Gaza Plan: अगर नहीं माना हमास तो ट्रंप अपनाएंगे ये नीति, फिलीस्तीन को लेकर क्या हुआ फैसला
Gaza Plan: इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा के लिए अमेरिकी शांति योजना का समर्थन किया है। व्हाइट हाउस में सोमवार को हुई बैठक में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच इस योजना पर सहमति बनी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमास इस प्रस्ताव को मान लेगा।
हमास के असतित्व का समझौता
इस योजना में हमास से आत्मसमर्पण और हथियार छोड़ने की मांग की गई है। बदले में गाजा के पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता और फिलिस्तीनियों के लिए राहत का वादा किया गया है। लेकिन यदि हमास सौदा ठुकराता है तो अमेरिका, इजरायल को गाजा में और कड़े कदम उठाने की स्वतंत्रता दे सकता है।

सीजफायर और बंधक रिहाई की शर्तें
व्हाइट हाउस की 20 सूत्रीय योजना के अनुसार, 72 घंटों के भीतर हमास को अपने सभी बंधक रिहा करने होंगे। इजरायल का कहना है कि उनके पास अभी भी 48 बंधक हैं, जिनमें 20 जीवित हैं। बदले में इजरायल 250 आजीवन कारावास झेल रहे और 1,700 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल होंगे।
गाजा पर किसका होगा कंट्रोल?
प्रस्ताव के मुताबिक गाजा को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में रखा जाएगा। यहां एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात होगा। ट्रम्प और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की अध्यक्षता में एक "शांति बोर्ड" प्रशासन और पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा। यह क्षेत्र फिलहाल इजरायली सैनिकों से घिरा रहेगा।
फिलिस्तीनी अथॉरिटी की भूमिका
योजना का एक अहम हिस्सा यह है कि भविष्य में फिलिस्तीनी प्राधिकरण गाजा का शासन संभालेगा। हालांकि, नेतन्याहू और उनकी अतिवादी सरकार इस विचार का विरोध करते हैं। इजरायल फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के खिलाफ है।
हमास की शर्तें और विरोध
हमास का कहना है कि जब तक इजरायल गाजा से पूरी तरह से हटने की घोषणा नहीं करता, तब तक वह सभी बंधकों को रिहा नहीं करेगा। योजना में यह भी स्पष्ट है कि हमास प्रशासन का हिस्सा नहीं होगा और उसकी सैन्य संरचना, सुरंगों सहित, नष्ट कर दी जाएंगी।
माफी और बाहर जाने की अनुमति
योजना के अनुसार, जो हमास के लड़ाके शांतिपूर्ण जीवन का वादा करेंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। जो गाजा छोड़ना चाहेंगे, उन्हें अनुमति दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल हमास के निरस्त्रीकरण और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएगा और फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण देगा।
मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण
गाजा में बड़ी मात्रा में मानवीय सहायता पहुंचाई जाएगी। इसे संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रिसेंट जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की देखरेख में वितरित किया जाएगा। योजना में यह भी साफ किया गया है कि फिलिस्तीनियों को गाजा से निष्कासित नहीं किया जाएगा और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग होगा।
फिलिस्तीनियों की चिंताएं
फिर भी फिलिस्तीनियों के बीच यह डर है कि कहीं बड़े पैमाने पर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश न हो। पहले भी अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगे थे कि वे गाजा की आबादी को "स्वैच्छिक" तरीके से विस्थापित करना चाहते हैं। साथ ही वह फिलीस्तीन के असतित्व को लेकर भी चिंतित हैं।
राज्य का मिलेगा दर्जा?
गाजा का दैनिक प्रशासन फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स संभालेंगे, लेकिन "शांति बोर्ड" निगरानी करेगा। यह बोर्ड वित्तपोषण और पुनर्निर्माण पर अधिकार रखेगा, जिससे उसके पास भारी शक्ति होगी। योजना में यह भी कहा गया है कि इंटरिम पीरियड में फिलिस्तीनी प्राधिकरण में सुधार किए जाएंगे ताकि भविष्य में वही गाजा का शासन संभाल सके। इसमें राज्य का जिक्र हल्के रूप में किया गया है कि यदि सुधार और पुनर्विकास सफल हुआ तो फिलिस्तीनी राज्य की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं।
अरब देशों का समर्थन
मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, कतर, सऊदी अरब और यूएई सहित कई अरब देशों ने ट्रम्प की योजना का समर्थन किया है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय स्तर पर इसे सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
नेतन्याहू के सामने चुनौतियां
नेतन्याहू को अपनी ही सरकार के कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगियों का विरोध झेलना पड़ रहा है। वित्त मंत्री बेजल स्मोट्रिच ने अपनी "रेड लाइंस" जारी कीं, जिसमें कहा कि किसी भी हाल में गाजा में फिलिस्तीनी प्राधिकरण या फिलिस्तीनी राज्य को जगह नहीं दी जानी चाहिए।
नेतन्याहू की उम्मीदें
हालांकि नेतन्याहू को उम्मीद है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण अपने सुधार पूरे नहीं कर पाएगा। यही कारण है कि वह इस योजना का समर्थन करते हुए भी इसे अपने पक्ष में मानते हैं।
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