Hardeep Singh Nijjar: हरदीप सिंह निज्जर कौन था, जो बन गया खालिस्तान का मोस्ट वांटेड आतंकवादी

Hardeep Singh Nijjar Shot Dead: भारत की जमीन पर जन्म लेकर देश की धरती से ही गद्दारी करने वाले देशद्रोही और मोस्ट वांटेड आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर को मौत के घाट उतार दिया गया है। पिछले कुछ महीनों में हरदीप सिंह निज्जर तीसरा खालिस्तानी आतंकवादी है, जिसका अज्ञात हमलावरों ने सफाया कर दिया है।

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गुरु नानक सिख गुरुद्वारे के बाहर आज हरदीप सिंह निज्जर को गोलियों से भून दिया गया। हरदीप सिंह निज्जर, सरे में गुरु नानक सिख गुरुद्वारे में प्रमुख था और उसने ब्रैम्पटन में खालिस्तान जनमत संग्रह के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हरदीप सिंह निज्जर ऑस्ट्रेलिया जाकर भी खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान में हिस्सा ले चुका था और उसे भारत के खिलाफ जहर उगलने में माहिर माना जाता था।

Hardeep Singh Nijjar

हरदीप सिंह निज्जर कौन था?

कनाडा के एक खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

हरदीप सिंह निज्जर ने सरे में गुरु नानक सिख गुरुद्वारे में अध्यक्ष का पद संभाला था, जहां उसे गोलियों से भून दिया गया।

हरदीप सिंह निज्जर, खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) का प्रमुख था।

हरदीप सिंह निज्जर, प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन, सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) से भी जुड़ा था। इस संगठन पर भारत सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है और इस संगठन पर कार्रवाई के लिए कनाडा सरकार से आह्वान कर चुकी है।

हरदीप सिंह निज्जर को भारत सरकार मोस्ट वांटेड आतंकवादी घोषित कर चुकी है।

भारत सरकार द्वारा जारी 40 नामित आतंकवादियों की सूची में निज्जर भी शामिल था।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने निज्जर की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने की पेशकश की थी।

निज्जर पर पंजाब के जालंधर में एक हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप था।

कनाडा में रहने के दौरान निज्जर अधिकारियों से बचता रहा और एनआईए ने उसके खिलाफ साजिश रचने और भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में शामिल होने के आरोप में आरोप पत्र दायर किया था।

एनआईए के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से हरदीप सिंह निज्जर को हथियार और पैसे मिलते थे।

हरदीप सिंह निज्जर मूल रूप से पंजाब के जालंधर का रहने वाला था और बाद में वो खालिस्तानियों के संपर्क में आ गया था। कनाडा में शुरू में उसने प्लंबर का काम किया था और फिर उसने कनाडा के खालिस्तानी नेताओं के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी।

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