'कोविड के खिलाफ लड़ाई में भारत ने उदाहरण पेश किया', गेट्स फाउंडेशन ने की मोदी सरकार की तारीफ

भारत में कोविड वैक्सीन के 2 अरब से ज्यादा टीके लोगों को दिए गये हैं, जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ की गई है।

India Covid Fight

India Covid Fight: कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में बिल गेट्स फाउंडेशन ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ की है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने कहा है, कि कोविड संकट के खिलाफ भारत की लड़ाई ने एक सकारात्मक वैश्विक उदाहरण पेश किया है। गेट्स फाउंडेशन ने कहा है, कि कोविड के खिलाफ भारत की लड़ाई दूसरों के लिए एक मॉडल हो सकता है, कि भारत ने इतने बड़े पैमाने पर टीकों के निर्माण और वितरण को कैसे संबोधित किया।

बिल गेट्स फाउंडेशन ने क्या कहा?

बिल गेट्स फाउंडेशन ने क्या कहा?

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गये इंटरव्यू में कहा है, कि "हमें भारत सरकार के साथ काम करने और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसे भागीदारों के साथ काम करने में मदद करने पर गर्व है, कि हमने कुछ वैक्सीन के निर्माण में उनकी मदद की, कुछ वैक्सीन के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक वितरण में उनकी मदद की। उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य, जहां हम काफी करीबी से काम करते हैं, वहां पर कोविड को लेकर हमारी प्रतिक्रिया वास्तव में एक मॉडल की तरह है। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि जो बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है, उसमें स्वास्थ्य सेवा के अन्य रूपों के बहुत सारे सकारात्मक प्रभाव हैं।"

किन चुनौतियों का करना पड़ा सामना?

किन चुनौतियों का करना पड़ा सामना?

आपको बता दें कि, भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2 अरब 2 करोड़ टीके लगाए गये हैं। वहीं, यह पूछे जाने पर कि कोविड के दौरान और बाद में फाउंडेशन को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? क्योंकि, महामारी का विनाशकारी प्रभाव पड़ा है, और इससे भी अधिक गरीबी और लोगों के स्वास्थ्य पर और आर्थिक विकास पर असर पड़ा है... तो उन्होंने कहा, कि "हां, विश्व स्तर पर COVID का विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। और कोरोना वायरस का ना सिर्फ बीमारी के तौर पर प्रभाव पड़ा है, बल्कि आर्थिक प्रभाव और लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ा है। इसीलिए, मुझे लगता है, कि एक विकासशील देशों की एक तिहाई दुनिया के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना है"। हालांकि, उन्होंने ये भी मानास, कि भारत पूरी दुनिया के लिए एक 'उज्ज्वल स्थान' है, क्योंकि भारत ने स्वास्थ्य सेक्टर में इकोसिस्टम को रफ्तार दिया है।

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    भारत में दो दशकों से काम

    भारत में दो दशकों से काम

    आपको बता दें कि, गेट्स फाउंडेशन करीब 20 सालों से भारत में काम कर रहा है, और यह कृषि सेक्टर से लेकर वित्तीय सेवाओं और स्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों में काम करता है। इसके अलावा, भारत के G20 प्रेसीडेंसी पर उन्होंने कहा, कि भारत सरकार ने पहले ही वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों को कम करने, और डिजिटल बुनियादी ढांचे, और वित्तीय सेवाओं जैसे व्यापक विकास के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है और आगे भी ऐसे सेक्टर में आने वाली परेशानियों को संबोधित करने में भारत एक नया उदाहरण पेश कर सकता है। उन्होंने कहा, कि भारत सरकार ने भरत में महामारी से निपटने में जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वो ग्लोबल हेल्थ रिस्पॉंस में भी जारी रहेगा, ताकि हम दोनों मुद्दों का एक साथ समाधान कर सकें।

    8.3 अरब डॉलर करेगा खर्च

    8.3 अरब डॉलर करेगा खर्च

    इस बीच, सोमवार को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने घोषणा की है, कि वह गरीबी, बीमारी और असमानता से लड़ने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत साल 2023 में 8.3 अरब अमरीकी डालर खर्च करेगा। वहीं, गेट्स फाउंडेशन का लक्ष्य 2026 तक स्वास्थ्य सेक्टर में 9 अरब डॉलर के अपने वार्षिक भुगतान का लक्ष्य है। आपको बता दें कि, गेट्स फाउंडेशन भारत के अलावा पाकिस्तान और मध्य और पश्चिम एशिया में काम करता है। दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका में भी बिल गेट्स फाउंडेशन काम करता है।

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