सूरज में उठे सुनामी का आज भी धरती पर पड़ेगा असर, आसमान में दिख सकता है दिवाली जैसा नजारा
सूरज में विशाल तूफान उठा हुआ है, जिसका असर आज भी पृथ्वी पर देखने को मिल सकता है।
वॉशिंगटन, अक्टूबर 31: धरती पर जीवन की रक्षा करने वाले हमारे सूरज में इस हफ्ते गुरुवार को तूफान भड़क उठा है और सूरज के अंदर इस तूफान ने सुनामी का रूप अख्तियार कर लिया है, जिसका असर आज हमारी पृथ्वी पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों को पता चला है कि, सूरज पर उठे भीषण तूफान की वजह से एक कई टन का विशाल भड़कता हुआ आग का गोला सूरज से बाहर निकल गया है और ये आग का गोला पृथ्वी की तरफ धकेल दिया गया है, जिसके आज रात तक पृथ्वी की कक्षा में आने की आशंका जताई जा रही है।

पृथ्वी से टकराने की आशंका
वैज्ञानिकों का कहना है कि, पृथ्वी का वायुमंडल हम मनुष्यों को इन सोलर तूफानों के कणों से बचाता है। लेकिन वे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ इटरेक्ट कर सकते हैं और पृथ्वी की सतह पर मौजूद मजबूत विद्युत धाराओं को प्रेरित कर सकते हैं, जिसकी वजह से मानव निर्मित संरचनाओं जैसे उपग्रहों, पावर ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं और यहां तक कि हमारे इंटरनेट कनेक्शन को भी बाधित कर सकते हैं। यूएस स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (एसडब्ल्यूपीसी) द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि, कोरोनल मास इजेक्शन 973 किमी / सेकंड की गति से सूर्य से बाहर निकला और 30 अक्टूबर को पृथ्वी पर आने की भविष्यवाणी की गई थी, जिसका प्रभाव 31 अक्टूबर को भी जारी रहने की संभावना है।

क्या होता है भू-चुंबकीय तूफान
सूरज से निकले तूफान का ये कण जब पृथ्वी के चुंबकमंडल में गड़बड़ी पैदा करते हैं, तो इसे भू-चुंबकीय तूफान कहा जाता है। हालांकि, SWPC की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस तूफान का हमारी तकनीक पर प्रभाव नाममात्र का होगा। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने समझाया कि, ''पूर्ण प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है। हम औरोरा देखने की उम्मीद कर रहे हैं। आयनोस्फीयर में धाराओं के इंजेक्शन की उम्मीद की जाती है, जो बदले में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में उतार-चढ़ाव को प्रेरित करेगा''। आपको बता दें कि, औरोरा एक तरह का बड़े सौर ऊर्जा की तरह प्रकाश पूंज होते हैं, जो आपने अकसर आसमान में देखा होगा। इसकी वजह से आपको काफी देर तक आसमान में अलग अलग प्रकाशपूंज दिखाई दे सकते हैं, और ये नजारा धरती से देखने पर दिवाली जैसा हो सकता है।

सैटेलाइट पर पड़ेगा असर?
इंडियन एक्सप्रेस से दिब्येंदु नंदी ने कहा कि, इस वजह से सोलर नेटवर्क और वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली रिसीवर में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन "हम उम्मीद करते हैं कि कोरोनल मास इजेक्शन (सूर्य के कोरोना से चुंबकीय प्लाज्मा का निष्कासन) मध्यम गति से होगा, इसलिए ये संभावनाएं कम हैं।" प्रोफेसर नंदी आईआईएसईआर कोलकाता में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया का हिस्सा हैं, जिसने इस सौर चमक की भविष्यवाणी की थी। यह एक X1-क्लास सोलर फ्लेयर है जो 28 अक्टूबर को सूरज में तूफान के बाद उत्पन्न हुआ था। सोलर फ्लेयर्स के लिए वर्गीकरण प्रणाली A, B, C, M और X अक्षरों का उपयोग करती है।

क्या है सौर तूफान
आपको बता दें कि, सौर तूफान को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निंया की वैज्ञानिक संगीता अब्दू ज्योति ने पिछले दिनों बताया था कि, आने वाल भविष्य में धरती को बड़े सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। सौर तूफान का मतलब सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास है, जो बेहद नुकसानदायक और प्रयलकारी साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस सौर तूफान के कारण धरती पर इंटरनेट सर्विस ठप हो सकती है लया कई दिनों तक बंद हो सकती है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कई देशों में पावर ग्रिड फेल हो सकते हैं, जिसके कारण उन्हें कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ सकता है। संगीता ने सिगकॉम 2021 डेटा कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में अपनी स्टडी वैज्ञानिकों को दिखाई , जिसके बाद स वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

सौर तूफान पर जानकारी कम
शोधकर्ता के मुताबिक सौर तूफान को लेकर हमारी जानकारी कम है और हमारे पास इससे संबंधित डेटा की कमी है, जिसक कारण इसका नुकसान अधिक हो सकता है। शोध के मुताबिक सौर तूफान पावर ग्रिड्स को नुकसान पहुंचाता है। धरती पर आने वाले सौर तूफान की आशंका को देखते हुए दुनिया के कई देशों में ब्लैकआउट का खतरा मंडराने लगा है। दुनिया के कई देश अंधेरे में डूब सकते हैं। इंटरनेट सर्विस को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर नविगेशन, सैटलाइट्स पर पड़ सकता है।

टेलीकॉम सेक्टर्स पर भी असर
उन्होंने कहा कि, अगर तेज सौर तूफान उठता है, तो टेलीकॉम सेक्टर ठप हो सकता है, डिफेंस सेक्टर, आईटी, बैंकिंग सर्विसेस बंद हो सकती है। शोध के मुताबिक सौर तूफान को लेकर कम जानकारी के कारण इसका असर और भी भयानक हो सकता है। संगीता के मुताबिक दुनिया इस सौर तूफान के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है, जिसके कारण इसका असर और प्रलरकारी हो सकता है। हम इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते है कि अगर इंटरनेट सेवा ठप हुई तो क्या असर होने वाला है। कई देशों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है।












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