हरदीप सिंह निज्जर, अवतार सिंह, परमजीत सिंह.. खालिस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकियों को कौन ठोक रहा है?

Khalistani terrorist: पिछले कुछ महीनों से ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में खालिस्तानी आतंकियों का उपद्रव बढ़ गया है और भारत के खिलाफ खालिस्तानियों का नया प्रोपेगेंडा अभियान जोरों से चल रहा है। वहीं, खालिस्तानी आतंकियों ने अपने प्यादे अमृतपाल सिंह को भारत में खालिस्तानियों के समर्थन में माहौल बनाने का जिम्मा दिया था, लेकिन वो प्यादा फेल हो चुका है।

जिसके बाद खालिस्तानियों ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में हिन्दू मंदिरों और भारतीय उच्चायोग को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कनाडा में खालिस्तानी आतंकी रैलियों का आयोजन कर रहे हैं, तो खालिस्तानियों ने पिछले दिनों ब्रिटेन में भारतीय दूतावास तक से झंडा उतारने की गुस्ताखी की थी। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से खालिस्तानियों को ठोके जाने की खबरें आने लगी हैं और एक के बाद एक कई खालिस्तानी आतंकी ठोके जा रहे हैं।

Hardeep Singh Nijjar

आइये जानते हैं, कि पिछले कुछ महीनों में कौन कौन से खालिस्तानी आतंकी मारे गये हैं।

हरदीप सिंह निज्जर को मारी गोली

गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख और खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की रविवार शाम कनाडा के सरे में गुरुद्वारा साहिब परिसर में दो अज्ञात युवकों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। जालंधर के भर सिंह पुरा गांव के मूल निवासी 46 साल का निज्जर, खालिस्तान टाइगर फोर्स के सदस्यों को ऑपरेट करने, उनकी नेटवर्किंग संभालने, उन्हें ट्रेनिंग देने और उनके लिए पैसे जुटाने का काम करता था।

हरदीप सिंह निज्जर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के लिए भी वांटेड था और वह प्रतिबंधित 'सिख फॉर जस्टिस' संगठन से भी जुड़ा हुआ था। हाल ही में हरदीप सिंह निज्जर ने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी, जहां उसने खालिस्तान के निर्माण को लेकर आयोजित जनमत संग्रह अभियान में हिस्सा लिया था।

जांच के दौरान पता चला था, कि निज्जर ने भड़काऊ बयान दिए थे और भारत को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। वहीं, नफरती भाषणों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था।

एनआईए के एक दस्तावेज के मुताबिक, "हरदीप सिंह निज्जर के खिलाफ जो सबूत मिले हैं, उससे साबित होता है, वो देशद्रोही और विद्रोही हरकतों में शामिल था और भारत में विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का प्रयास भी कर रहा था।"

साल 2018 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कनाडा का दौरा किया था और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात की थी, तो उन्होंने कनाडा के पीएम को वांटेड अपराधियों की एक लिस्ट सौंपी थी, जिसमें हरदीप सिंह निज्जर का भी नाम था।

अवतार सिंह खांडा

पिछले हफ्ते ही, यूके स्थित खालिस्तानी आतंकवादी अवतार सिंह खांडा, जिसने वारिस पंजाब डी के प्रमुख अमृतपाल सिंह की मदद की थी, उसका ब्रिटेन के बर्मिंघम के एक अस्पताल में निधन हो गया है। हालांकि अवतार सिंह खांडा की मौत कैसे हुई है, इसको लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

कुछ लोगों का कहना है, कि उसकी मौत ब्लड कैंसर से हुई है, जबकि कई लोग दावा कर रहे हैं, कि उसे जहर दिया गया था। लिहाजा, उसकी मौत फिलहाल संदिग्ध मानी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अवतार सिंह खांडा की मौत की वजब अभी तक साफ नहीं हो पाई है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है, कि उसकी मौत फुट पॉइजनिंग से हुई है, जबकि कई अन्य लोगों ने दावा किया है, कि मौत के पीछे ब्लड कैंसर वजह है।

Hardeep Singh Nijjar

अवतार सिंह खांडा की मौत खालिस्तानियों के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि खालिस्तानी उसे अपना यूथ लीडर मानते थे और कई पंजाबी गायकों ने भी लंदन में उससे मुलाकात की थी, जिससे उसकी लोकप्रियता बढ़ रही थी।

पाकिस्तान में खालिस्तानी आतंकी की हत्या

इसी साल मई महीने में भारत के एक और वांटेड आतंकवादी परमजीत सिंह पंजवार की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मार्च 2011 में भारत सरकार ने द्विपक्षीय गृह सचिव स्तरीय वार्ता के दौरान भारत के भगोड़े 50 अपराधियों की एक लिस्ट पाकिस्तान को सौंपी थी, जिसमें परमजीत सिंह पंजवार का नाम था। परमजीत सिंह पंजवार खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का प्रमुख था।

पंजवार को 30 कैलिबर की पिस्तौल से उस वक्त गोली मारी गई थी, जब वो अपने सुरक्षाकर्मी के साथ लाहौर के जौहर टाउन में किसी काम से बाहर निकला था। पाकिस्तानी मीडिया में घायल बंदूकधारी का कोई जिक्र नहीं किआ था, क्योंकि वो एक सुरक्षा गार्ड था, जिसे आईएसआई ने परमजीत सिंह पंजवार की सुरक्षा में उसके साथ तैनात किया था।

Hardeep Singh Nijjar

पंजवार को 1 जुलाई 2020 को भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूएपीए के तहत एक आतंकवादी नामित किया था, और उस पर नशीली दवाओं की तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा का कारोबार करने और थापर इंजीनियरिंग कॉलेज, पटियाला के 18 छात्रों की हत्या सहित पांच नृशंस अपराधों को अंजाम देने का आरोप लगाया था।

पाकिस्तान में रहकर पंजवार, खालिस्तान आंदोलन के लिए धन जुटाने का काम करता था, जिसका मकसद भारत में अशांति फैलाना था। इसके साथ ही धन जुटाने के लिए पंजवार, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा में अफगान हेरोइन की तस्करी के लिए भी जिम्मेदार था।

पाकिस्तान में वांटेड आतंकियों की हत्या

खालिस्तानी आतंकियों के अलावा, हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बशीर अहमद पीर को भी इसी साल फरवरी महीने में उड़ा दिया गया था। भारत के मोस्ट वांटेड नामित आतंकवादियों में से एक बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम को 20 फरवरी को रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने मार डाला था।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए आतंकवादियों को भेजने और रसद सहायता प्रदान करने में बशीर अहमद पीर काफी बड़ी भूमिका निभाता था और पिछले साल अक्टूबर में भारत सरकार ने उसे एक मोस्ट वांटेड आतंकवादी नामित किया था। 20 फरवरी को, रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर जब वो खड़ा था, उस वक्त मोटरसाइकिल सवार कुछ लोगों ने उसे गोलियों से भून डाला था।

जहूर मिस्त्री को भी उड़ाया

इससे पहले, इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी 814 के अपहर्ताओं में से एक, जहूर मिस्त्री को भी पिछले साल पाकिस्तान में मारा दिया गया था। मिस्त्री को पिछले साल 1 मार्च को कराची की अख्तर कॉलोनी में बाइक सवार दो हमलावरों ने हत्या कर दी थी। पाकिस्तान के जियो टीवी ने इस हत्या की पुष्टि की थी और उसे कराची का एक "व्यापारी" बताया था।

रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया था, कि मसूद अजहर के नेतृत्व में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष नेता, मिस्त्री के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। मसूद अजहर भारत सरकार द्वारा रिहा किए गए तीन आतंकवादियों में से एक था, जब 1999 में आईसी 814 का अपहरण कर लिया गया था।

जहूर मिस्त्री हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) का एक संचालक था, जो उस समय पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित एक भारत-विरोधी आतंकवादी समूह था। वह आईसी 814 के पांच अपहर्ताओं में से एक था, जिसे 24 दिसंबर, 1999 को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था। अपहर्ताओं में अजहर का एक भाई भी शामिल था।

कुल मिलाकर, पिछले कुछ महीनों से भारत विरोधियों का सफाया किया जा रहा है, हालांकि हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है, कि इन भारत विरोधियों और आतंकियों का सफाया कौन कर रहा है, लेकिन इन आतंकियों का मारा जाना, भारत के हित में जरूर है।

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