यूरोप से OUT होते ही इस हथियार कंपनी के भविष्य पर खतरा.. क्या भारत फाइटर जेट खरीदकर देगा जीवनदान?
Defence News: चेक रिपब्लिक के साथ एक आकर्षक फाइटर जेट कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने का SAAB का सपना 'आधिकारिक तौर पर' दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। यह डेवलपमेंट 29 जनवरी 2024 को सामने आया है, जब चेक सरकार ने लॉकहीड मार्टिन एफ-35 लाइटनिंग II विमान खरीदने की अपनी प्रतिबद्धता जता दी है।
यानि, चेक गणराज्य ने F-35 लाइटनिंग II कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। चेक सरकार ने 24 F-35A लड़ाकू जेट खरीदने के लिए एक प्रस्ताव और लेटर ऑफ इंटेंट (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इस समझौते के साथ ही चेक गणराज्य, एफ-35 फाइटर जेट खरीदने वाले देशों में शामिल होने वाला 18वां देश बन गया। आपको बता दें, कि इस महत्वपूर्ण फैसले के बीज सितंबर 2023 में बोए गए थे, जब चेक रिपब्लिक सरकार ने अनुमानित 6.5 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुबंध को हरी झंडी दे दी थी। इस समझौते में अत्याधुनिक विमान और उसकी ट्रेनिंग, विमान में लगने वाले गोला-बारूद, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और सेवा और रसद सहायता के प्रावधान शामिल थे।
चेक वायु सेना 2031 में F-35A विमान का अपना प्रारंभिक बैच प्राप्त करने के लिए तैयार है। यह बैच लेटेस्ट एडवांस ब्लॉक 4 कॉन्फ़िगरेशन खरीदने की कोशिश करेगा, जो एक अतिरिक्त सामरिक स्क्वाड्रन के साथ चेक सेना के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगा।
हालांकि, अमेरिका और चेक अधिकारियों द्वारा अंतरसंचालनीयता बढ़ाने और समसामयिक और भविष्य के खतरों का मुकाबला करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सराहना की गई, लेकिन यह फैसला, SAAB के लिए एक बड़ा झटका है।
SAAB एक स्वीडिश हथियार कंपनी है, जो लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक मौके गंवा रहाी है, जिससे उसकी ग्लोबल प्रजेंस खतरे में पड़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ सालों में अमेरिकी एफ-35 और फ्रांसीसी राफेल ने बड़े स्तर पर कब्जा किया है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चेक रिपब्लिक अभी स्वीडन से 14 जेएएस-39 ग्रिपेन फाइटर जेट लीज पर इस्तेमाल कर रही है, जिसे SAAB ने बनाया है, लेकिन एफ-35 डील का मकसद, स्वीडिश फाइटर जेट को बदलना है।
स्वीडन ने फाइटर जेट की बिक्री के लिए चेक रिपब्लिक को बेहतरीन डील ऑफर किया था, जिसमें अभी तक लीज पर लिए गये फाइटर जेट्स को फ्री में सौंपने का भी प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन चेक रिपब्लिक ने इस ऑफर को भी खारिज कर दिया और अमेरिका के एफ-35 फाइटर जेट के साथ ही आगे बढ़ने का फैसला किया है।
लॉकहीड मार्टिन के डिप्टी प्रेसिडेंट एफ-35 प्रोग्राम के महाप्रबंधक ने चेक रिपब्लिक के साथ हुई इस डील की पुष्टि कर दी है। आपको बता दें, कि एफ-35 पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट है, जिसे 21वीं सदी की लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक स्टील्थ फाइटर जेट है।

SAAB का 10 सालों में एक भी सौदा नहीं
स्वीडिश विमान निर्माता कंपनी SAAB को वैश्विक बाजार में लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है और वह पिछले एक दशक में अपने विमानों के लिए एक भी खरीदार हासिल करने में नाकाम रही है।
ग्रिपेन फाइटर को आखिरी बार खरीददार 2014 में मिला था, जब ब्राजील ने 36 स्वीडिश निर्मित लड़ाकू विमानों के लिए 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा किया था। हंगरी, चेक गणराज्य, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड में ग्रिपेन के निर्यात में पिछली नाकामयाबियों के बाद, यह साब के लिए एक विदेशी प्रतियोगिता में आखिरी कामयाबी थी।
पिछले 10 सालों में SAAB ने करीब 400 से 450 विमानों का निर्माण किया है, जिसमें सिंगल और डबल इंजन विमान शामिल हैं, लेकिन ये सभी विमान कंपनी में ही पड़े हुए हैं।
1990 के दशक के उत्तरार्ध में दक्षिण अफ्रीका ने विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मामूली संशोधनों के साथ 26 ग्रिपेंस (सी/डी मानक) के लिए बीएई/साब के साथ समझौता किया था।
इसके बाद, हंगरी ने नवंबर 2001 में स्वीडन से 12 JAS 39A सिंगल-सीटर और दो JAS 39B टू-सीटर पट्टे पर लेने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।
जून 2004 में, चेक गणराज्य ने ग्रिपेन इंटरनेशनल के अनुकूल वित्तपोषण और ऑफसेट कार्यक्रम से प्रभावित होकर, नाटो मानकों के अनुपालन के लिए अनुकूलित 14 ग्रिपेन्स लीज पर लेने की घोषणा की थी।
थाईलैंड ने फरवरी 2008 में छह ग्रिपेन (दो सिंगल-सीट सी-मॉडल और चार दो-सीट डी-मॉडल) का ऑर्डर दिया था और नवंबर 2010 में छह ग्रिपेन सी के अतिरिक्त ऑर्डर के साथ आगे बढ़ा था।
लेकिन, 2014 के बाद, साब की किस्मत ने उससे मुंह मोड़ लिया और उसे एक के बाद एक कॉन्ट्रैक्ट में नाकामी हाथ लगने लगी। ये निराशा 2022 में चरम पर थी, जब साब के प्रेसिडेंट और सीईओ, मिकेल जोहानसन ने ग्रिपेन फाइटर जेट के लिए निर्यात सफलता की लगातार कमी पर निराशा व्यक्त की थी।
एडवांस ग्रिपेन-ई विमान को लागत प्रभावी कीमत पर बाजार में लाने के साब के प्रयास फेल साबित हुए हैं। अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एफ-35 लाइटनिंग II का आकर्षण, जिसने धीरे-धीरे यूरोप में प्रभुत्व स्थापित किया, उसने साब को काफी नुकसान पहुंचाया है।
ग्रिपेन को हुए नुकसान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि फिनलैंड, स्विट्ज़रलैंड, कनाडा और चेक गणराज्य ने लड़ाकू जेट के अपने पुराने बेड़े को बदलने के लिए साब ग्रिपेन की जगह पर F-35 को सलेक्ट किया है।
जिसके बाद अब, अपने ग्रिपेन फाइटर के लिए खरीदारों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के लिए, स्वीडन भारत, थाईलैंड और फिलीपींस के साथ संभावित अनुबंधों पर अपनी उम्मीदें लगा रहा है।
क्या भारत देगा ग्रिपेन को जीवनदान?
SAAB ने भारतीय वायु सेना की बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नवीनतम संस्करण 114 ग्रिपेन-ई विमान की बिक्री का प्रस्ताव दिया है। साब ने कहा है, कि ग्रिपेन-ई भारत की सुरक्षा जरूरतों को व्यापक रूप से संबोधित करने के लिए तैयार है।
हालांकि, साब को भारत में गंभीर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, राफेल लड़ाकू विमान को वर्तमान में भारतीय वायु सेना के लिए शीर्ष पसंद माना जाता है।
दूसरी तरफ, थाईलैंड के पास 2011 में इसके अधिग्रहण के बाद से पहले से ही 12 ग्रिपेन सी/डी लड़ाकू विमान हैं। थाईलैंड ने पहले अमेरिका से एफ-35 फाइटर जेट खरीदने की काफी कोशिशें की थी, लेकिन नाकामी हाथ लगने के बाद अब बैंकॉक के पास अपने ग्रिपेन विमान बेड़े का विस्तार करने का ही विकल्प बचा है।
अमेरिका ने यह कहकर एफ-35 बेचने से इनकार कर दिया, कि थाईलैंड में एयरबेस सुरक्षा, रखरखाव और प्रशिक्षित पायलटों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे, सुरक्षा आश्वासन और परिचालन क्षमताओं का अभाव है। जिससे ग्रिपेन को अब थाईलैंड से कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है।
इसके अलावा, स्वीडन को फिलीपींस से खुशखबरी मिल सकती है, क्योंकि हालिया घटनाक्रम ने साब को ग्रिपेन लड़ाकू विमान का सौदा हासिल करने के करीब ला दिया है। फिलीपींस और स्वीडन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना, मनीला की मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमआरसीए) की खोज में प्रगति का संकेत देता है।
हालांकि, यहां भी ग्रिपेन का मुकाबला अमेरिकी एफ-35 से है, लेकिन चूंकी ग्रिपेन की कीमत कम है, लिहाजा यहां पर मनीला ग्रिपेन के साथ जाने का विकल्प चुन सकता है।
बहरहाल, जैसा कि साब रणनीतिक रूप से इन महत्वपूर्ण बाजारों में खुद को स्थापित कर रहा है, भारत, थाईलैंड और फिलीपींस के नतीजे यह निर्धारित करेंगे, कि क्या ग्रिपेन अपनी चुनौतियों पर काबू पा सकता है और खुद को वैश्विक लड़ाकू विमान क्षेत्र में एक मांग वाले दावेदार के रूप में फिर से स्थापित कर सकता है।
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