ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना देख रहे भारतीयों का दिल तोड़ रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप
हर वर्ष कई भारतीय अमेरिका में नौकरी हासिल करने और फिर ग्रीन कार्ड हासिल करके यहां की नागरिकता का सपना देखते हैं। पिछले कुछ वर्षों से उनके इस सपने को लगता है किसी की नजर लगई है क्योंकि अब अमेरिकी सरकार उस रफ्तार से नागरिकता नहीं दे रही है जितनी रफ्तार से एक दशक पहले नागरिकता दी जा रही थी।
वॉशिंगटन। हर वर्ष कई भारतीय अमेरिका में नौकरी हासिल करने और फिर ग्रीन कार्ड हासिल करके यहां की नागरिकता का सपना देखते हैं। पिछले कुछ वर्षों से उनके इस सपने को लगता है किसी की नजर लगई है क्योंकि अब अमेरिकी सरकार उस रफ्तार से नागरिकता नहीं दे रही है जितनी रफ्तार से एक दशक पहले नागरिकता दी जा रही थी। ऐसे में लगता है कि अब भारतीयों को और ज्यादा धैर्य रखना होगा।

एक दशक में सबसे कम लोगों को मिली नागरिकता
इंग्लिश डेली टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से जारी एक रिपोर्ट में वे आंकड़ें दिए गए हैं जिनसे पता लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में कैसे अमेरिका ने नागरिकता देने के अपने तरीकों में बदलाव किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने 30 वर्षों में साल 2008 में पहली बार नागरिकता देने के मामले में खुली सोच को अपनाया। इस वर्ष 65,971 लोगों को नागरिकता दी गई थी। साल 1995-2000 के बीच करीब 120,000 भारतीय प्रोफेशनल्स काम के सिलसिले में अमेरिका पहुंचे थे।
साल 2014 में सबसे कम नागरिकता
साल 2014 में एक दशक में सबसे कम लोगों को नागरिकता दी गई है और सिर्फ 37,854 लोगों को अमेरिकी नागरिकता मिल सकी थी। वहीं साल 2017 में इस संख्या में कुछ सुधार हुआ और 49,601 लोगों को अमेरिकी नागरिकता मिली। वहीं अगर ओवरऑल ट्रेंड की बात करें तो अप्रवासी नागरिकों की संख्या इसी दौर में 1.72 मिलियन से 1.51 पर पहुंच गई थी। साल 1990 से अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के मामले में चीन और मैक्सिकों के बाद भारतीयों का नंबर आता है। कई सारे भारतीय ग्रीन कार्ड सिटीजनशिप के जरिए अमेरिका का वर्क वीजा हासिल करते हैं। लेकिन अप्रवासन की संख्या में आ रही गिरावट आ रही स्थितियों को बताने के लिए काफी है। अमेरिका ने एच-1बी वीजा को लेकर भी कई बदलाव किए हैं। नए नियमों के बाद से अमेरिकी वीजा और नागरिकता हासिल करने में खासी दिक्कतें आ रही हैं।












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