Explain: फ्रांस चुनाव में ध्वस्त हो गया इमैनुएल मैक्रों का किला! दक्षिणपंथी पार्टी ने जीता पहले राउंड का चुनाव
French Election: यूरोपीय संसद की चुनाव में ही इस बात के संकेत मिल गये थे, कि फ्रांस में अबकी बार राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों की पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगने वाला है और फ्रांस में हुए संसदीय चुनाव में पहले राउंड की काउंटिग खत्म होने के बाद इमैनुएलन मैंक्रों की पार्टी तीसरे नंबर पर चल रही है।
जबकि, मुख्य विपक्षी पार्टी नेशनल रैली (RN) ने शानदार प्रदर्शन किया है और पहले राउंड में स्पष्ट जीत हासिल कर ली है। नेशनल रैली (RN) की नेता ली मरीन पेन हैं, जो धूर दक्षिणपंथी नेता हैं और इस चुनाव के साथ ही करीब करीब ये तय हो गया है, कि फ्रांस में अगला राष्ट्रपति ली मरीन पेन बन सकती हैं।

ली मरीन पेन, पिछले राष्ट्रपति चुनाव में, इमैनुएल मैक्रों से हार गईं थीं।
फ्रांस में इस वक्त संसदीय चुनाव के लिए वोट डाले जाने के बाद काउंटिंग चल रही है। ये चुनाव समय से पहले करवाए गये हैं, क्योंकि तीन पहले पहले हुए यूरोपीय संसद चुनाव में इमैनुएल मैंक्रों की पार्टी बुरी तरह से हार गई थी, जिसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने संसद को भंग करते हुए चुनावों की घोषणा कर दी थी।
पहले राउंड के चुनाव में जीत का मतलब
मरीन ले पेन के की पार्टी ने पहले राउंड में स्पष्ट जीत हासिल की, हालांकि यह निर्णायक नहीं है, क्योंकि 7 जुलाई को होने वाले दूसरे दौर के मतदान से पहले वोट का अंतिम परिणाम अनिश्चित बना हुआ है।
मैक्रों, जिनके अचानक चुनाव कराने के फैसले ने उनके दोस्तों के साथ साथ उनके विपक्षियों को भी चौंका दिया, उन्होंने मतदाताओं से अगले रविवार को होने वाले दूसरे राउंड के चुनाव में ली मरीन पेन के खिलाफ वोट करने का आग्रह किया है।
फ्रांस-24 ने पोलस्टर इप्सोस-तालान के अनुमानों के आधार पर बताया है, कि RN और उसके दक्षिणपंथी सहयोगियों ने पहले राउंड के चुनाव में 33.2% वोट हासिल किए हैं, जबकि वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट (एनएफपी) को 28.1% वोट मिले हैं। मैक्रों का एनसेंबल गठबंधन 21% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहा है और उसके बाद रूढ़िवादी लेस रिपब्लिकेंस और उनके सहयोगी 10% वोट मिले हैं।
सर्वेक्षणकर्ताओं ने कहा है, कि इन आंकड़ों के आधार पर, अति-दक्षिणपंथी खेमा नेशनल असेंबली में 230 से 280 सीटें जीत सकता है, हालांकि वह पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए आवश्यक 289 सीटों से पीछे रह जाएगा।
हालांकि, ये अनुमान काफी ज्यादा मुश्किल हैं, क्योंकि अंतिम परिणाम से पहले पार्टियों में भारी खरीद-फरोख्त होने की संभावना है, वहीं अंतिम राउंड के चुनाव से पहले कई एलायंस बनने और कई एलायंस टूटने की संभावना है।
राउंड-1 जीतकर क्या बोलीं ली मरीन पेन
अपने उत्तरी निर्वाचन क्षेत्र में उत्साही समर्थकों को संबोधित करते हुए, जहां उन्होंने पहले राउंड में स्पष्ट जीत हासिल की है, ली मरीन पेन ने मतदाताओं से अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने और फ्रांस की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में सीटों का "पूर्ण बहुमत" देने का आह्वान किया है, जिसके पास सीनेट की तुलना में ज्यादा शक्तियां हैं।
ऐसी स्थिति में मैक्रोन से उम्मीद की जाएगी, कि वे पार्टी के 28 वर्षीय पोस्टर बॉय जॉर्डन बार्डेला को एक अजीबोगरीब सत्ता-साझाकरण प्रणाली में प्रधान मंत्री के रूप में नामित करेंगे, जिसे "सहवास" के रूप में जाना जाता है, जो उन्हें घरेलू और विश्व मंच, दोनों पर कमजोर करेगा।
आरएन पार्टी की की जीत का मतलब है, कि नाजी-सहयोगी विची शासन के बाद फ्रांस में पहली बार दक्षिणपंथी पार्टी की सरकार बनेगी, जो एक चरमपंथी पार्टी के लिए एक असाधारण बदलाव को दर्शाता है, जिसकी सह-स्थापना ली पेन के पिता जीन-मैरी ने की थी, जो एक विची समर्थक और यहूदी विरोधी थे।
सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है, कि अब देश में एक त्रिशंकु संसद होगी, जिसमें कोई भी गठबंधन बहुमत हासिल करने में सक्षम नहीं होगा, जिससे यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और इसकी प्रमुख सैन्य शक्ति में गतिरोध पैदा होगा।
रविवार का फ्रांस में हुआ मतदान तीन हफ्तों के अराजक और अस्थिर चुनावी अभियान के बाद हुआ था, जिसे आधुनिक फ्रांसीसी इतिहास में सबसे छोटा चुनाव कहा जा रहा था, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों ने मतदाताओं को चेतावनी दी थी, कि अगर वे उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वियों में से किसी को चुनते हैं तो "गृहयुद्ध" का खतरा है।
फ्रांस का ये चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक था, क्योंकि इस बार 65 प्रतिशत रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था, जो 1997 के बाद सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत है।

इमैनुएल मैक्रों का उल्टा पड़ा दांव
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस चुनाव में अपने "प्रगतिशील" खेमे और प्रतिद्वंद्वी "लोकलुभावन" ताकतों के बीच अंतिम मुकाबले के रूप में पेश करने की उम्मीद की थी। मैंक्रों की यह रणनीति पहले भी कारगर रह चुकी है, जिसमें मतदाताओं ने 2017 और 2022 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के सेकंड राउंड में उन्हें जीत दिलाई थी और ज्यादातर मतदाताओं ने ली मरीन पेन के खिलाफ वोट डाल दिया था। लेकिन, मैक्रों का ये दांव इस बार उल्टा पड़ गया।
वहीं, इस चुनाव की सबसे बड़ी दूसरी बात ये निकलकर सामने आई है, कि इस बार वोटों का ध्रुवीकरण देखने को मिला है, और फ्रांस की दक्षिणपंथी वोटरों के एकमुश्त ली मरीन पेन को वोट डालने के बाद वामपंथी वोटर्स भी लामबंद होने लगे और उन्होंने भारी संख्या में देश की वामपंथी पार्टी न्यू पॉपुलर फ्रंट (एनएफपी) को मतदन किया, जिसे 28.1% वोट मिले और ये दूसरे नंबर पर रही है।
न्यू पॉपुलर फ्रंट (एनएफपी) के लिए भी ये चुनावी नतीजे चौंकाने वाले हैं और उसने भी उम्मीद नहीं की थी, उसे इस तरह से समर्थन मिलेगा। वोटों का ये ध्रुवीकरण बतलाता है, कि फ्रांस के समाज में बुरी तरह से बंटवारा हुआ है और अगले राष्ट्रपति चुनाव में ली मरीन पेन अब राष्ट्रपति भी बन सकती हैं।
वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पार्टी की बुरी तरह से हार के पीछे की सबसे बड़ी वजह पिछले साल उनका न्यू पेंशन स्कीम को लागू करने का फैसला था, जो उन्होंने संसद के फैसले को पलटते हुए लागू किया था, जिसके खिलाफ देशभर में भारी प्रदर्शन किए किए गये थे। वहीं, देश में बढ़ती आतंकी घटनाओं ने भी फ्रांसीसी लोगों को इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ वोट डालने पर मजबूर किया है। फ्रांस में पिछले कुछ सालों में आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ है और अवैध प्रवासियों ने भी स्थानीय लोगों को निशाना बनाया है।












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