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नेपाल त्रासदी- गोरखा रेजीमेंट का पूरा गांव तबाह, 1200 में बचे सिर्फ 4 घर

काठमांडू। नेपाल इस समय एक भयंकर प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है। 7.9 की तीव्रता के भूकंप ने नेपाल में 4347 से अधिक लोगों की जान ले ली है वहीं तकरीबन 10 हजार लोग अब भी लापता है। उधर यूनेस्को का कहना है कि इस भूकंप से 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

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1200 में से सिर्फ 4 घर बचे 700 लोगों की जान गयी

वहीं नेपाल की राजधानी से दूर बरपक गांव ऐसा भी गांव हैं जहां कुल 1200 घर हैं और उनमे से अब सिर्फ 4 घर ही बचे हैं, बाकि सारे घरों को इस भूकंप ने लील लिया। इस गांव के बारे में लोगों को बहुत ही कम जानकारी हो पायी है। इस गांव तक पहुंचना काफी चुनौती भरा है जिसके चलते राहत और बचाव कार्य इस गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है।

बरपक गांव में आये भीषण भूकंप ने 700 से अधिक लोगों को मौत की नींद सुला दी है। इस गांव तक पहुंचने के लिए अब नेपाल की सेना हेलीकाप्टर की मदद ले रही है। यह बरपक गांव वही गांव है जिसने हमेशा से गोरखा रेजीमेंट की शान बढ़ाई है।

इस गांव तक पहुंचने के लिए 8 घंटे पैदल चलना पड़ता है

इस गांव तक पहुंचना बेहद ही मुश्किल काम है और इस बात को नेपाल के अधिकारी भी मानते हैं। इस गांव में 2009 में पहुंचने वाले पीएचडी के छात्र मनस श्रेष्ठ का कहना है कि जब हमने यहां डेंटल कैंप लगाया था तो हमे और हमारी टीम को यहां पहुंचने में पांच दिन लग गये थे।

सड़क के रास्ते पांच घंटे बस से सफर करने के बाद हम काठमांडू से यहां पहुंचे थे। पांच घंटे की बस यात्रा के बाद बेहतर सड़क मार्ग नहीं होने की वजह से हम 8 घंटे की पैदल चढ़ाई के बाद हम इस गांव तक पहुंच पाये थे।

इस गांव के हर घर में है सेना का एक जवान

बरपक गांव तकरीबन पूरी तरह से गोरखा लोगों का गांव है। इस गांव के हर घर में ऐसे लोग हैं जिन्होंने ब्रिटिश सेना, नेपाल सेना या भारत सेना में अपनी सेवायें दी है।

जिन घरों के लोगों में ब्रिटिश सेना में काम करने वाले रहते हैं उनके घर कुछ अत्याधुनिक हैं। श्रेष्ठ का कहना है कि इस गांव में मुख्य रूप से महिलायें और बच्चे हीं रहते हैं वहीं कुछ बुजुर्ग पुरुष। 6 दिन के कैंप में उन्हें एक भी युवा पुरुष नहीं देखने को मिला, जिसकी मुख्य वजह है कि यहां के सभी पुरुष सेना में काम करते हैं।

इस गांव स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर वैद्य और हकीम ही हैं, वहीं यहां से नजदीक के अस्पताल में पहुंचने के लिए 2 दिन का समय लगता है। इस अस्पताल में सिर्फ अमीर लोग ही जा सकते हैं। रविवार की शाम तक नेपाल की सेना ने 120 लोगों को इस गांव से बचा लिया है।

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