Hajj Yatra: क्या है माउंट अराफात? जिस पर जाए बिना पूरी नहीं होती हज यात्रा, जानिए इसका पैगंबर मुहम्मद से संबंध
Hajj Yatra: हर साल लाखों मुसलमान हज के लिए सऊदी अरब के मक्का शहर जाते हैं। इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक, हज शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम प्रत्येक मुसलमान के लिए जीवन में कम से कम एक बार अनिवार्य है। यह दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस साल दुनियाभर से तकरीबन 25 लाख लोग हज यात्रा पर जाने वाले हैं। जिसमें से केवल भारत से 1.75 लाख हजयात्री जा रहे हैं। अगर मक्का की बात करें तो वह पाक जगह पैगंबर मुहम्मद का जन्मस्थान है, जहां उन्हें कुरान का पहला संदेश मिला। यहां काबा भी है, जो एक घनाकार संरचना है और काले कपड़े से ढकी होती है। यह मक्का की मस्जिद अल-हरम के बीच में स्थित है, जिसे इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
हज की वो पांच बातें जिन्हें नहीं जानते लोग
1. काबा का इतिहास
काबा का ज़िक्र पैगंबर मुहम्मद से जुड़ा है, लेकिन इसकी कुछ बातें पैगंबर इब्राहिम के समय से हैं। इस्लामी मान्यता के अनुसार, काबा का निर्माण पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल ने किया था। हज के दौरान की जाने वाली कई रस्में उस घटना की याद दिलाती हैं जब इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे इस्माइल की लगभग क़ुर्बानी दे दी थी। मान्यताओं के अनुसार, बाद में एक दिव्य शक्ति से उन्हें रोक दिया गया। इब्राहिम, जिन्हें ईसाई धर्म और यहूदी धर्म में अब्राहम कहा जाता है, इन तीनों धर्मों में पूजे जाते हैं, लेकिन अलग-अलग स्वरूपों में।

2. लैंगिक समानता
जहां अधिकांश मुस्लिम प्रथाओं में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार या प्रार्थना क्षेत्र होते हैं, वहीं हज के दौरान ऐसा कोई भेदभाव नहीं होता है। पुरुष और महिलाएं साथ में हज की रस्मों को अदा करते हैं। यह समानता का प्रतीक है।
3. खास पहनावा
हज करने वाले हाजियों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड होता है जो आध्यात्मिक समानता को दर्शाता है। पुरुष सफ़ेद, बिना सिले हुए कपड़े पहनते हैं जिसे अहराम कहा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि हज करने आए सभी लोग समान हैं, चाहे उनका सामाजिक या आर्थिक रुतबा कुछ भी हो। महिलाएं सफ़ेद अहराम नहीं पहनतीं, लेकिन वे ढीले-ढाले, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनती हैं। उन्हें सिर ढककर रखना होता है। लेकिन हज के दौरान उनका चेहरा दिखना चाहिए।
4. सफ़ा और मरवा की पहाड़ियां
हज का सबसे ख़ास हिस्सा है तवाफ़, जिसमें मुस्लिम काबा के चारों ओर सात बार एंटी-क्लॉक चक्कर लगाते हैं। यह हज यात्रा की शुरुआत और अंत में किया जाता है। इसके अलावा हज का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा है सफ़ा और मरवा नाम की दो पहाड़ियों के बीच सात बार चलना। यह रस्म बीबी हाजरा (पैगंबर इब्राहिम की पत्नी) की याद में अदा की जाती है। बीबी हाजरा ने अपने पुत्र इस्माइल के लिए पानी की तलाश में इन दो पहाड़ियों के सात चक्कर लगाए थे।
5. माउंट अराफ़ात का महत्व
काबा हज का सबसे प्रमुख स्थान है, लेकिन इसकी सबसे पाक जगह मक्का से बाहर एक रेगिस्तानी मैदान में स्थित अराफ़ात के पहाड़ को माना जाता है। यहां श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करते हैं और क़ुरान पढ़ते हैं। इस स्थान का इस्लाम में विशेष महत्व है क्योंकि ये वही जगह मानी जाती है जहां पैगंबर मुहम्मद ने अपना आख़िरी ख़ुतबा (उपदेश) दिया था।
हज इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो समानता, एकता और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह एक ऐसी यात्रा है जो मुसलमानों को उनके धर्म और इतिहास से जोड़ती है।
हज के बारे में आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।












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