं, जो रूस को किनारे करने की कोशिश में लगे हुए थे। एक नजर डालते हैं कि आखिर इस मीटिंग से व्लादिमीर पुतिन क्या चाहते हैं और ट्रंप के साथ किन मुद्दों पर फोकस रहने की संभावना है।

अमेरिका और उनके सहयोगी रूस पर लगे प्रतिबंधों को करे खत्म

अमेरिका और उनके सहयोगी रूस पर लगे प्रतिबंधों को करे खत्म

डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका और रूस के बीच रिश्तों में जरूर खटास देखने को मिली है। मॉस्को और वॉशिंगटन के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने और दोनों के बीच कई मुद्दों पर चल रही तनातनी को खत्म करने के लिए पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करेंगे। सबसे पहले तो पुतिन चाहेंगे कि रूस के ऊपर जो प्रतिबंध लगे हैं, उन्हें अमेरिका और उनके सहयोगी देश तुरंत हटाए और फिर से मॉस्को के साथ उसी तरह से व्यापारिक रिश्तों को बहाल करे।

रूस की सीमा से हटे नाटो

रूस की सीमा से हटे नाटो

पुतिन की दूसरी सबसे बड़ी समस्या नाटो (NATO) है, जो रूस की सीमा पर पिछले कई सालों से डेरा डाल कर बैठी है। हेलसिंकी समिट में पुतिन अपनी सीमा से नाटो को हटाने के लिए ट्रंप से आग्रह कर सकते हैं। पुतिन चाहेंगे कि अमेरिका को पूर्व सोवियत पड़ोसियों पर मॉस्को के प्रभाव को स्वीकार करने के लिए राजी किया जाए और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए, अधिक व्यापक रूप से रूस को एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पहचानें। हाल ही में अमेरिका ने नाटो देशों की आलोचना करते हुए रूस को फिर से G7 में शामिल करने की बात कही थी, लेकिन इसमें भी ट्रंप की एक संरक्षित आशावाद और कम उदारता से ज्यादा कुछ नहीं झलकता है।

सीरिया पर बने आम सहमति

सीरिया पर बने आम सहमति

तीसरा सबसे बड़ा मुद्दा सीरिया संकट है, जिस पर पुतिन चाहेंगे कि अमेरिका के साथ इस विवाद पर एक आम सहमति बने। दोनों देशों के बीच अगर एक समझौते के तहत आपसी सहमति बनती है और अगर सीरियाई आर्मी के साथ अमेरिका आगे बढ़ने का निर्णय लेता है, तो सीरिया-इजरायल सीमा से ईरानी सैनिकों को हटाने और हिजबुल्ला प्रॉक्सी वॉर को खत्म करने को लेकर आपसी सहमति बन सकती है।

आर्म्स कंट्रोल पर नए समझौते के आसार

आर्म्स कंट्रोल पर नए समझौते के आसार

इसके अलावा, अमेरिकी चुनाव (2016) में रूस पर लग रहे दखलंदाजी के आरोप को लेकर पुतिन और ट्रंप के बीच बात होने की पूरी संभावना है। वहीं, आर्म्स कंट्रोल को लेकर 'न्यू स्टार्ट' (New START) समझौते पर दोनों देशों के बीच एक सहमति बन सकती है, जो 2021 में समाप्त हो रही है। बता दें कि सोवियत यूनियन और अमेरिका के बीच START-I और START-II समझौते के तहत आर्म्स कंट्रोल पर समझौते हो चुके हैं, लेकिन दोनों देशों ने इन समझौतों का सही से कभी भी पालन नहीं किया है।

पुतिन-ट्रंप वार्ता पर दुनिया की रहेगी नजर

पुतिन-ट्रंप वार्ता पर दुनिया की रहेगी नजर

इसमें कोई दो राय नहीं है कि शीत युद्ध के बाद पहली बार रूस और अमेरिका के बीच रिश्तों को सबसे निम्न स्तर पर देखा गया है। अमेरिकी चुनाव में रूसी हैकर्स की दखलअंदाजी और सीरिया अटैक से लेकर ब्रिटेन में रासायनिक अटैक विवाद ने इन दोनों सुपर पावर देशों के रिश्तों को पटरी से उतारने का काम किया है। हालांकि, जबरदस्त तनातनी के बीच वार्ता कर रहे हेलसिंकी में ट्रंप और पुतिन पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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