चीन के टॉप अफसर का खुलासा- मुझे भी लगाई गई कोरोना की वैक्सीन
बीजिंग। पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में हैं। कोरोना महामारी से लाखों लोगों की जान जा चुकी है और 1 करोड़ से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। कोरोना के इलाज के लिए कई देशों में वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं। चीन से शुरू हुए इस वायरस को लेकर खुद चीन भी वैक्सीन बनाने में जुटा हुआ है। चीन के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक गाओ फू ने भी परीक्षण के दौर से गुजर रही कोरोना वैक्सीन की एक डोज ली है।

चीन के सीडीसी प्रमुख ने भी प्रायोगिक टीका लगवाया
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक गाओ फू ने कहा कि उन्होंने कोरोना वायरस का प्रायोगिक टीका लिया है। इसका मकसद मंजूरी के बाद लोगों को टीके को लेकर विश्वास दिलाना है। गाओ फु ने रविवार को अलीबाबा हेल्थ की ओर से आयोजित एक वेबिनार में कहा कि, मैं कुछ खुलासा करना चाहता हूं कि मुझे भी टीका लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह काम करेगा। इस पर कुछ विशेषज्ञों ने नैतिक चिंताए जाहिर की थी।

नहीं बताया किस कंपनी का दिया गया टीका
एसोसिएटेड प्रेस ने इसी महीने खबर दी थी कि चीन की एक सरकारी कंपनी ने मार्च में अपने कर्मचारियों पर कोरोना वैक्सीन का परीक्षण किया था। यह आम लोगों पर परीक्षण की सरकारी अनुमति मिलने से पहले की बात है। हालांकि गाओ ने यह नहीं बताया कि उन्होंने यह टीका कब दिया गया था? उन्होंने यह भी नहीं बताया कि क्या उन्हें मानवों पर परीक्षण के लिए सरकार की ओर से मिली मंजूरी के तहत टीका लगाया गया है। वेबिनार में वे कई सवालों के जबाव टाल गए।

चीन की 8 वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में
कोरोना की वैक्सीन सबसे पहले बनाने की होड़ में अमेरिका व ब्रिटेन की कंपनियों के साथ चीन भी शामिल है। अगर चीन कामयाब हुआ तो यह उसकी वैज्ञानिक और राजनीतिक विजय होगी। चीन की दावेदारी इसलिए भी मजबूत दिखती है क्योंकि ह्यूमन ट्रायल के दौर में पहुंची दुनिया की दो दर्जन वैक्सीन में से आठ चीन की हैं। जो किसी भी देश से अधिक हैं। गाओ से जब पूछा गया कि, उन्होंने किस कंपनी का टीका लिया तो यह कहते हुए मना कर दिया कि वह किसी विशेष कंपनी के लिए "किसी तरह का प्रचार" नहीं करना चाहते हैं।












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