गुआम में है अमरीका का सबसे ज़्यादा गोला-बारूद
उत्तर कोरिया के अमरीकी द्वीप गुआम पर मिसाइल से हमला करने की धमकी के बाद से ये द्वीप दुनिया की नज़रों में आ गया है.
इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है.
गुआम पर क्यों हमला करना चाहता है उत्तर कोरिया?
अमरीका पर हमले के लिए उत्तर कोरिया तैयार लेकिन...
बीबीसी संवाददाता रुपर्ट विंगफ़ील्ड हेज़ ने गुआम पहुंचकर ये जानने की कोशिश की है कि दोनों देशों के बीच जारी तनाव में ये द्वीप कैसे आ गया है.
अमरीका का सबसे बड़ा तोपखाना
अमरीका ने इस द्वीप के उत्तरी किनारे पर घने जंगलों के बीचों-बीच अपना एक विशाल एयरबेस बनाया हुआ है.
इस एयरबेस के रनवे पर बी1 बमवर्षकों का एक बेड़ा हर समय तैयार रहता है ताकि उत्तर कोरिया के दक्षिण कोरिया पर हमला बोलने की स्थिति में जवाब दिया जा सके.
गुआम के पश्चिमी तट पर एक और खुफ़िया सैन्य अड्डा है जहां परमाणु हमले के लिए पनडुब्बियों का बेड़ा तैनात है.
लेकिन शायद इससे भी ज्यादा ख़ास वो जगह है जो गुआम के दक्षिण में पहाड़ी के नीचे छुपी हुई है.
गुआम के गवर्नर एडी केल्वो कहते हैं, "यहां अमरीकी सेना का साजो-सामान रहता है."
गवर्नर काल्वो हंसते हुए कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें बताया कि वह 1000 प्रतिशत उनके साथ हैं.
वह इस द्वीप के रणनीतिक महत्व से भी परिचित हैं.
वह बताते हैं, "गुआम में इतना गोला-बारूद जमा है कि जितना अमरीका में किसी भी जगह जमा नहीं है"
किसी भी युद्ध के लिए गोला-बारूद सबसे अहम होता है. और, गुआम में इतना गोला-बारूद और मिसाइलें मौजूद है कि अमरीका कई हफ़्तों तक युद्ध लड़ सकता है.
किम की धमकी से घबराया दक्षिण कोरिया
यही बात है जो गुआम को अमरीका के लिए इतना खास बनाता है और इसे उत्तर कोरिया के निशाना बनाता है.
गुआम द्वीप पर अमरीकी प्रभाव कितना?
मैं इस समय गुआम द्वीप में हूं. इसलिए, मैं अमरीका में हूं.
लेकिन इसके बावजूद मैं अमरीकी प्रांत लॉस एंजेल्स की अपेक्षा फ़िलीपींस की राजधानी मनीला के ज्यादा क़रीब हूं.
अगर सबसे करीबी अमरीकी क्षेत्र की बात करूं तो हवाई द्वीप यहां से 6400 किलोमीटर की दूरी पर है.
इंटरनेशनल डेटलाइन के पार होने की वजह से अमरीकी द्वीप होनोलुलु में बुधवार ही है. लेकिन यहां गुरुवार का दिन ढल रहा है.
ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं है कि अक्सर गुआम को लगता है कि अमरीका ने उसे भुला दिया है.
इमिग्रेशन लाइन में खड़े हुए ये अमरीका जैसा नहीं लगता क्योंकि यहां टोक्यो, ओसाका, सियोल और बुसान जैसे शहरों के परिवार दिखाई पड़ते हैं.
गुआम आने वाले 15 लाख पर्यटकों में से ज्यादातर जापान और दक्षिण कोरिया से आते हैं.
और, यहां शूटिंग रेंज भी हैं जहां पर जापानी पुरुष एम 16 मशीन गन पर हाथ आजमाते हैं जो जापान में गैर-कानूनी है.
ऐसे में अमरीका इन लोगों को एशिया में रहते हुए अमरीका वाला अहसास देता है.
गुआम है अमरीका का सबसे बड़ा तोपखाना
गुआम का अमरीका से रिश्ता साल 1898 के स्पेन-अमरीकी युद्ध से जुड़ा है. इस युद्ध में ही अमरीका को यूएस पोर्टो रिको और फिलीपींस हासिल हुआ था.
फिलीपींस को आखिरकार आजादी मिल गई लेकिन गुआम एक अमरीकी क्षेत्र बना रहा. सही अर्थों में ये एक स्वशासित कॉलोनी है.
क्या उत्तर कोरिया को है 'इराक़' बन जाने का ख़ौफ़?
यहां के स्थानीय नागरिक खुद को गुआमेनियंस कहते हैं. ये लोग अमरीकी नागरिक हैं. लेकिन इन्हें अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं है. हालांकि, ये अमरीकी कांग्रेस में एक सदस्य को चुनकर भेजते हैं लेकिन वह भी किसी भी प्रस्ताव पर वोट नहीं कर सकते.
यहां पर मैंने जितने लोगों से बात की वे सब के सब इस बात पर राजी हैं कि गुआम में स्थिति अस्थिर है. और, गुआम को पूरी तरह अमरीकी प्रांत बनने की जरूरत है या फ़िर एक स्वतंत्र राष्ट्र.
गुआम के असली बाशिंदों को चमोरो कहा जाता है और इनके पूर्वज चार हजार साल पहले गुआम आए थे.
हवाई और समोआ में रहने वाले अपने दूर के रिश्तेदारों की तरह ये लोग भी अपनी अमरीकी पहचान को लेकर काफ़ी संघर्षशील हैं.
गुआम को चाहिए आजादी?
एक शाम में गुआम के मुख्य कस्बे हगट्ना में कुछ गुआम की आजादी के लिए मांग कर रहे लोगों ने शांति और गुआम के झंडे लहराए.
इस रोड से गुजरने वाली गाड़ियों ने भी हॉर्न बजाकर इन लोगों का समर्थन किया.
एक युवा महिला ने मुझसे बात करते हुए कहा, "हम लोग काफी समय से दूसरे के युद्धों के लिए इस्तेमाल होते आए हैं, अब वक्त आ गया है कि हम एक उपनिवेश की तरह रहना बंद करें."
इस विरोध प्रदर्शन के नेता केनेथ बताते हैं, "इस द्वीप की 27% जमीन पर अमरीकी सेना का कब्जा है."
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चमोरो परिवारों से काफ़ी सारी जमीन ले ली गई थे. हम सभी लोग ये स्वीकार नहीं करते. हम यहां के मूल निवासी हैं और हजारों सालों से यहां हैं. हम पहले भी बच में फंस चुके हैं और अब एक बार फिर हम इतिहास नहीं दोहराना चाहते."
लेकिन अमरीकी सेना की भारी मौजूदगी ने गुआम के पहचान को आश्चर्यजनक ढंग से प्रभावित किया है.
मैं यहां जिस भी परिवार से बात की है उनका कोई न कोई सदस्य सेना में अपनी सेवाएं दे चुका है.
इसका एक कारण यहां की गरीबी भी है क्योंकि गुआम मिसीसिपी से भी ज्यादा गरीब है.
बीते हफ़्ते मैंने कई लोगों से ये बात सुनी है, "अमरीकी सेना की वजह से मैं सुरक्षित महसूस करता हूं क्योंकि वे ताकतवर हैं और हमारी रक्षा करेंगे. उत्तर कोरिया हमारे साथ कुछ नहीं करेगा और अगर वह कुछ करेगा तो हम उन्हें बर्बाद कर देंगे."
लेकिन यही एक कारण है जिसने किम जोंग उन को इस द्वीप में दिलचस्पी जगा दी है. क्योंकि गुआम सिर्फ़ इसलिए ख़ास नहीं है क्योंकि ये एशिया के नजदीक है बल्कि ये कि यही द्वीप अमरीका को एशिया में जगह देता है.
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