रवांडा नरसंहार: 27 साल बाद मैक्रों ने फ्रांस के 'किए' पर मांगी माफी, 100 दिन में मारे गए 8 लाख लोग
किगाली, रवांडा, 27 मई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 1994 में रवांडा में हुए नरसंहार में फ्रांस की भूमिका को मानते हुए रवांडा से माफी मांगी है। फ्रेंच राष्ट्रपति ने ये माफी रवांडा में स्थित किगाली नरसंहार स्मारक पर एक संबोधन के दौरान बोलते हुए कही थी। यह स्मारक सामूहिक नरसंहार के दौरान यहां दफन किए गए 2.5 लाख पीड़ितों की याद में बनाया गया है। हालांकि यह फ्रांस की तरफ से आधिकारिक माफी की पेशकश नहीं है लेकिन राष्ट्रपति मैक्रों के बयान के बड़े मायने हैं।

क्या था रवांडा का नरसंहार?
मैक्रों ने कहा आज यहां पूरी विनम्रता और सम्मान के साथ खड़े होकर मैं अपनी जिम्मेदारियों को पहचानने आया हूं।
साल 1994 में रवांडा में हुतु चरमपंथियों ने 100 दिनों तक देश में भीषण रक्तपात किया था जिसमें टुटसी और उदारवादी हुतु जनजातीय समूह के 8 लाख लोग मारे गए थे। ये हिंसा जुलाई 1994 में जाकर थमी थी जब वर्तमान राष्ट्रपति कगामे के नेतृत्व में रवांडन पैट्रियाटिक फ्रंट (आरपीएफ) ने युगांडा से यहां प्रवेश किया और देश की बागडोर संभाली।
मैक्रों 2010 के बाद पहले फ्रेंच नेता हैं जो इस पूर्वी अफ्रीकी देश की यात्रा पर पहुंचे हैं। रवांडा अपने 8 लाख नागरिकों (अधिकांश टुटसी जातीय समूह) की हत्या के लिए फ्रांस पर आरोप लगाता रहा है।

हत्यारे शासन के साथ खड़े होने के लिए मांगी माफी
मैक्रों ने कहा फ्रांस ने उन लोगों की नहीं सुनी जिन्होंने रवांडा में आसन्न नरसंहार के बारे में पहले ही आगाह किया था और उनका देश वास्तव में "हत्यारे शासन" के साथ खड़ा था।
उन्होंने कहा हालांकि फ्रांस "नरसंहार में सहयोगी नहीं" था। "लेकिन रवांडा के लिए फ्रांस की एक भूमिका और एक राजनीतिक जिम्मेदारी है। उसका एक कर्तव्य, इतिहास का डटकर सामना करना और सच्चाई के परीक्षण पर चुप्पी के महत्व को रेखांकित करते हुए रवांडा के लोगों को दी गई पीड़ा को पहचानना है।
मैक्रों ने आगे कहा कि इस भयावह नरसंहार में जो लोग बच गए थे, केवल वही लोग "माफ कर सकते हैं और हमें माफी का उपहार दे सकते हैं।"

रवांडा के राष्ट्रपति ने की भाषण की तारीफ
रवांडा के राष्ट्रपति कागामे ने मैक्रों के भाषण की तारीफ की है। किगाली में दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कागामे ने कहा "उनके शब्द माफी से ज्यादा मूल्यवान थे। वे सच थे।"
कागामे ने मैक्रोन के भाषण की सराहना की।
मैक्रों की टिप्पणी अपने पूर्ववर्तियों से काफी आगे थी। हालांकि रवांडा में जहां बहुत सारे लोग उनके पूर्ण माफी की उम्मीद कर रहे थे।












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