आखिर जी7 देशों ने ऐसा क्या कर दिया कि रूस हो गया आग बबूला, सऊदी अरब ने कर लिया समिट से किनारा
G7 Summit: इस बार जी7 समिट की मेजबानी इटली कर रहा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी तमाम नेताओं का इटली में इस समिट के लिए स्वागत कर रही हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस समिट में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं।
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच मुलाकात भारत में चर्चा का विषय है तो दूसरी तरफ रूस इस समिट से काफी नाराज है। रूस की नाराजगी की बड़ी वजह है कि जी7 समिट में यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का लोन देने के प्रस्ताव पर सहमति।

सऊदी अरब ने बनाई दूरी
जी7 में एक ऐसी घटना हुई है जोकि चर्चा में है। दरअसल सऊदी अरब को भी जी7 समिट का न्योता भेजा गया था। सऊदी के प्रिंस ने इस न्योते को स्वीकार किया लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस समिट में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
इसकी बड़ी वजह है कि रूस जी7 समिट से काफी नाराज है। यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने से पहले रूस का तमाम फॉरेन असेट गोल्ड, फॉरेन करेंसी वगैरह बाहर के देशों में था। लेकिन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने रूस की तमाम संपत्ति जोकि तकरीबन 500 बिलियन डॉलर की थी, उसे सीज कर दिया।
जी7 देशों ने यूक्रेन को लोन देने का किया फैसला
जी7 समिट के दौरान नेताओं ने रूस के सीज किए गए असेट से यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का सस्ता लोन देने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव पर जी7 देशों ने सहमति जताई है।
रूस ने इसे चोरी करार दिया
इन देशों की ओर से कहा गया है कि यूक्रेन इस कर्ज से जो हथियार वगैरह खरीदना चाहता है खरीद सकता है, यूक्रेन को फिर से खड़ा करने में इस लोन का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन जी7 के इस फैसले का रूस ने विरोध करते हुए कहा कि यह चोरी है।
जी7 के सदस्य देश फ्रांस,जर्मनी, कनाडा, जापान, अमेरिका, इटली, यूके ने यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का लोन रूस की जब्त की गई संपत्ति से देने का फैसला लिया है। जी7 देशों के इस प्रस्ताव पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने धन्यवाद देते हुए कहा कि यह समर्थन का इस्तेमाल रक्षा और पुनर्निर्माण दोनों के लिए किया जाएगा।
जिस तरह से जी7 देशों ने रूस की जब्त की गई संपत्तियों से यूक्रेन को लोन देने का फैसला लिया है, वह दूसरे देशो में अविश्वास पैदा करने का काम जरूर करेगा।
भरोसे में आएगी कमी
कोई भी देश दूसरे देश में जब अपनी संपत्ति को रखता है तो वह यह भरोसा करता है कि जरूरत पड़ने पर उसे अपनी संपत्ति वापस मिलेगी। लेकिन जी7 देशों के इस कदम ने इस विश्वास को कम करने का काम किया है। गौर करने वाली बात है कि हाल ही में भारत यूके से अपना 100 टन गोल्ड वापस लेकर आया है।
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