Google अपने कर्मचारियों को दे रहा है voluntary exit offer, कंपनी की रिस्ट्रक्चरिंग पॉलिसी में AI बना गेम-चेंजर
Google voluntary exit offer: टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी गूगल (Google) ने अपने कर्मचारियों की संख्या को कम करने की रणनीति के तहत एक बार फिर "Voluntary Exit Program" (VEP) - यानी स्वैच्छिक सेवा समाप्ति योजना शुरू की है।
यह योजना अमेरिका में कार्यरत कर्मचारियों को दी जा रही है और इसका उद्देश्य जबरन छंटनी से बचते हुए कर्मचारियों को एक वैकल्पिक रास्ता देना है। यह योजना ऐसे समय में शुरू की गई है जब गूगल ने अपनी AI (Artificial Intelligence) क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की घोषणा की है।

Google voluntary exit offer: किन विभागों में लागू हुई योजना?
गूगल की यह योजना कई प्रमुख विभागों को कवर कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
- Knowledge and Information (K&I) - जिसमें गूगल सर्च, एड्स और कॉमर्स जैसे प्रमुख व्यवसाय आते हैं
- सेंट्रल इंजीनियरिंग
- मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस
- रिसर्च यूनिट्स
K&I डिपार्टमेंट, जिसमें लगभग 20,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, को अक्टूबर 2024 में रिऑर्गनाइज्ड किया गया था। अब इस विभाग की बागडोर गूगल के कार्यकारी निक फॉक्स (Nick Fox) संभाल रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों को कंपनी की दिशा से तालमेल नहीं बैठ रहा, उनके लिए यह योजना एक "समर्थनकारी और सम्मानजनक विदाई का रास्ता" है।
निक फॉक्स ने मेमो में लिखा कि अगर आप खुद को कंपनी की रणनीति से जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर रहे, या काम में ऊर्जा की कमी है, तो यह योजना आपके लिए है। लेकिन अगर आप अपने काम से उत्साहित हैं, हमारे लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो मैं पूरी उम्मीद करता हूं कि आप यह योजना न अपनाएं।"
AI की ओर रुख और कर्मचारियों की भूमिका में बदलाव
इस योजना की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब गूगल तेजी से अपने संसाधनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित कर रहा है। पिछले वर्ष गूगल की नई CFO अनात अश्केनाज़ी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लागत-कटौती को प्राथमिकता बताया था।
AI न केवल उत्पादों को विकसित करने का एक जरिया बन चुका है, बल्कि यह मानव श्रम का विकल्प भी बन रहा है। यही वजह है कि गूगल अब अपनी टीमों से अपेक्षा कर रहा है कि वे उस दिशा में काम करें जहां AI से समन्वय स्थापित किया जा सके।
वहीं दूसरी ओर, गूगल अब रिमोट वर्क कल्चर को सीमित करने के प्रयास में है। जिन कर्मचारियों का निवास किसी गूगल कार्यालय से 50 मील के दायरे में आता है, उन्हें हाइब्रिड मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी का मानना है कि सहयोग और नवाचार के लिए आमने-सामने बैठकर काम करना जरूरी है।
पिछले साल 12,000 कर्मचारियों की छंटनी
गौरतलब है कि यह रणनीति गूगल की पिछले साल की छंटनी योजना का ही अगला चरण है, जब कंपनी ने 12,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था। हालांकि इस बार वह इसे जबरन नहीं, बल्कि विकल्प के रूप में पेश कर रही है। जिससे कर्मचारियों को मानसिक रूप से सहज तरीके से कंपनी छोड़ने का अवसर मिल सके।
वहीं गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में ब्लूमबर्ग टेक सम्मेलन में कहा था कि AI से किसी की नौकरी पर खतरा नहीं हैं। AI ह्मयूमन के काम को और आसान बना देगा जिससे हमें अधिक कार्य करने की क्षमता देगा।" पिचाई ने यह भी खुलासा किया कि वर्तमान में गूगल का लगभग 30 प्रतिशत कोड AI द्वारा जनरेट किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी के तकनीकी ढांचे में AI का हस्तक्षेप गहरा और प्रभावशाली होता जा रहा है।
क्या यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा?
इस साल गूगल ने कई विभागों में VEP जैसे प्रोग्राम शुरू किए हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह "Soft Layoff Strategy" कंपनी की नई मानव संसाधन नीति का हिस्सा बन चुका है। अब कंपनी कम कर्मियों में अधिक दक्षता लाना चाहती है, और AI इसका प्रमुख साधन है। गूगल के हालिया निर्णय यह स्पष्ट करते हैं कि AI युग में कर्मचारियों की भूमिकाएं तेजी से बदल रही हैं।
जहां एक ओर AI उभरते हुए उद्योगों में नई नौकरियों की संभावना पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक तकनीकी नौकरियों को वह धीरे-धीरे अप्रासंगिक बना रहा है। गूगल का यह कदम तकनीकी दुनिया के लिए एक स्पष्ट संकेत है-भविष्य उन्हीं का होगा, जो बदलाव के साथ खुद को ढाल पाएंगे।












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