हैकर्स ने इस देश के पूरे सर्वर को किया हैक, 11 दिनों से काम नहीं कर पा रही है सरकार, रखी थी भारी डिमांड
देश में सर्वरों पर एक संदिग्ध साइबर हमले के बाद वानुअतु की सरकार पिछले 11 दिनों से अपने काम नहीं कर पा रही है। पूरा का पूरा देश फिलहाल ऑफलाइन हो गया है।
Vanuatu: धीरे-धीरे पूरी दुनिया इंटरनेट पर निर्भर होती जा रही है और सरकारें अपना सारा काम काज ऑनलाइन करने लगी हैं। दुनियाभर की सरकारें अपने तमाम डिपार्टमेंट्स को ऑनलाइन कर रही हैं और बेशक कामों के ऑनलाइन होन से हमारी दुनिया काफी तेज हो गई है और जिन कामों में पहले कई-कई दिन लगते थे, वो अब मिनटों में हो जाते हैं। लेकिन, इंटरनेट के साइड इफेक्ट्स भी हैं और हैकर्स की वजह से पैसिफिक आइलैंड की सरकार 11 दिनों से अपने काम नहीं कर पा रही है।

11 दिनों से कामकाज ठप
देश में सर्वरों पर एक संदिग्ध साइबर हमले के बाद वानुअतु की सरकार पिछले 11 दिनों से अपने काम नहीं कर पा रही है। पूरा का पूरा देश फिलहाल ऑफलाइन हो गया है, जिससे देश की जनता बुरी तरह से परेशान है। साउथ पैसिफिक ओसियन नेशन वानुअतु में हैकर्स ने सरकार के तमाम कार्यालय, पुलिस प्रशासन और प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइटों को हैक कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया है। इतना ही नहीं, हैकर्स ने देश की स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ सभी सरकारी सेवाओं और विभागों के ईमेल सिस्टम, इंट्रानेट और ऑनलाइन डेटाबेस को भी बंद कर दिया है, जिससे पूरे देश में तहलका मच गई है और जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है।

हैकर्स ने किया शटडाउन
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस देश की जनसंख्या करीब तीन लाख 15 हजार है और लोग अपने टैक्स का भुगतान करने के साथ लाख, बिलों को चालान करने और लाइसेंस और यात्रा वीजा प्राप्त करने जैसे बुनियादी कार्यों को पूरा करने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने कहा कि, gov.vu ईमेल या डोमेन से काम करने वाले तमाम लोग प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि, 'सरकारी दफ्तरों से लोगों को ये कहकर वापस लौटाया जा रहा है, कि अगले हफ्ते आइये।' उन्होंने कहा कि, 'ज्यादातर सरकारी कार्यालय फिलहाल बंद हैं।' फिर भी, सरकारी कर्मचारियों ने कामकाज जारी रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश की है और कुछ कर्मचारियों ने अपने स्वयं के व्यक्तिगत ईमेल और इंटरनेट हॉटस्पॉट का इस्तेमाल दफ्तर के कामकाज के लिए करना शुरू कर दिया है, ताकि लोगों की दिक्कतें कुछ कम हो। वहीं, लोगों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के बजाय चेकों से भुगतान किया जा रहा है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि, "किसी आवेदन की जांच के लिए या फिर उसपर किसी और अधिकारी के दस्तखत लेने के लिए अभी एक विभाग से दूसरे विभाग में जाना पड़ रहा है। वहीं, जनता के करीब करीब सारे काम मैन्युअल किए जा रहे हैं"।

सरकार का सर्वर हैक
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि, "ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का सर्वर शुक्रवार 4 नवंबर को हैक कर लिया गया था।" उन्होंने कहा कि, "कई लोगों ने कहा कि सराकीर ईमेल वापस आने शुरू हो गये हैं और ये पहला संकेत था, कि कुछ तो गड़बड़ है।" उन्होंने कहा कि, "यदि आप सरकारी इंटरनेट को हैक कर लेते हैं, तो फिर इसका असर हर जगह पर होता है। आप शिपिंग करना चाहते हैं? तो आपको सीमा शुल्क के भरने के लिए अनुमोदन के माध्यम से सामान प्राप्त करना होगा। यह एयरलाइनों को प्रभावित करता है। यह स्वास्थ्य प्रणाली को प्रभावित करता है, मतलब ऐसा कुछ बचा नहीं है, जो इससे प्रभावित नहीं होता है"। हालांकि, बीबीसी ने बताया कि, सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय में से किसी ने भी अभी तक बीबीसी के कॉल का जवाब नहीं दिया है। लेकिन एएफपी समाचार एजेंसी और वानुअतु डेली पोस्ट ने एक सरकारी बयान के हवाले कहा है कि, पिछले दो दिनों से सरकारी सर्वर को हैक किया गया है।

सर्वर क्यों और किसने किया हैक?
ऑस्ट्रेलियाई अखबार सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने बताया है कि, सर्वर हैक करने से पहले हैकर्स ने सरकार से फिरौती की मांग की थी, जिसे वानुअतु सरकार ने देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, ये हैकर्स कौन हैं और उन्होंने सरकार से कितनी रकम मांगी थी, अभी तक साफ नहीं हो पाया है। वहीं, फिलहाल ये भी साफ नहीं हो पाया है, कि सर्वर को कैसे हैक किया गया और वानुअतु सरकार के सर्वर में ऐसी क्या कमियां थीं, कि उसे हैक कर लिया गया? हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सराकर की पूरी प्रणाली हो सकता है, कि एक ही सर्वर से ऑपरेट हो रही होगी और ये सबसे बड़ा सिक्योरिटी गलती थी, जिससे एक सर्वर को हैक करने से तमाम सरकारी कार्यालय पर कंट्रोल कर लिया गया। हालांकि, सरकार की तरफ से सर्वर को अपग्रेड करने की बात कही गई है, लेकिन फिलहाल इस देश ने अपने पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया से नेटवर्क को फिर से सही करने से लेकर कई और मामलों को लेकर मदद मांगी है। सरकार के एक प्रवक्ता ने हेराल्ड को बताया कि, सरकार की वेबसाइट "अगले सप्ताह वापस आनी चाहिए"।

वानुअतु को क्यों निशाना बनाया गया होगा?
सिडनी स्थित लोवी इंस्टीट्यूट में पैसिफिक आइलैंड्स प्रोग्राम के निदेशक डॉ मेग कीन ने कहा कि, "नई सरकार के चुने जाने के एक महीने से भी कम समय में ये साइबर हमला हुआ है, क्योंकि नई सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है और हैकर्स के फिरौती देने की धमकी को ठुकरा दी।" वहीं, सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि, "हम अभी तक नहीं जानते कि इस हमले के पीछे कौन है, लेकिन यह एक बाहरी हमला है और शायद एशियाई क्षेत्र से।" कुछ लोगों ने अनुमान लगाया है कि हैकर्स इंडोनेशिया से हैं। आपको बता दें कि, वानुअतु ने लंबे समय से इंडोनेशियाई प्रांत पश्चिमी पापुआ की स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया है, जहां अधिकांश आबादी मेलनेशियन है। इंडोनेशियाई सेना पर प्रांत में घोर मानवाधिकारों के हनन का आरोप है। आपको बता दें कि, प्रशांत क्षेत्र में वानुअतु की स्थिति काफी महत्वपूर्ण और प्रमुख राष्ट्र के रूप में होती है, जिसके अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ अच्छे संबंध हैं।












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