जानिए तोरन गेट से जुड़ी कुछ खास बातें, जिसका अनावरण पीएम मोदी ने किया
कुआलालंपुर। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तोराना गेट का उद्घाटन किया है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में ब्रिकफील्ड्स वह इलाका है जिसे 'लिटिल इंडिया,' के नाम से जाना जाता है।

कोई भी भारतीय जब कुआलालंपुर आता है तो इस इलाके में घूमने जरूर आता है।यहां पर श्री कंदास्वामी का मंदिर है तो तमिलों के आराध्य हैं और साथ ही साथ बौद्धधर्म के लोगों के लिए महाविहार नामक जगह भी है।
दोस्ती की नई शुरुआत
इस जगह पर बसे श्रीलंका के बौद्ध धर्म अनुयायी भारतीय रेस्टोरेंट में खाना खाते हुए देखे जा सकते हैं। वे उन किराना दुकानों पर जाते हैं जो भारतीयों से जुड़ी हुई हैं।
पीएम मोदी ने मलेशिया के पीएम नजीब रज्जाक के साथ मिलकर इसका उद्घाटन किया है। इस गेट को भारत और मलेशिया की दोस्ती का नया पड़ाव बताया जा रहा है।
आइए आपको इसी तोराना गेट के से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताते हैं।
- ब्रिकफिल्ड में तोराना गेट एक नया लैंडमार्क है।
- तोराना गेट को सांची स्थित बौद्ध स्तूपों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है।
- इस गेट परभारतीय पुरातन कला का अद्भुत नमूना देखने को मिलता है।
- साथ ही साथ इस्लाम से जुड़ी कला को बखूबी नक्काशी के साथ दिखाने की कोशिश की गई है।
- गेट के मुख्य डिजायनर क्षितिज जैन ने बताया कि तोरन को मौर्य शासक अशोक ने बनावाया था।
- पहली सदी में बनवाए गए तोरन बौद्ध धर्म की पहचान बन गए थे।
- एक बोधी वृक्ष है, कमल के फूल और जटाकास की कहानियों और दूसर आकृतियों को उभारा गया है।
- 10 मीटर लंबा यह गेट भारत की ओर से मलेशिया को दिया गया गिफ्ट है।
- इसकी लागत मलेशियन मुद्रा में 35 मिलियन है।
- तोरन गेट प्रोजेक्ट को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने शुरू किया था।
- इस गेट को वर्ष 2010 में पूरा हो जाना था लेकिन इसमें देर हो गई।












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