पाकिस्तान में भी बनाई गई 'आम आदमी पार्टी', क्या केजरीवाल की तरह जलवा दिखा पाएंगे साद खट्टक?
पाकिस्तान की राजनीति में सेना का अप्रत्यक्ष तौर पर पूरा दखल रहता है, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई सैन्य अधिकारी तख्तापलट के जरिए नहीं, बल्कि जनता के बीच से, जनता के वोट से सिंहासन की लड़ाई लड़ना चाह रहा है।
इस्लामाबाद, जनवरी 19: हिंदुस्तान की सियासत में किसी जादूगर की तरह कुछ महीनों में ही शीर्ष पर छा जाने वाले अरविंद केजरीवाल के नक्शेकदन पर चलते हुए पाकिस्तान में भी 'आम आदमी पार्टी' की स्थापना की गई है। हालांकि, पाकिस्तान की आम आदमी पार्टी में पार्टी की जगह मूवमेंट लगाया गया है, यानि 'आम आदमी मूवमेंट' और इस पार्टी ने भी पाकिस्तान की सियासत को बदल देने का दावा किया है, ठीक वैसा ही दावा, जैसा दावा अरविंद केजरीवाल अब भी कई बार करते हुए पाए जाते हैं, लेकिन सवाल ये है, कि केजरीवाल को तो भारत में कामयाबी मिल गई, लेकिन पाकिस्तान की 'आम आदमी मूवमेंट' को जनता का समर्थन मिल पाएगा?

'आम आदमी मूवमेंट को जानिए
पूर्व सेना अधिकारी और राजनयिक रिटायर्ड मेजर जनरल साद खट्टक ने रविवार को एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है, जिसका नाम पाकिस्तान आम आदमी मूवमेंट (PAAM) रखा गया है और पाकिस्तान में बनी इस पार्टी का उद्येश्य सामंती राजनीति को खत्म करना और आम आदमी को सत्ता में लाना है। यानि, बहुत कुछ वैसा ही, जो उद्येश्य केजरीवाल का है। कराची प्रेस क्लब में अपनी पार्टी के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सैन्य अधिकारी साद खट्टक ने कहा कि, उनकी पार्टी जनता के सच्चे प्रतिनिधि दल के रूप में उभरेगा और आम लोगों को सत्ता में लाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान की दूसरी पार्टियों पर जनता की उम्मीदों के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया।

कौन हैं साद खट्टक?
हालांकि, पाकिस्तान की राजनीति में सेना का अप्रत्यक्ष तौर पर पूरा दखल रहता है, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई सैन्य अधिकारी तख्तापलट के जरिए नहीं, बल्कि जनता के बीच से, जनता के वोट से सिंहासन की लड़ाई लड़ना चाह रहा है। पूर्व सैन्य अधिकारी साद खट्टक श्रीलंका में पाकिस्तान के हाइ कमीशन रह चुके हैं और उनका करीब 35 सालों का सैन्य कार्यकाल रहा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, अपने 35 सालों के सैन्य करियर के दौरान साद खट्टक ने कई तरह के ऑपरेशंस ट्रेनिंग को अंजाम दिए और कई असाइनमेंट पर भी काम किया। इसके साथ ही साद खट्टक बलूचिस्तान और फाटा, जिसे 2018 में बलूचिस्तान का ही हिस्सा बना दिया गया, वहां भी उन्होंने कई सालों तक काम किया और आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजनीति में 'न्यू ब्लड' की जरूरत
नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा करते हुए साद खट्टक ने कहा कि, पाकिस्तान की राजनीति में 'न्यू ब्लड' के आने का वक्त आ चुका है, क्योंकि वर्तमान में जो पाकिस्तान में सरकारें बनती हैं, वो सामंती और पूंजीपतियों की सरकारें होती हैं। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों पर अफसोस जताते हुए कहा कि, सत्ताधारी पार्टियों ने आम आदमी को 'राजनीति में अप्रासंगिक' बना दिया है और
'पाकिस्तान आम आदमी मूवमेंट' इस संस्कृति को बदल देगा, और पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में पहली बार मध्यम वर्ग के भीतर से नेताओं को सामने लाया जाएगा।

देश की व्यवस्था बदलने का दावा
पार्टी की स्थापना करने के बाद साद खट्टक ने देश की व्यवस्था को बदलने का दावा किया है और कहा है कि, उनकी पार्टी में सिर्फ देश के आम लोगों को ही शामिल होने का मौका दिया जाएगा और आम लोग ही चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही
खट्टक ने एक तरफ से पाकिस्तान की सभी राजनीतिक पार्टियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि, सत्ताधारी पार्टी इमरान खान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और पीपीपी ने केवल अपने अपने स्वार्थ के लिए काम किया है। उन्होंने पीएम इमरान खान के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि, 'हम यह सब बदलना चाहते हैं... एक बार लोगों को पीटीआई से काफी उम्मीदें थीं लेकिन इमरान खान ने लोगों को काफी निराश किया है।'

पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था का विरोध
इनके साथ ही साद खट्टक ने पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और मौजूदा न्यायिक व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि, मौजूदा न्यायपालिका आम आदमी को न्याय दिलाने में नाकामयाब रही है। उन्होंने एक आधुनिक, जिम्मेदार और प्रभावी न्यायिक प्रणाली शुरू करने का भी वादा देश की जनता से किया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि, वास्तविक परिवर्तन तब होगा जब शक्तियों को निचले स्तरों पर प्रत्यायोजित किया जाएगा। यानि, एक तरह से उन्होंने केजरीवाल की तरह की स्वराज की बात करने की कोशिश की।

पेश किया पार्टी की घोषणापत्र
साद खट्टक ने पार्टी की स्थापना करने के साथ साथ अपनी पार्टी का घोषणापत्र भी देश की जनता और मीडिया के साथ शेयर किया है, जिसमें उन्होंने शिक्षा, ई-गवर्नेंस, स्वास्थ्य, युवाओं को सशक्त बनाने, पर्यावरण, कानून और व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। पाकिस्तान चुनाव आयोग ने PAAM को नवंबर 2021 में रजिस्टर्ड किया था, जबकि इसकी आधिकारिक लॉंचिग समारोह रविवार को आयोजित की गई। कुछ पाकिस्तानी पत्रकार साद खट्टक के तेवर की तूलना अरविंद केजरीवाल से कर रहे हैं, लेकिन कई पत्रकार पाकिस्तान में उनकी पार्टी की सफलता पर संदेह जता रहे हैं।
कामयाब हो पाएंगे साद खट्टक?
वैसे तो राजनीति में कुछ भी हो सकता है, लेकिन पाकिस्तानी विशेषज्ञों को साद खट्टक की पार्टी को राजनीति में सफल होने की संभावना पर संदेह है। विश्लेषकों का कहना है कि, पाकिस्तान की राजनीति पर सेना पूरी तरह से हावी है और बिना सेना की सहायता के राजनीति में आगे बढ़ना काफी मुश्किल है। हालांकि, साद खट्टक खुद सैन्य अधिकारी रह चुके हैं, लेकिन उन्हें सेना का कितना समर्थन मिल पाएगा, ये कहा नहीं जा सकता है। दूसरी तरफ कई विश्लेषकों का ये भी कहना है कि, पाकिस्तान के मुकाबले भारत की राजनीति काफी स्वतंत्र है, फिर भी केजरीवाल सिर्फ एक राज्य में ही सफल हो सके हैं, लेकिन, पाकिस्तान में भारत के मुकाबले और कठिन है, लिहाजा आने वाले लोकसभा चुनाव में साद खट्टक किस हद तक जनता के बीच पैठ बना पाएंगे, इसपर सभी की निगाहें रहेंगी।












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