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ऑस्ट्रेलिया में चर्च बन गये हैं शोषण के अड्डे, सबसे बड़ा पादरी गिरफ्तार, जानिए बिशप के महापाप की खौफनाक कहानी

Christopher Saunders: आस्था के साथ चर्च में लोग ईश्वर से प्रार्थना करने आते थे, लेकिन एक पादरी ने चर्च को अय्याशी का अड्डा बना दिया था। ये कहानी ऑस्ट्रलिया की है, जहां एक पूर्व पादरी के खौफनाक करतूतों का खुलासा हुआ है और पता चला है, कि एक पादरी ने दर्जन भर से ज्यादा लड़कियों का यौन शोषण किया है।

इस कहानी को जरूर पढ़नी चाहिए, ताकि अगली बार से आप ऐसे पादरियों से सावधान रहें और खुद का और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।

australian bishop Christopher Saunders

ये कहानी है उस पादरी की, जो करीब 50 सालों तक ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिम के एक दूरदराज के इलाके में चर्च में रहता था, जिसपर बलात्कार का आरोप तय किया गया है। इस पादरी का नाम है, क्रिस्टोफर सॉन्डर्स, जिसकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है और आरोपों में कहा गया है, कि इसमें कम से कम 19 महिलाओं का यौन शोषण किया है। इस पादरी पर बच्चों से भी घिनौनी हरकत करने का आरोप लगाया गया है। यानि, समझा जा सकता है, कि ये पादरी किस कदर हैवान हो चुका था और कैसे ये चर्च पहुंचने वाली महिलाओं को देखकर लार टपकाता होगा।

क्रिस्टोफर सॉन्डर्स पर लगे ये आरोप 2008 के हैं, लेकिन अब जाकर आरोप तय किए गये हैं, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। यानि, उसे गिरफ्तार करने में पुलिस को करीब 15 साल से ज्यादा लग गये।

रिपोर्ट के मुताबिक, पादरी क्रिस्टोफर सॉन्डर्स ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिम में ब्रूम के साथ-साथ कुनुनुर्रा और कलुम्बुरु के दूर-दराज के शहरों में भी अपनी सेवाएं देने जाया करता था।

हालांकि, इससे पहले सॉन्डर्स ने किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में इसके खिलाफ इतने सबूत पेश किए गये, कि पुलिस को इसके खिलाफ एक्शन लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पादरी के महापाप की कहानी

सॉन्डर्स को पहली बार 1976 में एक पादरी के तौर पर चर्च में नियुक्त किया गया था और फिर वह 1995 में बिशप बने।

बीबीसी के अनुसार, सॉन्डर्स को अगले वर्ष ब्रूम शहर का बिशप नियुक्त किया गया। सॉन्डर्स ने अपना ज्यादातर समय किम्बरली क्षेत्र में पादरी के रूप में चर्च की सेवा की। इस क्षेत्र की आबादी करीब 50 हजार है, और फ्रांस-24 के मुताबिक, ये सूबा कई आदिवासी समुदायों का घर है।

सॉन्डर्स ने समाज में बदलाव लाने, लोगों की हितों के मुताबिक काम करने के नाम पर लड़कियों का यौन शोषण किया। ये आदिवासी समाज को खास तौर पर टारगेट करता था और दावा करता था, कि वो आदिवासी समाज में समाज सुधार का काम करता है।

ऑस्ट्रेलिया के एबीसी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से कहा है, कि "सॉन्डर्स हफ्ते में तीन या चार दिन चर्च जाया करता था और आदिवासी समाज आंख मूंदकर उसपर यकीन करता था।"

हैरानी की बात ये है, कि 2008 में आरोप लगने के बाद भी ये पादरी चर्च में बना रहा और जब साल 2021 में पुलिस ने इसके खिलाफ पहली बार चार्जशीट फाइल की, उसके बाद 2021 में जाकर इसने इस्तीफा दिया था। मीडिया में आरोपों की रिपोर्ट आने से एक साल पहले वह पद से हट गए था, लेकिन ब्रूम शहर का एमेरिटस बिशप वो बना रहा।

वहीं, जब मामले ने तूल पकड़ा, तो वेटिकन सिटी ने साल 2022 में इस पादरी के खिलाफ जांच शुरू करने की घोषणा की।

वेटिकन सिटी ने चर्चों को ऐसे अपराधियों से मुक्त करने के लिए "वोस एस्टिस लक्स मुंडी" जिसका लैटिन में अर्थ है "आप दुनिया की रोशनी हैं" के नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका काम चर्च में हो रहे अपराधों की जांच करने में मदद करना था। इसे 2019 में तैयार किया गया था।

पुलिस की तफ्तीश में पता चला है, कि साल 2008 से लेकर 2014 के बीच इसने पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई शहर ब्रूम, कुनुनुर्रा और कलुंबरू के आदिवासी क्षेत्र में कई लड़कियों से रेप किया। तमाम जांच रिपोर्ट्स के बाद पादरी के खिलाफ बलात्कार के 14 मामले दर्ज किए गये।

पादरी के पाप का कब हुआ खुलासा

पादरी के महापाप को गुप्त रखने की भरसक कोशिश की गई, लेकिन जांच रिपोर्ट पिछले साल उस वक्त सार्वजनिक हो गई, जब एक ऑस्ट्रेलियाई टेलीविजन समाचार नेटवर्क ने सॉन्डर्स पर 200 पेज की वेटिकन रिपोर्ट की सामग्री की रिपोर्ट ऑन एयर कर दी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया पुलिस बल ने उस समय कहा था, कि उन्होंने उस रिपोर्ट की एक प्रति का अनुरोध किया था, जिसने आपराधिक जांच फिर से शुरू की।

सॉन्डर्स ऑस्ट्रेलिया के सबसे वरिष्ठ पादरियों में से एक है, जिन पर चर्च को हिला देने वाला सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। टीवी नेटवर्क सेवन के फुटेज में बुधवार को गिरफ्तारी के बाद सॉन्डर्स को पुलिस द्वारा ले जाते हुए दिखाया गया है। पुलिस ने कहा कि उस व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है।

यौन शोषण करने वाले पादरियों की संख्या बढ़ी

ऑस्ट्रेलिया में एक के बाद एक कई मामले सामने आए हैं, जहां पादरियों के ऊपर यौन शोषण के आरोप लगाए गये हैं। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया की सरकार दोषी पादरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बचती है। सीएनएन ने 2017 की सरकारी जांच के हवाले से कहा था, कि सबसे कमजोर लोगों की रक्षा करने में ऑस्ट्रेलियाई संस्थान बुरी तरह से फेल साबित हुए हैं।

जिन लोगों ने धार्मिक संस्थान में यौन शोषण की सूचना दी है, उनमें से 61.4 प्रतिशत ने कहा, कि यह कैथोलिक संगठन में हुआ। आउटलेट ने रॉयल कमीशन इन इंस्टीट्यूशनल रिस्पॉन्स टू चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज के हवाले से कहा, कि सात प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक पादरियों पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि कुछ आदेशों में 40 प्रतिशत से ज्यादा पादरी शामिल हैं।

इससे पहले कार्डिनल जॉर्ज पेल, वेटिकन सिटी में तीसरे सर्वोच्च रैंकिंग वाले पादरी था, जब उसे 2018 में एक ऑस्ट्रेलियाई अदालत में 1996 में मेलबर्न कैथेड्रल में दो 13 वर्षीय लड़की गायकों के साथ यौन दुर्व्यवहार करने का दोषी ठहराया गया था, और उस वक्त ये पादरी एक आर्चबिशप था।

लेकिन, फिर 13 महीने जेल में रखने के बाद उसे रिहा कर दिया गया, जिसके बाद उसने ऑस्ट्रेलिया छोड़ दिया और फिर रोम में उसकी मौत हो गई।

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