यूक्रेन युद्ध में पलटा फ्रांस? राष्ट्रपति ने कहा, शांति के लिए हो रूसियों का सम्मान, अमेरिका को बड़ा झटका
फ्रांस के राष्ट्रपति विश्व के उन नेताओं में से हैं, जो लगातार युद्ध खत्म करने के लिए कोशिश कर रहे हैं और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर रहे हैं।
पेरिस/वॉशिंगटन/मॉस्को, मार्च 08: यूक्रेन युद्ध के बीच फ्रांस ने रूस को लेकर बड़ा बयान दिया है और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि, दुनिया में शांति के लिए रूसियों का सम्मान होना चाहिए। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या यूक्रेन युद्ध के बीच फ्रांस ने यू-टर्न ले लिया है? क्या फ्रांस ने अमेरिका को यूक्रेन युद्ध के बीच झटका देने का मन बना लिया है? और सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या रूस को लेकर नाटो देशों में दरार पड़ रही है?

फ्रांस ने कहा- रूस का हो सम्मान
यूक्रेन संकट के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि, रूस और उसके लोगों के साथ सम्मान से पेश आने की जरूरत है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने दावा करते हुए कहा कि, रूस की भागीदारी के बिना दीर्घकालिक शांति संभव नहीं है। फ्रांस के राष्ट्रपति का ये बयान तब आया है, जब रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध जारी है और अब युद्ध का 13वां दिन भी खत्म होने वाला है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, तकनीकी सहयोग, व्यवसाय और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से रूसी और बेलारूसी लोगों के साथ संवाद जारी रखने सहित सभी संभावित मानवीय संबंधों को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

युद्ध पर क्या बोले फ्रांसीसी राष्ट्रपति?
फ्रांस के राष्ट्रपति विश्व के उन नेताओं में से हैं, जो लगातार युद्ध खत्म करने के लिए कोशिश कर रहे हैं और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर रहे हैं। रविवार को भी फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पुतिन से करीब पौने दो घंटे तक बातचीत की थी। फ्रांस के राष्ट्रपति ने मंगलवार को दिए बयान में कहा कि, "यह हमारा काम है कि हम नेताओं के साथ बात करना जारी रखें, भले ही हमारे बीच मतभेद हों... और हमेशा एक देश के तौर पर रूसी लोगों के रूप में रूस का सम्मान करें"। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने पोइसी के कम्यून में एक चुनाव पूर्व बैठक में यूक्रेन युद्ध को लेकर यह टिप्पणी की है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया है, कि जब तक रूस यूरोपीय महाद्वीप की "महान शांति आर्किटेक्चर" का हिस्सा नहीं है, तब तक स्थायी शांति के बारे में बात करना असंभव होगा।

यूरोपीय देशों में रूसोफोबिया!
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद अमेरिका समेत यूरोपीय देशों में रूस के खिलाफ जमकर नफरत की जा रही है और रूसी राजनयिक मिशनों, संगठनों और लोगों पर हमले भी किए गये हं। वहीं, यूरोपीय संघ के देशों में रूसोफोबिक भावना की एक लहर बह गई है। लेकिन, सवाल उठ रहे हैं, कि क्या फ्रांस ने यूक्रेन युद्ध के बीच यू- टर्न लिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, यूरोपीय देशों में सिर्फ फ्रांस ही एक ऐसा देश रहा है, जिसकी विदेश नीति पर अमेरिका का न्यूनतम प्रभाव रहा है। वहीं, इसी साल ऑकस समझौते को लेकर जब ऑस्ट्रेलिया ने डीजल पनडुब्बी का करार फ्रांस के साथ रद्द करते हुए अमेरिका के साथ परमाणु पनडुब्बी के लिए करार किया था, उस वक्त फ्रांस काफी गुस्से में था और माना जा रहा है, उसका असर अभी देखा जा रहा है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में अभी तक फ्रांस ने रूस के खिलाफ ही वोट डाला है।

फ्रांस ने पहले कहा था- लंबी चलेगी लड़ाई
आपको बता दें कि, इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को चेतावनी दी थी, कि मॉस्को द्वारा अपने पश्चिमी समर्थक पड़ोसी देश पर आक्रमण शुरू करने के बाद दुनिया को रूस और यूक्रेन के बीच लंबे युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। मैक्रों ने फ्रांस के वार्षिक कृषि मेले में कहा था कि, 'अगर आज सुबह आपसे कुछ कह सकते हैं, तो वो यह कि ये युद्ध लंबा चलेगा।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'यह संकट बना रहेगा, यह युद्ध चलेगा और इसके साथ आने वाले सभी संकटों के स्थायी परिणाम होंगे। इसलिए हमें तैयार रहना होगा।' आपको बता दें कि, रूसी कंपनियों पर लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से फ्रांसीसी कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा है, लिहाजा फ्रांस की कोशिश यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करवाने की है।












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