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दर्दनाक बन गई थी जनरल मुशर्रफ की जिंदगी, एमाइलॉयडोसिस से सारे अंग फेल, जानिए कैसा रहा आखिरी वक्त?

79 साल के पूर्व राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ एमाइलॉयडोसिस बीमारी से पीड़ित थे, जो असामान्य प्रोटीन के बनने की वजह से होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है।

General Pervez Musharraf

General Pervez Musharraf: पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह राष्ट्रपति और आर्मी चीफ रहे जनरल परवेज मुशर्रफ की मौत हो गई है और वो 79 साल के थे। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल परवेज मुशर्रफ के परिवार ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी है और कहा है, कि रविवार को दुबई के अस्पताल में उनका निधन हो गया है। उनके परिवार के मुताबिक, 79 साल के पूर्व राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष एमाइलॉयडोसिस बीमारी से पीड़ित थे, जो असामान्य प्रोटीन के बनने की वजह से होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है। आइये जानते हैं, कि एमाइलॉयडोसिस बीमारी क्या है और उसने मुशर्रफ को कितना मजबूर कर दिया था।

एमाइलॉयडोसिस से जूझ रहे थे मुशर्रफ

एमाइलॉयडोसिस से जूझ रहे थे मुशर्रफ

पिछले साल जून में मुशर्रफ के परिवार ने उनकी स्थिति के बारे में एक बयान में पहली बार कहा था कि, 'मुशर्रफ अपनी बीमारी (एमाइलॉयडोसिस) की जटिलता के कारण पिछले 3 हफ्ते से अस्पताल में भर्ती हैं'। परिवार की तरफ से जारी बयान में कहा गया था, कि "मुशर्रफ अब जिस स्थिति से गुजर रहे हैं, वहां से उनकी वापसी संभव नहीं है और उनके अंग खराब हो रहे हैं। कृपया, उनके जीवन के लिए प्रार्थना करें।" परिवार के बयान के बाद से ही आशंका लगाई जाने लगी थी, कि मुशर्रफ कभी भी दुनिया छोड़कर जा सकते हैं।

एमाइलॉयडोसिस क्या है?

एमाइलॉयडोसिस क्या है?

एमाइलॉयडोसिस एक दुर्लभ बीमारी है, जो तब होती है जब एक असामान्य प्रोटीन, जिसे अमाइलॉइड कहा जाता है, किसी के अंगों में बनने लगता है और फिर उस अंग के आकार और उसकी काम करने की क्षमता और उसकी कार्यप्रणाली को गंभीर तौर पर प्रभावित करने लगता है। अमाइलॉइड प्रोटीन, किसी इंसान के हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे, प्लीहा और शरीर के अन्य भागों में जमा हो सकता है, जिससे वो अंग नाकाम होने की स्थिति में आ जाते हैं और इंसान की मौत भी हो सकती है। एमाइलॉयड प्रोटीन सामान्य रूप से शरीर में नहीं पाया जाता है, लेकिन इसे कई अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन से बनाया जा सकता है।

शरीर के अंग होने लगते हैं फेल

शरीर के अंग होने लगते हैं फेल

एमाइलॉयडोसिस की कुछ किस्में अन्य बीमारियों के साथ मिलकर बनी होती हैं। हालांकि, इस बीमारी के कुछ लक्षणों का इलाज के जरिए सुधार किया जा सकता है, लेकिन एमाइलॉयडोसिस की कुछ किस्में जीवन के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं, क्योंकि शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। एमाइलॉयडोसिस इंसानी शरीर के लिए एक सेकेंड्री बीमारी की तरह होता है, लेकिन कभी कभी एमाइलॉयडोसिस प्राइमरी बीमारी के तौर पर भी विकसित हो जाती है। कभी-कभी, यह जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है, लेकिन आमतौर पर, अमाइलॉइडोसिस बीमारी की वजह अज्ञात होती है।

एमाइलॉयडोसिस का कारण क्या है?

एमाइलॉयडोसिस का कारण क्या है?

कई अलग-अलग प्रोटीन अमाइलॉइड जमा कर सकते हैं, लेकिन ये कुछ प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। प्रोटीन का प्रकार और यह कहां एकत्र होता है, यह बताता है कि व्यक्ति को किस प्रकार का एमाइलॉयडोसिस है। एमाइलॉइड पूरे शरीर में या सिर्फ एक क्षेत्र में जमा हो सकता है। इसके अलावा, जबकि कुछ किस्में वंशानुगत होती हैं, अन्य बाहरी कारकों के कारण होती हैं, जैसे कि सूजन संबंधी बीमारियां या फिर लंबे वक्त से चला आ रहा डायलिसिस।

एमाइलॉयडोसिस के लक्षण

एमाइलॉयडोसिस के लक्षण

एमाइलॉयडोसिस के लक्षण अक्सर सूक्ष्म होते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में एमाइलॉइड प्रोटीन कहां जमा हो रहा है। जैसे-जैसे एमाइलॉइडोसिस बढ़ता है, एमाइलॉइड का जमाव हृदय, लीवर, प्लीहा, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क या तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों में गंभीर थकान, वजन कम होना, पेट, टांगों, टखनों या पैरों में सूजन, स्तब्ध हो जाना, दर्द या हाथ या पैर में झुनझुनी, त्वचा के रंग में परिवर्तन, आंखों के आसपास की त्वचा के बैंगनी धब्बे (पुरपुरा) या चोट के निशान वाले क्षेत्र, चोट लगने के बाद सामान्य से अधिक खून बहना, जीभ की सूजन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

एमाइलॉयडोसिस बीमारी का इलाज

एमाइलॉयडोसिस बीमारी का इलाज

इस बीमारी का पता लगाने के लिए मरीजों के शरीर के अंदरूनी अंगों का इलाज करने के लए इमेजिंग प्रक्रियाएं, जैसे कि इकोकार्डियोग्राम, न्यूक्लियर चेस्ट टेस्ट या लीवर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। एक बार इस बीमारी का पता लगने के बाद एमाइलॉइडोसिस को इलाज के जरिए धीमा किया जा सकता है और इसके लक्षणों को कम करके रोगियों को कुछ समय के लिए मौत से बचाया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक इलाज इस बात पर निर्भर करता है, कि व्यक्ति को किस प्रकार का एमाइलॉयडोसिस है। कीमोथेरेपी भी इसके उपचार का एक तरीका है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सकता है। वहीं, कुछ दवाएं भी एमाइलॉयडोसिस वाले लोगों में असामान्य प्रोटीन बनाने वाली कोशिकाओं के विकास को भी रोक सकती हैं।

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