फ़ेसबुक अमेज़न वर्षा वन की ग़ैर-क़ानूनी बिक्री पर कार्रवाई करेगा
फ़ेसबुक ने कहा है कि वो अमेज़न के जंगलों के अंतर्गत आने वाले संरक्षित इलाक़ों की ग़ैरक़ानूनी बिक्री रोकने के लिए क़दम उठाएगा.
बीबीसी की एक पड़ताल के बाद फ़ेसबुक ने अपनी पॉलिसी में बदलाव की घोषणा की है.
नए नियम सिर्फ़ संरक्षित इलाक़ों पर लागू होंगे, सार्वजनिक जंगलों पर नहीं है. और ये नियम सिर्फ़ अमेज़न के जंगलों के लिए हैं. दुनिया के दूसरे इलाक़ों के वर्षा वनों और वन्यजीवों के इलाक़ों के लिए नहीं.
आईपैम नाम के संगठन की एक हालिया स्टडी के मुताबिक़ अमेज़न के जंगल की कटाई का एक तिहाई हिस्सा सार्वजनिक जंगलों में होता है.
फ़ेसबुक ने ये नहीं बताया कि ग़ैरकानूनी विज्ञापनों पर रोक लगाने का उसके पास क्या प्लान है लेकिन कहा कि वो अमेज़न के जंगलों के संरक्षित इलाक़ों की "नई लिस्टिंग की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करेगा."
गैरक़ानूनी तरीक़े से जंगलों की कटाई
फ़रवरी में बीबीसी की आवर वर्ल्ड डॉक्युमेंट्री "सेलिंग द अमेज़न" में ये पता चला था कि जंगलों में एक हज़ार फु़टबॉल मैदान जितने बड़े इलाक़े फ़ेसबुक की क्लासिफाइड एड सर्विस पर मौजूद थे.
इनमें से कई संरक्षित इलाक़ों में थे, जिनमें सार्वजनिक जंगल और आदिवासियों के लिए संरक्षित इलाक़े भी शामिल थे. ये साबित करने के लिए कि विज्ञापन सही हैं, बीबीसी ने एक अंडरकवर व्यक्ति और चार विक्रेताओं के बीच मीटिंग करवाई. अंडरकवर व्यक्ति ने ख़ुद को पैसे वाले निवेशक का वकील बताकर पेश किया था.
आलविम सौज़ा एल्वेस नाम के व्यक्ति ने ऊरू इयू वाउ वाउ, जो कि ट्राइब्स इलाक़ा है, वहाँ ज़मीन बेचने की कोशिश की थी.
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बीबीसी की इन्वेस्टिगेशन के बाद ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट ने अमेज़न के संरक्षित इलाक़ों की फ़ेसबुक पर बिक्री के मामले में जाँच के आदेश दिए.
स्थानीय नेताओं के कड़े क़दम उठाने के मांग के बाद उस समय फ़ेसबुक ने कहा था कि वो "स्थानीय अधिकारियों के साथ काम करने के लिए तैयार है" लेकिन व्यापार को रोकने के लिए स्वतंत्र तौर पर क़दम नहीं उठाएगा.
अब कंपनी ने कहा है कि उसने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और दूसरी संस्थाओं से सलाह लेकर इस मुद्दे पर "पहला क़दम" उठाया है.
फ़ेसबुक ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय संगठनों के डेटाबेस की मदद से फ़ेसबुक मार्केटप्लेस पर लिस्टिंग की जांच करेंगे और उन जगहों को चिह्नित करेंगे जो नई पॉलिसी का उल्लंघन करते हैं."
फ़ेसबुक को पिछले हफ़्ते काफ़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था जब कुछ तकनीकी ख़राबी के कारण दुनियाभर में पाँच घंटे तक यह प्लेटफ़ॉर्म बंद रहा था. फ़ेसबुक के दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम भी इस दौरान काम नहीं कर रहे थे.
क्या इससे फ़ायदा होगा?
गुनाहगारों को पकड़ने के लिए फ़ेसबुक संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रोग्राम (यूएनईपी) के वर्ल्ड कन्सर्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर के डेटा का इस्तेमाल करेगा. यूएनईपी के मुताबिक़ ये अपनी तरह का सबसे "व्यापक" डेटा है और "कई सरकारों और दूसरी संस्थाओं" की मदद से हर महीने अपडेट किया जाता है.
लेकिन ब्राज़ील के वकील और वैज्ञानिक ब्रेंडा ब्रिटो फ़ेसबुक के इस प्रपोज़ल पर सवाल उठा रही हैं. उनके मुताबिक, "जब तक विक्रेताओं के लिए बिक्री वाले इलाक़े की लोकेशन डालना अनिवार्य नहीं किया जाएगा, उन्हें ब्लॉक करने की कोशिश सफल नहीं होंगी."
वो कहती हैं, "उनके पास दुनिया का सबसे अच्छा डेटाबेस होगा, लेकिन जब तक जिओ- लोकेशन की जानकारी नहीं होगी, काम नहीं हो पाएगा."
बीबीसी ने अपनी जाँच में पाया था कि कई विज्ञापनों में सैटेलाइट तस्वीरें और जीपीएस लोकेशन थी लेकिन सभी में इस तरह की जानकारियाँ नहीं दी गईं थीं.
फ़ेसबुक ने बीबीसी को बताया कि वो विक्रेताओं की सटीक लोकेशन की जानकारी नहीं मांगता.
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमें पता है कि इस मुद्दे का 'जादुई हल' नहीं है लेकिन हम लोगों को अपनी जाँच को धोखा नहीं देने देंगे. "
अमेज़न वर्षा वन पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया समेत सात देशों में 75 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है.
इसका 60 प्रतिशत हिस्सा ब्राज़ील में हैं. वहाँ जंगल की कटाई दर पिछले 12 सालों में सबसे अधिक है. ब्राज़ील सरकार का डेटाबेस फ़ेसबुक की इस कोशिश में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
ब्रेंडा ब्रिटो कहती हैं, "ये डेटा 2016 से मौजूद है. मौजूद जानकारी से इस क़दम में मदद मिल सकती है."
ब्राज़ील में जंगलों की बढ़ती कटाई और संरक्षण से जुड़े क़ानूनों को लगातार कमज़ोर करने की कोशिश के बीच ब्राज़ील के पर्यावरण कार्यकर्ता फ़ेसबुक के इस एलान को एक छोटी जीत की तरह देख रहे हैं.
बीबीसी के खुलासे के बाद फ़ेसबुक पर कदम उठाने की ज़ोरदार मांग करने वाले कैंडिड एनजीओ की इवानेड बैंड्रिया कहती हैं कि वो ख़ुश हैं.
उनके मुताबिक़, "ये एक अच्छा एलान है. हालांकि इसमें थोड़ी देरी हुई है, क्योंकि उन्हें कभी ऐसे विज्ञापनों को जगह ही नहीं देनी चाहिए थी."
"लेकिन ये अच्छी बात है कि अब वो कदम उठा रहे हैं क्योंकि इससे इन इलाक़ों को बचाने में मदद मिलेगी और संरक्षित इलाक़ों या आदिवासियों के इलाक़ों की बिक्री का प्रचार रुकेगा."
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