नहीं रहे सबसे ज्यादा लोकप्रिय और माफी देने वाले जज फ्रैंक केप्रियो, भावुक हुई दुनिया
Frank Caprio America's Nicest Judge Death: अमेरिका के 'सबसे दयालु जज' कहे जाने वाले फ्रैंक कैप्रियो का निधन हो गया है। रोड आइलैंड के इस रिटायर्ड म्युनिसिपल जज ने 88 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बताया गया कि कैप्रियो ने पैंक्रियाटिक कैंसर से लंबी और साहसिक लड़ाई के बाद शांति से अंतिम सांस ली।
कुछ दिन पहले ही फ्रैंक कैप्रियो ने फेसबुक पर एक भावुक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी और दुनिया भर के प्रशंसकों से दुआओं में याद रखने की अपील की थी।

कौन थे फ्रैंक कैप्रियो?
फ्रांसिस्को फ्रैंक कैप्रियो अमेरिका के जाने-माने और लोकप्रिय न्यायाधीश थे, जिन्हें दुनिया भर में America's Nicest Judge यानी सबसे दयालु जज कहा जाता था। 1936 में रोड आइलैंड के प्रोविडेंस शहर में एक साधारण इटैलियन-अमेरिकन परिवार में जन्मे कैप्रियो ने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर समय इसी शहर में बिताया। 1985 से लेकर 2023 तक वह प्रोविडेंस म्युनिसिपल कोर्ट के चीफ़ जज रहे और लगभग चार दशक तक न्याय की सेवा की।
उनकी पहचान सिर्फ एक सख़्त जज के तौर पर नहीं, बल्कि इंसानियत से भरपूर फैसले करने वाले न्यायाधीश के रूप में बनी। ट्रैफिक चालान या छोटे मामलों में वे अक्सर लोगों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझकर करुणा दिखाते और कई बार जुर्माना माफ़ भी कर देते। यही वजह रही कि उनका कोर्टरूम शो 'Caught in Providence' दुनियाभर में मशहूर हो गया। इस शो के क्लिप्स सोशल मीडिया पर अरबों बार देखे गए और लोगों ने उन्हें इंसाफ़ और इंसानियत का प्रतीक माना।
उन्हें क्यों कहा जाता है 'सबसे दयालु जज'?
फ्रैंक कैप्रियो को उनकी इंसानियत भरी न्यायशैली ने दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई। वे हमेशा अपराध या गलती के पीछे छिपी परिस्थितियों को समझने की कोशिश करते थे। अगर किसी व्यक्ति की मजबूरी सामने आती, तो वे कठोर सज़ा देने की बजाय नरमी और करुणा का रास्ता अपनाते।
ट्रैफिक जुर्माना, रेड लाइट उल्लंघन या पार्किंग टिकट जैसे छोटे मामलों में वे अक्सर लोगों की आर्थिक स्थिति सुनते और कई बार पूरा जुर्माना माफ़ कर देते। कोर्टरूम में जब लोग अपनी निजी परेशानियां, जैसे परिवार में मौत, आर्थिक तंगी या बीमारी बयान करते, तो कैप्रियो उन्हें पूरी संवेदनशीलता से सुनते और इंसानियत दिखाते।
उनका अंदाज़ भी सबसे जुदा था। अदालत का सख़्त माहौल वे अपने ह्यूमर और दोस्ताना बातचीत से हल्का-फुल्का बना देते थे। उनकी मुस्कान और सहजता ने कोर्ट को डर की जगह राहत और भरोसे की जगह बना दिया।
सबसे खास बात यह रही कि वे हर व्यक्ति को सम्मान से पेश आते। कई बार तो बच्चों को भी बेंच पर बुलाकर फैसले में शामिल करते। उनके फैसले यह संदेश देते कि न्याय सिर्फ सज़ा देने से नहीं, बल्कि करुणा, इंसाफ और दयालुता से भी किया जा सकता है।
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