वर्ष 1971 से 2016 भारत-अमेरिका संबंध, कभी नीम तो कभी शहद
वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पर्सनल इनविटेशन पर चौथी बार अमेरिका में हैं और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक खामोशी के साथ-साथ एक हलचल भी है। पाक जिसे 71 की जंग में भारत के खिलाफ होने पर अमेरिका से उस समय समर्थन मिला था, आज वही अमेरिका उसे नजरअंदाज कर रहा है।

क्या हुआ था 71 में
वर्ष 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच एक और जंग छिड़ गई थी तो उस समय रिचर्ड निक्सन अमेरिका के राष्ट्रपति थे। अमेरिका, पाकिस्तान को इस जंग के समय अपना समर्थन दे रहा था और यह उसकी एक सोची समझी रणनीति थी। अमेरिका ने भारत के खिलाफ पाक को हथियार तक मुहैया कराए थे। दरअसल अमेरिका नहीं चाहता था कि इस स्थिति का फायदा सोवियत यूनियन उठाए और भारत की मदद के साथ ही वह साउथ एशिया में अपने कदम जमा ले।
चीन के साथ मिला लिए थे हाथ
इसलिए उस समय अमेरिका-पाकिस्तान और चीन का एक गठबंधन तैयार हुआ जिसने न सिर्फ इस जंग में भारत की जीत के रास्ते में कई रोड़े पैदा किए बल्कि रूस के साथ भी एक संधि पर साइन कर लिए थे।
भारत के खिलाफ चीनी सेना तैैयार
बंगाल की खाड़ी में निक्सन ने यूएस टास्क फोर्स को डेप्लॉय कर दिया ताकि पाकिस्तान को मदद पहुंचाई जा सके। सिर्फ इतना ही नहीं अमेरिका ने चीन को भी भरोसे में लेने की कोशिश ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी सेना का प्रयोग भारत के खिलाफ हो सके। सोवियत यूनियन ने भी अपनी वॉरशिप्स, डेस्ट्रॉयर्स और सबमरीन डेप्लॉय कर दी थीं।
2016 मजबूत भारत और मजबूर अमेरिका
आज चार दशक बीत चुके हैं और अमेरिका और भारत के बीच एक अलग ही केमेस्ट्री दुनिया को देखने को मिल रही है। जो अमेरिका कभी चीन की सेना की मदद से भारत को हारता हुआ देखने के सपने देखता था आज उसी अमेरिका को चीन को पिछाड़ने के लिए इंडियन नेवी की मदद चाहिए।
यूएस नेवी के एडमिरल हैरी हैरिस जो कि यूएस पैसिफिक कमांड के कमांडर हैं उनका कहना है कि अमेरिका को भारत से और दूसरे देशों से भारतीय महासागर और साउथ चाइना सी पर गश्त करने के लिए मदद की जरूरत है।
चीन का प्रभाव कम करने के लिए भारत
रविवार को वाशिंगटन पोस्ट की ओर से लिखा गया कि वह दिन दूर नहीं है जब इंडियन और यूएस नेवी के शिप एशिया और प्रशांत महासागर के समंदर पर एक साथ नजर आएं। साफ है कि आज अमेरिका को चीन को तगड़ा जवाब देने और उसका प्रभाव कम करने के लिए भारत की जरूरत है। शायद इसी वजह से आज भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच कई ज्वाइंट एक्सरसाइज होती हैं।












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