‘यूक्रेन युद्ध में डगमगा चुका है पुतिन का आत्मविश्वास’, रूस के पूर्व प्रधानमंत्री बोले, अब हार निश्चित है...

मिखाइल कास्यानोव साल 2000 में रूस के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन साल 2004 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उस वक्त रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ही थे...

मॉस्को, मई 14: यूक्रेन यूद्ध का तीसरा महीना भी खत्म होने वाला है और यूक्रेन के राष्ट्रपति ने शुक्रवार रात देश के नाम अपने संबोधन में कहा है कि, उन्हें नहीं पता कि, अब ये लड़ाई कितने दिनों तक चलने वाली है। लेकिन, एक बात जो अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है, कि यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना का भारी नुकसान हुआ है और अब रूस के पूर्व प्रधानमंत्री मिखाइल कास्यानोव ने कहा है कि, यूक्रेन युद्ध में अब राष्ट्रपति पुतिन का विश्वास डगमगा चुका है।

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री का दावा

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री का दावा

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री मिखाइल कास्यानोव ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध में व्लादिमीर पुतिन का विश्वास हिल गया है। यूरोप में एक अज्ञात स्थान से शुक्रवार को डीडब्ल्यू को दिए गये इंटरव्यू में रूस के पूर्व प्रधान मंत्री मिखाइल कास्यानोव ने कहा कि, रूसी राष्ट्रपति को युद्ध की स्थिति के बारे में उनके जनरलों द्वारा गुमराह किया गया हो सकता है। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया कि, पुतिन ताकत की स्थिति से नहीं बोल रहे हैं, और यहां तक कि 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत के उपलक्ष्य में "विजय दिवस" के मौके पर भी राष्ट्रपति पुतिन ने सैन्य परेड में जो भाषण दिया है, उसमें वो "थोड़ा घबराया हुआ" भी लग रहे थे।

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    कौन हैं रूस के पूर्व प्रधानमंत्री?

    कौन हैं रूस के पूर्व प्रधानमंत्री?

    मिखाइल कास्यानोव साल 2000 में रूस के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन साल 2004 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उस वक्त रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ही थे और मिखाइल कास्यानोव ने पुतिन के प्रधानमंत्री के तौर पर ही काम किया था। प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त होने के बाद मिखाइल कास्यानोव ने अपनी एक नई पार्टी बना ली और साल 2008 में उन्होंने रूस का राष्ट्रपति बनने के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन वो हार गये थे, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था और तब से लेकर आज तक वो एक अज्ञात जगह पर निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। रूस की राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान मिखाइल कास्यानोव ने खुलकर राष्ट्रपकि पुतिन की नीतियों का विरोध किया था और उसके बाद से ही ऐसा कहा जाता है, कि वो पुतिन के प्रमुख विरोधी बन गये थे।

    पुतिन का विश्वास डगमगाया

    पुतिन का विश्वास डगमगाया

    विजय दिवस के मौके पर रूस ने अपने विध्वंसक हथियारों की प्रदर्शनी लगाई थी और दुनिया के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश थी और इस मौके पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक भाषण दिया था। भाषण में पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर कई झूठे दावे किए और यहां तक उन्होंने कहा कि, यूक्रेन के पास परमाणु हथियार हो सकते हैं और देश का नेतृत्व नव-नाज़ियों द्वारा किया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा था कि, आक्रमण ही "एकमात्र सही निर्णय" था। इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति ने ये भी दावा किया था, कि पश्चिमी देश रूस पर हमे की योजना बना रहे थे। जिसको लेकर मिखाइल कास्यानोव ने कहा कि, ‘राष्ट्रपति पुतिन और उनके भाषण की प्रतिक्रिया बिल्कुल कमजोर थी और पुतिन को "पहले से ही एहसास होना शुरू हो गया था कि वह इस युद्ध को हार रहे हैं।"

    आंतरिक घेरे ने किया पुतिन को 'गुमराह'?

    आंतरिक घेरे ने किया पुतिन को 'गुमराह'?

    कास्यानोव ने इस सिद्धांत का समर्थन किया कि कई विश्लेषकों का मानना है कि कैसे बुरी खबर देने के डर से पुतिन के आंतरिक सर्कल में शामिल लोगों ने पुतिन को सही जानकारी नहीं दी और डर की वजह से नहीं बताया, कि यूक्रेन में सैन्य अभियान चलाने का अंजाम क्या हो सकता है, लिहाजा पुतिन नहीं समझ पाए, कि यूक्रेन में उन्हें किस तरह के प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है और रूस को क्या-क्या खामियाजे भुगतने पड़ सकते हैं। मिखाइल कास्यानोव ने कहा कि, "मुझे यकीन है कि उन्हें गुमराह किया गया था," कास्यानोव ने कहा, पुतिन को "विश्वास था कि उनकी सेना का आकार काफी बड़ा है और उन्हें जीत हासिल करने में काफी कम वक्त लगेगा'। आपको बता दें कि, अब रूसी सेना राजधानी कीव से पीछे हट चुकी है और अब रूसी सेना सिर्फ पूर्वी यूक्रेन के डोनबास इलाके पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जहां उसे काफी कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

    पूर्व प्रधानमंत्री ने दी चेतावनी

    पूर्व प्रधानमंत्री ने दी चेतावनी

    वहीं, अब यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए 80 दिन हो चुके हैं और रूस को यूक्रन में कामयाबी से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है और पूर्वी रूसी प्रधानमंत्री कास्यानोव ने चेतावनी दी है कि, युद्ध के मैदान में अभी रूस को कई और हार का सामना करना पड़ेगा और ऐसी स्थिति में पुतिन संघर्ष को एक नये चरण में धकेलने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि, ‘अब हम दूसरे चरण में आ रहे हैं, प्रतिद्वंद्विता, आर्थिक क्षमता, सैन्य क्षमता की यह प्रतियोगिता बन चुकी है'। उन्होंने कहा कि, पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को भारी हथियार भेजने का फैसला कीव को "एक निर्णायक लाभ" देगा।

    ‘एक अलग’ पुतिन को जानते हैं कास्यानोव

    ‘एक अलग’ पुतिन को जानते हैं कास्यानोव

    पुतिन के साथ काम करने वाले पूर्व रूसी प्रधानमंत्री कास्यानोव ने कहा कि, रूसी नेता में भारी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि, "मैंने उनके साथ 20 साल पहले काम किया था। उस वक्त वो एक बिल्कुल अलग व्यक्ति थे। उस समय की स्थिति पूरी तरह से अलग थी'। उन्होंने कहा कि, "उस वक्त हमारे पास संसद थी, स्वतंत्र संसद थी, हमारे पास स्वतंत्र मीडिया थी, हमारे पास न्यायपालिका थी। आज रूस में पूरी तरह से अलग दुनिया है'। उन्होंने कहा कि, ‘पुतिन ने लोकतांत्रिक राज्य की सभी विशेषताओं को नष्ट कर दिया और अब हमारे पास बिल्कुल सत्तावादी शासन है और धीरे-धीरे एक अधिनायकवादी शासन की ओर बढ़ रहा है।

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