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प्राचीन Spice Route क्या है, G20 समिट के दौरान यह फिर से कैसे हुआ जीवित?

G20 Summit Spice Trade Route: अमेरिका, यूरोपियन यूनियन सऊदी अरब के साथ भारत ने एक ऐसी डील की है, जिसे चीन के 'वन बेल्ट वन रोड' पहल के लिए बहुत बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

इन देशों के बीच जो इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडरोर (IMEE EC)के नाम से नया वैश्विक आर्थिक कॉरिडोर बनाने पर करार हुआ है, उससे पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच काफी सस्ते और बहुत तेज समुद्री और रेल यातायात का विकल्प उपलब्ध हो सकेगा। इसे नया 'स्पाइस रूट' कहा जा रहा है।

g20 spice route

IMEE-EC आर्थिक एकीकरण का प्रभावी माध्यम बनेगा-पीएम मोदी
शनिवार को इस 'ऐतिहासिक साझेदारी' के लिए संबंधित देशों के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में 'भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के आर्थिक एकीकरण के लिए यह एक प्रभावी माध्यम' बन जाएगा।

यह सही में बहुत बड़ी बात है- अमेरिकी राष्ट्रपति
वहीं इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा, 'यह सही में बहुत बड़ी बात है....... मैं पीएम (मोदी) को धन्यवाद देना चाहता हूं..... एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य- इस जी20 शिखर सम्मेलन का यही फोकस है; और कई मायनों में, यह इस साझेदारी का भी फोकस है, जिसके बारे में हम आज बात कर रहे हैं...' उनके मुताबिक इससे कम आय वाले देशों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।

प्राचीन स्पाइस रूट क्या है?
प्राचीन काल से मसाला मार्गों (प्राचीन स्पाइस) के नाम से इस तरह के मार्गों का एक नेटवर्क रहा है। इसे 'मैरीटाइम सिल्क रोड' के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्री मार्गों का नेटवर्क है, जो पूरब से पश्चिम को जोड़ता है। ये मार्ग जापान के पश्चिमी तट से भारत के आसपास से गुजरते हुए मध्य-पूर्व तक फैले हुए हैं। यह इंडोनेशिया के द्वीपों से लेकर भारत के नजदीक से होते हुए भूमध्य सागर के पार यूरोप तक जाते हैं।

15,000 किलोमीटर से भी अधिक है इसकी कुल लंबाई
स्पाइस रूट की कुल लंबाई 15,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है और आज भी इन रास्तों से होकर गुजरना आसान नहीं है। मानवीय इतिहास के काफी प्राचीन समय से लोग मसाला मार्गों से होकर ही यात्रा करते चले आ रहे हैं। शुरुआती दिनों में शायद इंसानों ने अपने तटीय क्षेत्रों से थोड़ी दूरी की यात्रा से आरंभ की। सदियों बाद उन्होंने अपने जहाजों से और आगे की यात्राओं का आरंभ किया। पहले समुद्र-दर-समुद्र पार किए और फिर महासागरों की सीमा रेखाएं लांघनी शुरू कर दीं।

तथ्य ये है कि ये यात्राएं रोमांच के लिए शुरू नहीं की गई थीं। उनका इरादा पूरी तरह से व्यापार था। क्योंकि, अनेकों बार उन्हें अनजान जमीन पर कदम रखने पर हिंसक विरोध का सामना भी करना पड़ता था। ये मसाला मार्ग (Spice Routes) प्राचीन काल में भी महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग हुआ करते थे और आज भी बने हुए हैं। क्योंकि, इंसानी जीवन के प्राचीन दिनों से व्यापार ने इसमें अहम भूमिका निभायी है। ये अलग बात है कि सदियों में इसका स्वरूप, तरीका और व्यापार होने वाली चीजें बदलती चली गई हैं।

स्पाइस रूट नाम क्यों पड़ा?
प्राचीन समय में जिस चीज का व्यापार किया जाता था, उसमें सबसे प्रमुख और सबसे लाभदायक सामान मसाले ही होते थे। इसके कारण इन व्यापार मार्गों का यही नाम पड़ गया। 2000 ईसा पूर्व से दालचीनी ने इन मार्गों से श्रीलंका और चीन से व्यापार के लिए मध्य एशिया तक का अपना रास्ता खोज लिया था।

भारत के 'काले सोने' की दीवानी थी दुनिया
इसी तरह पुरातात्विक सुराग मिलते हैं कि इस समय तक काली मिर्च का इस्तेमाल पूरे भारत में हो रहा था और 1200 ईसा पूर्व तक मिस्र के लोगों को भी इसका जमकर स्वाद पहुंचने लगा था।
भारत के इस 'काले सोने' की चाहत में ही तो क्रिस्टोफर कोलंबस और वास्कोडिगामा जैसे लोग दक्षिण भारतीय तट तक आ पहुंचे थे।

आज यह सुनने में जरूर विचित्र लग सकता है कि मसालों की चाहत में लोगों ने जान जोखिम में डालकर इतनी लंबी यात्राएं शुरू कीं और वह भी हजारों साल पहले। लेकिन, यहां ये भी गौर करने वाली बात है कि 'स्पाइस' शब्द लैटिन 'स्पाइसेज' से आया है, जिसका मतलब ये है कि यह अन्य चीजों की तुलना में काफी विशेष महत्त्व रखता था और इसी वजह से इसी के नाम पर यात्रा मार्गों का नाम पड़ गया। (इनपुट-यूनेस्को)

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