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फ्रांस करेगा भारत की ओलंपिक मेजबानी के दावे का समर्थन, जानिए कितना आता है खर्च, क्यों छूट जाते हैं पसीने?

Olympic Games Cost: पिछले साल मुंबई में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी, कि भारत 2036 ओलंपिक खेलं की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी पेश करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। वहीं, गणतंत्र दिवस के मौके पर चीफ गेस्ट बनकर दिल्ली आए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएनल मैक्रों ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया है।

इमैनुएनल मैक्रों पहले विदेशी नेता हैं, जिन्होंने भारत की दावेदारी का समर्थन करने का फैसला किया है और पिछले कुछ सालों में भारत के ग्लोबल रूतबे का जिस तरह से विस्तार हुआ है, उसे देखते हुए इनकार नहीं किया जा सकता, कि आने वाले वक्त में कई और नेता भारत में आयोजन के समर्थन में आ सकते हैं।

Olympic Games Cost

भारत की आयोजन की दावेदारी

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि साल 2035 तक भारत 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा, लिहाजा भारत की ओलंपिक खेलों की मेजबानी की ये इच्छा कोई यूं ही नहीं है। लेकिन भारत के लिए ओलंपिक खेलों की मेजबानी करना, किसी मुश्किल से भी कम नहीं है।

क्योंकि, भारत के ज्यादातर शहर घनी आबादी वाले हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का काफी ज्यादा अभाव है। बिजली और पानी की समस्या है और कई बड़े शहर कूड़ों के ढ़ेर से जूझते रहते हैं। लिहाजा, सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या अगले 12 सालों में कोई भारतीय शहर ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार हो पाएगा?

गुजरात का अहमदाबाद, जो आयोजन स्थल की दावेदारी में सबसे आगे है, क्या वो अगले 13 सालों में खुद को मेजबानी के लिए तैयार कर सकता है। लिहाजा, अगला सवाल यह है, कि क्या हम खेलों के बुनियादी ढांचे को इस तरह डिजाइन कर सकते हैं, कि मेजबान शहर और देश को आर्थिक रूप से लाभ हो।

ओलंपिक की मेजबानी करना नहीं है आसान

भारत में आने वाले वक्त में खेलों के बुनायादी ढांचे में आवंटन में कई गुना इजाफा की जाएगी। और ओलंपिक मेजबानों के लिए लागत में वृद्धि आम बात है और भारत लागत में वृद्धि के मामले में विश्व स्तरीय प्रदर्शन करने वाला देश है।

लेकिन, दिक्कत सिर्फ ओलंपिक खेलों के आयोजन तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि ओलंपिक होने के बाद आयोजन स्थल एक सफेद हाथी की तरह बन जाता है।

सिडनी के ओलंपिक स्टेडियम के मेंटिनेंस में सालाना 30 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। वहीं, बीजिंग का प्रतिष्ठित बर्ड्स नेस्ट ओलंपिक गेम्स के बाद खाली पड़ा है। टोक्यो ओलंपिक 2020 की लागत लगभग 13 अरब डॉलर थी, और शहर को कोविड के कारण भी काफी ज्यादा खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

स्थिति ये है, कि ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने वाले कई देशों ने बाद में अफसोस जताया है। जैसे, लंदन के ओलंपिक मंत्री ने कहा, ब्रिटिश अर्थव्यवस्था ठप होने के बाद कहा था, कि "अगर हम पहले इन चीजों को जानते, तो क्या हम ओलंपिक के लिए बोली लगाते?" निश्चित तौर पर नहीं।"

Olympic Games Cost

कॉमनवेल्थ गेम की तुलना में काफी खर्च

1982 के एशियाई खेलों और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों, दोनों ने दिल्ली को बुनियादी ढांचे - स्टेडियम और सड़कों - को बढ़ावा दिया, लेकिन कम से कम 30 आयोजनों और 200 से ज्यादा देशों के एथलीटों और अधिकारियों की मेजबानी के लिए दिल्ली काफी छोटी है।

जिस भी शहर को ओलंपिक सिटी के रूप में विकसित किया जाता है, उस शहर को लेकर इस बात की पड़ताल की जाती है, कि यह शहर आयोजन के बाद देश के विकास में कितना योगदान देने वाला है, क्योंकि उस शहर में इन्फ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर विकास किया जाना होता है।

ओलंपिक खेलों के आयोजन में खर्च

ओलंपिक खेल दो तरह के होते हैं, एक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और दूसरा शीतकालीन ओलंपिक।

अब तक के सबसे महंगे ग्रीष्मकालीन खेल लंदन 2012 में आयोजित किया गया था, जिसमें 15 अरब डॉलर का खर्च आया था। वहीं, बार्सिलोना में 1992 में आयोजित ओलंपिक गेम्स में 9.7 अरब अमेरिकी डॉलर का खर्च आया था।

वहीं, सबसे महंगा शीतकालीन ओलंपिक गेम सोची में साल 2014 में आयोजित हुआ था, जिसमें 21.9 अरब डॉलर का खर्च आया था।

पिछले कुछ ओलंपिक खेलों की बात करें, तो

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी 2000 ओलंपिक गेम्स में 300 तरह के इवेंट्स हुए थे, जिसमें 10 हजार 651 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और उसमें 5 अरब डॉलर का खर्च आया था।

2004 में ग्रीस के एथेंस में ओलंपिक का आयोजन किया गया था, जिसमें 301 इवेंट्स हुए थे, 10 हजार 625 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और करीब 3 अरब डॉलर का खर्च आया था।

2008 में चीन की राजधानी बीजिंग में ओलंपिक का आयोजन किया गया था, जिसमें 302 तरह के खेल हुए थे और 10 हजारह 942 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और 6.8 अरब डॉलर का खर्च आया था।

वहीं, 2012 में ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया था, जिसमें 302 तरह के खेलों में 10 हजार 568 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और 14.9 अरब डॉलर का खर्च आया था।

जबकि, 2016 के ब्राजील के रियो ओलंपिक में 306 तरह के खेलों के आयोजन में 10 हजार 500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और 13.6 अरब डॉलर का खर्च आया था।

2020 के जापान के टोक्यो ओलंपिक खेलों में 13 अरब डॉलर का खर्च आया था।

ये सभी आंकड़े ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के हैं।

लिहाजा, ओलंपिक खेलों का आयोजन करना आसान नहीं है, लेकिन अगर भारत सरकार ने मेजबानी की दावेदारी पेश की है, तो यकीनन इसका मकसद वैश्विक प्रभाव का विस्तार करना है और चूंकी इस आयोजन में अभी 12 सालों का वक्त और है, तो इसमें खर्च और बढ़ने की पूरी संभावना होगी।

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