पहली बार इंसानों के मल से बनी दवा हुई तैयार, जानें किस बीमारी में होगी कारगर, अमेरिका ने दी मंजूरी

सी डिफिसाइल का संक्रमण होने पर रोगी को हर दिन में कई बार पतले दस्त हो सकते हैं और कभी-कभी मल में खून भी आ सकता है। इसके साथ ही घातक संक्रमण होने पर पेट में दर्द और बुखार हो सकता है।

drug made from human feces

अमेरिका में इंसानों के मल से बनी एक दवा को मंजूरी मिली है। ये दवा आंतों में मौजूद खतरनाक इंफेक्शन से लड़ने में मददगार साबित होगी। इस दवा को सेरीज थेराप्युटिक्स नामक कंपनी ने तैयार किया है। अमेरिकी दवा नियामक अधिकारियों ने इस दवा को मंजूरी भी दे दी है।

यह दवा कैप्सूल के फॉर्म में आएगी। यह सी. डिफिसाइल या क्लस्ट्रिडियम से होने वाले पेट के संक्रमण में असरदार साबित होगी। हमारे पेट में अच्छे और बुरे कई प्रकार के जीवाणु होते हैं। सी. डिफिसाइल एक बुरा जीवाणु है जो अच्छे बैक्टीरियों को मारकर अपनी संख्या बढ़ाता है।

आंत में इस सी. डिफिसाइल की अधिकता होने पर मनुष्य को दस्त की समस्या शुरू हो जाती है और कभी-कभी मल में खून भी आने लगता है। कई बार इसका संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है। सिर्फ अमेरिका में इससे हर साल हजारों लोग मारे जाते हैं।

आमतौर पर सी. डिफिसाइल को एंटिबायोटिक्स से खत्म किया जा सकता है लेकिन इससे शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया भी मारे जाते हैं। अच्छे बैक्टीरिया की कमी होते ही सी. डिफिसाइल फिर से अपनी जगह बनाने लगता है। ऐसे में कई बार एंटीबायोटिक्स से इसका सफल इलाज नहीं हो पाता।

मल से बनी ये नई दवा ऐसे मरीजों को दी जाएगी जिन्हें एंटिबायोटिक का कोर्स मिल चुका है और इंफेक्शन खत्म नहीं हो रहा। एक दशक पहले डॉक्टरों ने विषम परिस्थिति में ये प्रयोग शुरू किया था जब एक व्यक्ति की जान खतरे में थे। डॉक्टरों ने एक स्वस्थ रिश्तेदार का मल उस बीमार व्यक्ति की आंतों में डालकर उसका सफल इलाज किया।

उसी इलाज को दवा कंपनी ने परिष्कृत कर सरल बनाया है। एफडीए ने पिछले साल एक अन्य कंपनी फेरिंग फार्मा के ऐसे ही इलाज को मान्यता दी थी। दोनों में अंतर ये है कि फेरिंग फार्मा की दवा गुदाद्वार से मनुष्य के भीतर प्रविष्ट कराई जाती है जबकि नई दवा सेरीज थेराप्युटिक्स कैप्सूल रूप में मुंह से ली जाएगी।

इस दवा को वाउस्ट नाम से बेचा जाएगा और इसका कोर्स तीन दिन तक चलेगा जिसमें चार कैप्सुल रोज लेने होंगे। इसे बनाने के लिए सबसे पहले स्वस्थ मनुष्य के शरीर से मानव मल लिया जाता है। इसके बाद उनके मल को फ्रीज किया जाता है और संक्रमणों, वायरसों व पैरासाइट की जांच की जाती है।

उसके बाद कंपनी इन नमूनों को शुद्ध करके इनमें से स्वस्थ बैक्टीरिया को अलग कर लेती है और अन्य जीवाणुओं को खत्म कर दिया जाता है। मानव मल के एक नमूने से हजारों कैप्सुल बनाए जा सकते हैं।

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