भारत के दोस्त देश ने सैन्य खर्चा बढ़ाया, लेकिन LCA Tejas, LCH Prachand डील को लटकाया, क्यों लगते हैं झटके?
India-Nigeria Military Deal: भारत ,अफ्रीका के रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है, जिसमें नाइजीरिया भारत के लिए रणनीति का केंद्र बिंदु है।
उप-सहारा अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नाइजीरिया ने 2023 में 2022 के मुकाबले अपने सैन्य खर्च में 20% की वृद्धि की और अपने रक्षा बजट के लिए 3.2 अरब डॉलर आवंटित किए हैं। लिहाजा इस बाजार की क्षमता को पहचानते हुए, भारत रूस और चीन जैसे स्थापित खिलाड़ी हथियार सौदे के लिए रास्ता खोज रहे हैं।

भारत और नाइजीरिया के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय संबंध रहे हैं और नाइजीरिया, पहले अफ्रीका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। हालांकि हाल ही में व्यापार की मात्रा में कमी आ गई है, जिससे नाइजीरिया इस क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, फिर भी भारत, नाइजीरिया को एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोगी के रूप में देखता है।
2021-22 में भारत और नाइजीरिया के बीच द्विपक्षीय कारोबार 15 अरब डॉलर का था।
हालांकि, 2022-23 में यह व्यापार मात्रा घटकर लगभग 11.85 अरब डॉलर रह गई और 2023-24 में और घटकर 7.89 अरब अमेरिकी डॉलर रह गई, जिससे नाइजीरिया, अफ्रीकी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट है, कि करीब 135 भारतीय कंपनियां नाइजीरिया के बाजार में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जिनका नाइजीरिया में कुल निवेश 27 अरब अमेरिकी डॉलर है।
नाइजीरिया में भारत की रणनीतिक चालें
कारोबार घटने के भारत के कूटनीतिक हलकों में एक ऐसा कदम उठा, जिसने सभी को चौंका दिया। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 2024 की शुरुआत में नाइजीरिया की धरती पर कदम रखने वाले पहले भारतीय विदेश मंत्री के रूप में इतिहास रच दिया। नाइजीरिया-भारत व्यापार परिषद (एनआईबीसी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, कि नाइजीरिया अफ्रीका में भारत का प्रमुख आर्थिक साझेदार है। उनका संदेश स्पष्ट और साहसिक था, कि "अफ्रीका बढ़ रहा है, और भारत अफ्रीका के उदय पर दांव लगा रहा है।"
2024 में भारत ने व्यापार के अवसरों के लिए डिफेंस इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल नाइजीरिया भेजा। प्रतिनिधिमंडल ने छोटे हथियारों और साइबर सिस्टम जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया। इसके अलावा, भारत के हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस के निर्यात के बारे में चर्चा चल रही है, जिसने अन्य देशों की दिलचस्पी को भी आकर्षित किया है।
नाइजीरिया के साथ 1 अरब डॉलर के रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर करके, अफ्रीकी रक्षा बाजार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और बढ़ाया गया है। इस समझौते में भारत से एडवांस हथियारों का निर्यात और विभिन्न नाइजीरियाई क्षेत्रों में भारत द्वारा 14 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल है। भारत का लक्ष्य 202 तक नाइजीरिया के रक्षा उद्योगों को रक्षा उपकरणों के घरेलू स्तर पर उत्पादन में 40% आत्मनिर्भर बनाना है, जिसमें वित्त पोषण और विशेषज्ञता में भारतीय सहायता शामिल है।

अफ्रीका के डिफेंस बाजार पर भारत की नजर
एस जयशंकर की हाई-प्रोफाइल यात्रा के बाद, भारत ने अफ्रीकी रक्षा बाजार का फायदा उठाने में कोई समय बर्बाद नहीं किया। मार्च 2024 में, भारत ने संभावित निर्यात की तलाश की।
भारतीय रक्षा उद्योग के एक प्रतिनिधिमंडल ने नाइजीरिया की राजधानी अबुजा का दौरा किया। रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अनुराग बाजपेयी के नेतृत्व में 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में HAL, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, एलएंडटी, भारत फोर्ज और एमकेयू लिमिटेड जैसी प्रमुख रक्षा पीएसयू और निजी कंपनियां शामिल थीं।
इसके अलावा जेन टेक्नोलॉजीज, टोनबो इमेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, इकरान एयरोस्पेस एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड और बिग बैंग बूम सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड जैसे स्टार्ट-अप्स ने भी नाइजीरिया में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जिसे भारतीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) ने कॉर्डिनेट किया था।
इस कार्यक्रम का मिशन छोटे हथियारों और गोला-बारूद से लेकर अत्याधुनिक साइबर रक्षा प्रणालियों तक हर चीज में नाइजीरिया में भारत के लिए व्यावसायिक अवसरों की खोज करना था।
क्या LCA तेजस खरीदेगा नाइजीरिया?
भारत अपने सिंगल-इंजन लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के एक्सपोर्ट के लिए नाइजीरिया के साथ बातचीत कर रहा है। दिसंबर 2023 में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर, सी.बी. अनंतकृष्णन ने तेजस-LCA के संबंध में नाइजीरिया के साथ चल रही चर्चाओं की पुष्टि की।
नाइजीरिया, फिलीपींस, मिस्र और अर्जेंटीना जैसे अन्य देशों के साथ तेजस में रुचि दिखाने वाला देश बन गया है। हाल ही में, चीनी JF-17 थंडर जेट के प्रदर्शन से 'नाखुश' नाइजीरिया की वायु सेना ने अतिरिक्त JF-17 खरीदने के बजाय इटली से M-346FA लाइट फाइटर-ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने का विकल्प चुना है।
वहीं, हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है, कि नाइजीरिया अपने पुराने चेंगदू F-7NI बेड़े को बदलने के लिए 15 लड़ाकू जेट खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। भारत अपने स्वदेशी तेजस लड़ाकू जेट की पेशकश करके एक संभावित आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है। लेकिन, ऐसी रिपोर्ट है, कि भारत और नाइजीरिया के बीच तेजस फाइटर जेट को लेकर सहमति नहीं बन पाई है और इसलिए ये डील अभी फंसा हुआ है।
इस डील को लेकर आशंका इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि भारत में निर्मित हेलिकॉप्टरों में नाइजीरिया की शुरुआती दिलचस्पी के बावजूद, नाइजीरियाई वायु सेना (NAF) ने बोको हराम के आतंकवादियों के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत करने के लिए नवंबर 2023 में तुर्किये से T129 ATAK हेलीकॉप्टर खरीदने का विकल्प चुना था।
इससे पहले, नाइजीरिया ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड', लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) 'ध्रुव' जैसे भारत में बने विमानों और हेलीकॉप्टर्स में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन सवाल ये हैं, कि आखिर नाइजीरिया और भारत के बीच डील पर सहमति क्यों नहीं बन पाई है।

एक अरब डॉलर का 'हैंडशेक'
हालांकि, भारत सिर्फ बातचीत ही नहीं कर रहा है और भारत ने अपनी बात पर खरा उतरते हुए नाइजीरिया के साथ 1 अरब डॉलर का रक्षा सौदा किया है।
सितंबर 2023 में, नाइजीरिया ने अपने डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए भारत के साथ 1 अरब डॉलर का आर्थिक और रक्षा सौदा किया। यह सौदा दो-तरफा सौदा है। एक तरफ, भारत नाइजीरिया के रक्षा उद्योग के लिए लाल कालीन बिछा रहा है, 1 अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियार की पेशकश कर रहा है। लेकिन इतना ही नहीं। भारतीय फर्म पश्चिम अफ़्रीकी पावरहाउस में विभिन्न क्षेत्रों में 14 बिलियन डॉलर के भारी निवेश का वादा करते हुए अपनी शर्त को दोगुना कर रही हैं।
भारत की दिलचस्पी सिर्फ नाइजीरिया की बंदूकों और टैंकों में ही नहीं है। बल्कि एक समझदारी भरा कदम उठाते हुए, जो किसी भी अर्थशास्त्री को चौंका देगा और ध्यान आकर्षित करेगा, कि दोनों देशों ने मई 2024 में स्थानीय मुद्रा में कारोबार करने पर भी सहमति जताई है।
इस समझौते का मकसद कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, फार्मास्यूटिकल्स, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, परिवहन, रेलवे, विमानन और एमएसएमई विकास जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार और पारस्परिक रूप से लाभकारी निवेश को बढ़ाना है।
अफ्रीका का सैन्य खर्च कितना है?
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका में सैन्य खर्च 2023 में 51.6 अरब डॉलर था, जो 2022 की तुलना में 22 प्रतिशत ज्यादा और 2014 की तुलना में 1.5 प्रतिशत ज्यादा है।
रिपोर्ट से पता चला है, कि वैश्विक सैन्य व्यय कुल 4.443 ट्रिलियन डॉलर था, जिसमें 2023 में अल्जीरिया अफ्रीकी देशों में सबसे आगे था। अल्जीरिया का सैन्य खर्च 18.3 अरब डॉलर तक पहुच गया, जो अभी तक अल्जीरिया के सैन्य इतिहास में सबसे ज्यादा है। वहीं, मोरक्के 5.2 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है।
अफ्रीका में सैन्य खर्च के मामले में अफ्रीका में नाइजीरिया तीसरे स्थान पर और उप-सहारा अफ्रीका में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाला देश है, जहां 3.2 अरब डॉलर खर्च किए गए। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका (2.78 अरब डॉलर), अंगोला (1.27 अरब डॉलर), इथियोपिया (1.227 अरब डॉलर), ट्यूनीशिया (1.2 अरब डॉलर), दक्षिण सूडान (1.076 अरब डॉलर), और फिर केन्या और युगांडा का स्थान है, जहां क्रमशः 999 मिलियन डॉलर और 977 मिलियन डॉलर खर्च किए गए।
SIPRI की रिपोर्ट बताती है, कि उप-सहारा अफ्रीका में सैन्य खर्च 2023 में 23.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2022 की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन 2014 की तुलना में 22 प्रतिशत कम है।
भारत को अभी तक क्यों नहीं मिल पाई है कामयाबी?
भारत, अफ्रीकी रक्षा बाजार में गहराई तक जाने के लिए तेजी से काम कर रहा है, जिसपर अभी तक रूस और चीन का कब्जा रहा है। यूक्रेन युद्ध में रूस के फंसने के बाद रूस का रूतबा अफ्रीका में कम हुआ है। कई पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से नाइजीरिया पश्चिमी देशों से हथियार नहीं खरीद पाता है, जो भारत के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करता है।
लेकिन हैरानी की बात ये है, कि तमाम प्रचार और हाथ मिलाने के बावजूद, भारत के किफायती हथियारों ने अभी तक अफ्रीकी बाजार में कोई खास प्रभाव नहीं डाला है। यह नई दिल्ली की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए एक गंभीर वास्तविकता है। क्या अफ्रीका के उदय पर भारत का दांव रंग लाएगा, या पारंपरिक खिलाड़ी अपना दबदबा बनाए रखेंगे? ये सिर्फ समय ही बताएगा।












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