S Jaishankar: श्रीलंका दौरे पर जाएंगे विदेश मंत्री जयशंकर, रानिल विक्रमसिंघे बोले- अब भारत से बची है आस
विक्रमसिंघे ने बीते शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के विदेश मंत्री अगले सप्ताह कोलंबो दौरे पर पहुंच रहे हैं। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस सप्ताह आर्थिक संकट से जूझ रहे देश श्रीलंका का दौरा कर सकते हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने इसकी पुष्टि की है। विक्रमसिंघे ने बीते शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के विदेश मंत्री अगले सप्ताह कोलंबो दौरे पर पहुंच रहे हैं। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका अपने सबसे खराब वित्तीय संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है।
19 जनवरी को कोलंबो जाएंगे जयशंकर
शनिवार को ट्रेड यूनियनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा, "भारत के विदेश मंत्री अगले सप्ताह श्रीलंका पहुंचेंगे। वे संभवतः 19 जनवरी को कोलंबो आ सकते हैं। हम उनके साथ ऋण पुनर्गठन पर चर्चा करेंगे।" इसके साथ ही श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार ने जापान के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता पूरी कर ली है और इस महीने भारत के साथ ऐसी बैठक करेगी।
IMF से श्रीलंका को मिलेंगे 2.5 बिलियन डॉलर
राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका को IMF से 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त होंगे। उसके बाद श्रीलंका विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक से लगभग 5 बिलियन डॉलर प्राप्त कर सकता है। यह कुल कुल 7.5 बिलियन अमरीकी डॉलर होगा। इसके साथ ही श्रीलंका अपने प्रमुख लेनदारों- चीन, जापान और भारत से वित्तीय आश्वासन प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। इससे सरकार की सरकारी एजेंसियां 10 बिलियन अमरीकी डॉलर तक जोड़ सकती हैं, जो अर्थव्यवस्था को ठीक करने और देश को इस पीड़ा से बाहर निकालने में सक्षम बनाएगी। वित्त मंत्रालय का भी प्रभार रखने वाले राष्ट्रपति ने कहा कि चीन के एक्ज़िम बैंक के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता हाल ही में हुई थी और आगे की बातचीत जारी है।
विक्रमसिंघे ने यह भी कहा कि वह व्यवसायों की रक्षा के लिए ऋण अधिस्थगन की संभावना पर गौर करेंगे और व्यवसायिक कर्मियों को आवश्यक राहत प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा था कि सेंट्रल बैंक के गवर्नर को बैंकों की सुरक्षा करते हुए इस मामले को देखने के लिए सूचित किया गया था। उन्होंने कहा कि यही सबसे कठिन काम है जो हमें करना है। हम हमेशा ऐसे नहीं रह सकते। भले ही हम कठिनाइयों के साथ जीते हों, हमें जल्दी से आगे बढ़ना चाहिए। वर्तमान मुद्रास्फीति एक ऐसी समस्या है जिसका हर व्यवसाय को सामना करना पड़ता है। अगर हम इन फैसलों को जारी रखते हैं, हम मुद्रास्फीति को कम कर सकते हैं। बैंक ब्याज कम किया जा सकता है।
भारत ने श्रीलंका की मदद की
एक ज़रूरतमंद पड़ोसी को आर्थिक संकट से बचाने के लिए भारत ने पिछले साल कोलंबो को लगभग 4 बिलियन अमरीकी डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी। इसके साथ ही भारत ने जनवरी में श्रीलंका को 900 मिलियन अमरीकी डॉलर का ऋण देने की घोषणा की। भारत ने श्रीलंका को हाल ही में सार्वजनिक यातायात ढांचे को मजबूत करने के लिए 75 यात्री बसें भी प्रदान की हैं। भारत ने 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने के बाद सबसे खराब आर्थिक और मानवीय संकट से उबरने के लिए भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत श्रीलंका को यह सहायता दी थी।












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