कौन हैं खिलाड़ी निलोफर बायत, जिन्होंने बिलखती अफगान लड़कियों को लेकर तालिबान को कोसा?
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को दूसरी बार अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और पहले स्कूलों में लड़कियों की पढ़ाई को बैन किया गया और अब विश्वविद्यालयों में लड़कियों की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिए गये हैं।

Afghanista News: तालिबान ने अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों में लड़कियों की शिक्षा को बैन कर दिया है, जिसको लेकर पूरी दुनिया में तालिबान शासकों की निंदा की गई है। वहीं, अफगानिस्तान के अलग अलग वर्ग के लोग तालिबान के इस फैसले के खिलाफ आवाजें उठा रहे हैं। वहीं, व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और अफगानिस्तान में दो बार युद्ध पीड़ित निलोफर बायत ने तालिबान के इस फैसले को एक 'आपदा' करार दिया है।

तालिबान के खिलाफ 'नारी शक्ति'
अफगानिस्तान की व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और दो बार युद्ध पीड़ित निलोफर बायत ने लड़कियों की पढ़ाई को बैन करने को लेकर कहा कि, अगला कदम यह होगा कि महिलाओं को सांस लेने की भी इजाजत नहीं दी जाएगी या फिर उन्हें समाज में रहने की अनुमति नहीं होगी। भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गये एक इंटरव्यू में निलोफर ने तालिबान को जमकर फटकार लगाई है और कहा कि, ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है, कि तालिबान ने महिलाओं से विश्वविद्यालय जाने की आजादी छीन ली है। आपको बता दें कि, निलोफर बायत दो बार की युद्ध पीड़ित हैं और उन्होंने तालिबान के दोबारा अफगानिस्तान के सत्ता में आने के बाद देश छोड़ दिया था।

लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई है बंद
पिछले साल 15 अगस्त को तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में दोबारा लौट आया था, जब अमेरिका की सेना ने युद्धग्रस्त देश को छोड़ दिया। तालिबान के सत्ता में वापसी के साथ ही लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। वहीं, निलोफर बायत ने कहा कि,"दुर्भाग्य से, तालिबान ने कहा कि महिलाओं को विश्वविद्यालयों में जाने की अनुमति नहीं है, और हमने देखा कि लड़कियां विश्वविद्यालयों में प्रवेश नहीं कर सकतीं। लगभग डेढ़ साल से लड़कियों के लिए स्कूल बंद हैं और अब विश्वविद्यालयों का समय आ गया है और लड़कियों को विश्वविद्यालयों में जाने की अनुमति नहीं है। यह एक आपदा है। मुझे लगता है कि इस तरह के प्रतिबंधों के साथ, हम देख रहे हैं, कि वे महिलाओं को लेकर प्रतिबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं, महिलाओं के सारे अधिकारी छीने जा रहे हैं और अब अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए उनकी अगली योजना उनके सांस पर प्रतिबंध लगाने की होगी, या फिर उन्हें समाज में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी"। उन्होंने कहा कि, "वो हर दिन नए नियम बनाते जा रहे हैं और अफगानिस्तान में प्रतिबंधों की वजह से महिलाएं अब समाज का हिस्सा नहीं हैं।"

विश्वविद्यालय जाने पर लगी रोक
इससे पहले मंगलवार को अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने महिलाओं के लिए राष्ट्रव्यापी विश्वविद्यालय जाने पर प्रतिबंध लगा दिया और मानवाधिकारों पर हुए एक और हमले को लेकर कई देशों ने तालिबान की निंदा की है। पिछले साल सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद एक नरम नियम का वादा करने के बावजूद, तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय आक्रोश को नज़रअंदाज़ करते हुए महिलाओं के जीवन के सभी पहलुओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। एएनआई से बात करते हुए निलोफर बायत ने कहा कि, "हम सभी जानते हैं, कि तालिबान कभी नहीं बदलेगा। दुनिया भर में, लोग समझते हैं कि वे नहीं बदलेंगे। वे वही आतंकवादी हैं, जो 25 साल पहले थे। जब वे पहली बार अफगानिस्तान पर जम गये थे और उन्होंने विशाल देश को नष्ट कर दिया और हजारों लोगों को मार डाला"। उन्होंने कहा कि, "तालिबान के आने पर मैंने अफगानिस्तान छोड़ दिया, क्योंकि अफगानिस्तान में मेरी आवाज की वजह से मुझे खतरा था"।

निलोफर के घर पर हुआ था हमला
निलोफर बायत ने तालिबान के खिलाफ काफी आक्रामक भाषण दिए हैं और एक बार फिर से उन्होंने कहा कि, "बेशक, एक महिला के रूप में, मैं अफगानिस्तान में असुरक्षित थी। मैंने तालिबान के आने के बाद अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला किया। एक साल हो गया है, जब मैं बिना घर के रह रही हूं। मैंने सब कुछ पीछे छोड़ दिया और अपनी जान बचाई।" आपको बता दें कि, 1990 के दशक में जब तालिबान ने पहली बार अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और देश में युद्ध चल रहा था, उस वक्त निलोफर के घर पर भी एक रॉकेट गिरा था। उस वक्त निलोफर सिर्फ 2 साल की थी और हमले में उनके भाई की मौत हो गई थी, जबकि पिता बुरी तरह से घायल हो गये थे। उनके पिता ने एक पैर खो दिया था। इस घटना ने निलोफर का जीवन बदल दिया। वहीं, तालिबान ने अफगान बास्केटबॉल खिलाड़ियों पर भी नकेल कसना शुरू कर दिया। सालों के बाद निलोफर ने एक बार फिर से बास्केटबॉल खेलना शुरू किया और व्हीलचेयर बास्केटबॉल में अफगानिस्तान का नेतृत्व किया। तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद निलोफर को एक बार फिर से अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और वो अब स्पेन में रह रही हैं।

'तालिबान ने कर दिया मेरा जीवन बर्बाद'
निलोफर बायत ने कहा कि, "मैं तालिबान द्वारा दो बार हमले का शिकार हुई हूं। उन्होंने मेरा जीवन नष्ट कर दिया और मेरी सारी उपलब्धियां छीन लीं। जीने के लिए, अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए, दुनिया भर के अन्य लोगों की तरह, एक सामान्य व्यक्ति के रूप में काम करने के लिए उन्होंने अफगान लोगों को जीने नहीं दिया"। उन्होंने कहा कि, "सब कुछ अचानक हुआ, और तालिबान ने वह सब कुछ ले लिया, जो मेरे पास था। मैं अफगानिस्तान में अपने प्रियजनों को अलविदा भी नहीं कह सकती थी। मैंने सब कुछ पीछे छोड़ दिया, जो मैंने जीवन भर काम किया था। हम एक साल से ज्यादा समय से दर्द झेल रहे हैं और हम आतंकवादियों के एक समूह से लड़ रहे हैं जो अफगानिस्तान में अन्य देशों के फैसले के कारण आए थे। एक साल हो गया है, और हम इसकी कीमत चुका रहे हैं । दुर्भाग्य से, यह मेरे बारे में नहीं है। यह अफगानिस्तान में 34 मिलियन लोगों के जीवन के बारे में है।"












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