भीषण गर्मी से शहरों के ऊपर जानलेवा खतरा, शहरीकरण पर वैज्ञानिकों ने बजाया खतरे का अलार्म

अत्यधिक गर्मी की वजह से दुनिया के शहरों पर भारी खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च के आधार पर चेतावनी जारी की है।

नई दिल्ली, अक्टूबर 05: पिछले कुछ सालों से इंसानों पर सूरज का टॉर्चर बढ़ता जा रहा है और इस बार तो स्थिति ये थी कि जिस अमेरिका में कभी गर्मी नहीं पड़ती थी, वहां लू की वजह से 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। वहीं कनाडा में समुद्र का पानी इतना ज्यादा गर्म हो गया था कि समुद्र में रहने वाले करोड़ो छोटे-छोटे समुद्री जीवों की मौत हो गई। लेकिन वैज्ञानिकों ने इससे कहीं बढ़कर खतरनाक चेतावनी और भविष्यवाणी जारी की है, जो इंसानों के लिए बहुत बड़े खतरे की तरफ इशारे करता है।

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    शहरों पर बढ़ती गर्मी से मंडरा रहा जानलेवा खतरा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी | वनइंडिया हिंदी
    खतरे की बजी तेज घंटी

    खतरे की बजी तेज घंटी

    सोमवार को वैश्विक गर्मी को लेकर एक रिपोर्ट जारी गई है, जिसमें वैज्ञानिकों ने तेजी से बदलते मौसम को लेकर बहुत गहरा विश्लेषण किया है। इस स्टडी में वैज्ञानिकों को पता चला है कि जनसंख्या वृद्धि और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से शहरों का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वक्त में तापमान में काफी तेजी से और इजाफा होने वाला है, जिसकी वजह से लोग काफी तेजी से बीमार पड़ेंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब लोगों को शहरों की तरफ जाने से बचना चाहिए।

    एक चौथाई दुनिया प्रभावित

    एक चौथाई दुनिया प्रभावित

    "प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज" में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में तापमान में होने वाली वृद्धि से पूरे विश्व की लगभग एक चौथाई आबादी प्रभावित हो रही है। हाल के दशकों में, करोड़ों लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में चले गए हैं, जहां आमतौर पर डामर जैसी सतहों के कारण तापमान अधिक होता है, और वो गर्मी में फंस जाते हैं, जहां हरियाली की काफी कमी होती है, पेड़-पौधों की भारी कमी होती है और शहरों में सिर्फ कंक्रीट होते हैं, लिहाजा शहरों में गर्मी अब प्रचंड स्तर पर पड़ने लगी है। आपको बता दें कि, वैज्ञानिकों ने 1983 से 2016 तक 13,000 से ज्याजा शहरों में अधिकतम दैनिक गर्मी और आर्द्रता का अध्ययन किया है और उसके आधार पर वैज्ञानिकों ने सनसनीखेज रिपोर्ट तैयार की है।

    शहरों में बढ़ रहे हैं तापमान

    शहरों में बढ़ रहे हैं तापमान

    वैज्ञानिकों ने दुनिया में बढ़ती गर्मी और ग्लोबल तापमान को मापने लिए "वेट-बल्ब ग्लोब तापमान" पैमाने का उपयोग किया है। ये एक ऐसा उपाय है, जो गर्मी और आर्द्रता को ध्यान में रखता है, उन्होंने अत्यधिक गर्मी को 30 डिग्री सेल्सियस (86 डिग्री फ़ारेनहाइट) के रूप में परिभाषित किया है। शोधकर्ताओं ने फिर उसी 33 साल की अवधि में शहरों की आबादी के आंकड़ों के साथ मौसम के आंकड़ों की तुलना की। वैज्ञानिकों ने इसकी गणना इस आधार पर की, कि हर साल शहरों का तापमान कितना बढ़ रहा है और उस शहर में हर साल कितने लोग बढ़ रहे हैं, इस गणना को 'व्यक्ति दिन' कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि, शहरवासियों को उजागर करने वाले 'व्यक्ति-दिनों' की संख्या 1983 में प्रति वर्ष 40 बिलियन से बढ़कर 2016 में 119 बिलियन हो गई है।

    शहरों में बढ़ रहे हैं मृत्यु दर

    शहरों में बढ़ रहे हैं मृत्यु दर

    इस रिसर्च के प्रमुख लेकर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अर्थ इंस्टीट्यूट में पढ़ाने वाले वैज्ञानिक, कैस्केड तुहोल्स्के ने कहा कि शहरों में होने वाले तापमान में वृद्धि शहरों में लोगों की बीमारी और मृत्युदर को बढ़ा रही है। उन्होंने एक बयान में कहा कि, "यह लोगों की काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है, और इसके परिणामस्वरूप कम आर्थिक उत्पादन होता है। यह पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा देता है।" उन्होंने लिखा है कि, जनसंख्या वृद्धि में दो-तिहाई 'एक्सपोजर स्पाइक' का योगदान था, जबकि, वास्तविक वार्मिंग तापमान में एक तिहाई योगदान था, हालांकि ये अनुपात अलग अलग शहर में अलग-अलग था।

    ढाका सबसे प्रभावित शहर

    ढाका सबसे प्रभावित शहर

    रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने अपनी गणना में पता लगाया है कि पूरी दुनिया में बांग्लादेश की राजधानी ढाका गर्मी से प्रभावित होने वाला सबसे प्रमुख शहर है और 1983 से 2016 की अवधि में ढाका में 575 मिलियन 'व्यक्ति-दिन' की अत्यधिक गर्मी की वृद्धि देखी गई। यह काफी हद तक इसकी आबादी के कारण है। 1983 में ढाका शहर की आबादी लगभग 40 लाख थी, जो 2016 में बढ़कर 2 करोड़ 20 लाख हो चुकी थी। इसी तरह के रुझान दिखाने वाले अन्य बड़े शहर शंघाई, ग्वांगझू, यांगून, दुबई, हनोई और खार्तूम के साथ-साथ पाकिस्तान, भारत और अरब प्रायद्वीप के विभिन्न शहर थे।

    सबसे जोखिम वाले शहर!

    सबसे जोखिम वाले शहर!

    गर्म जलवायु के कारण कई शहरों को जोखिम भरा शहर कहा गया है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम बगदाद, काहिरा, कुवैत शहर, लागोस, कोलकाता और मुंबई शामिल हैं। रिसर्चर्स ने कहा कि, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में उन्हें जो पैटर्न मिले, वे "शहरीकरण से जुड़े आर्थिक लाभ को महसूस करने की शहरी गरीबों की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से सीमित कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि नकारात्मक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए "पर्याप्त निवेश, मानवीय हस्तक्षेप और सरकारी समर्थन" की आवश्यकता होगी। संयुक्त राज्य अमेरिका में, कुछ चालीस प्रमुख शहरों ने मुख्य रूप से टेक्सास, लुइसियाना, मिसिसिपी, अलबामा और फ्लोरिडा के खाड़ी तट राज्यों में एक्सपोजर "तेजी से" बढ़ता देखा गया है।

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