Explainer: शी जिनपिंग और जो बाइडेन की मुर्ख बनाने वाली बैठक.. जानिए कैसे अमेरिका और चीन दोनों हारा?

Joe Biden Xi Jinping Meeting: कैमरे के सामने मुस्कुराहट, हाथ मिलाना, गर्मजोशी भरे शब्द और कुछ समझौतों की तरफ पहुंचने का आश्वासन..

लेकिन, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच एक साल से ज्यादा समय के बाद हुई इस मुलाकात के बाद कुछ भी नहीं बदला। इस मुलाकात से, अमेरिका और चीन के संबंधों में "रीसेट" का संकेत देने वाला कुछ भी नहीं था, जो हाल के वर्षों में काफी ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है और ग्लोबल ऑर्डर कुछ ऐसा बन गया है, कि दोनों देशों के बीच तनाव कम भी नहीं हो सकते हैं।

Joe Biden Xi Jinping Meeting

आमने-सामने की बातचीत के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन इस बात की कैमरे के सामने, मीडिया की भारी भीड़ के सामने इस बात की पुष्टि करते हैं, कि वो अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग को एक 'तानाशाह' मानते हैं।

जिसके बाद बीजिंग ने पलटवार किया और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने संवाददाताओं से कहा, कि बाइडेन की टिप्पणी "बेहद गलत और गैर-जिम्मेदाराना राजनीतिक हेरफेर" थी।

हालांकि, अमेरिका और चीन, डिप्लोमेटिक शब्दों में एक दूसरे को प्रतिद्वंदी बताते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है, कि ऐसी प्रतिद्वंदिता ने दुनिया के विकास में शायद एक प्रतिशत का भी योगदान नहीं दिया है, लेकिन ऐसी प्रतिद्वंदिता दुनिया में लड़ी गई 80 प्रतिशत से ज्यादा लड़ाइयों के लिए जिम्मेदार है। और ऐसी प्रतिद्वंदिता तभी खत्म होती है, जब या तो दोनों में से कोई एक शक्ति खत्म हो जाती है, या फिर दोनों शक्तियों के सामने कोई तीसरी शक्ति चुनौती बनकर खड़ी हो जाती हैं।

इन पैमानों पर परखने पर पता चलता है, कि अमेरिका और चीन के बीच फिलहाल समझौता नहीं होने वाला है, खासकर निकट भविष्य में तो इसकी कोई गुंजाइश नहीं है, जबतक, कि कोई एक शक्ति घुटने ना टेक दे।

कैसे खत्म हो सकती है प्रतिद्वंदिता?

बाइडेन ने शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद कहा, कि "चीन एक साम्यवादी देश है... चीन की सरकार उस स्वरूप पर आधारित है, जो हमसे बिल्कुल अलग है।"

बाइडेन की यह टिप्पणी इस बात की गहराई तक जाती है, कि अकेले कूटनीति अमेरिका-चीन संबंधों को दोबारा स्थापित क्यों नहीं कर सकती? क्योंकि, वाशिंगटन और बीजिंग किसी गलतफहमी की वजह से प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, कि जिसे सिर्फ बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।

बल्कि, वे विपरीत कारणों से प्रतिद्वंद्वी हैं। वे एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं और इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं, कि उनके संबंधित वैश्विक दृष्टिकोण में सामंजस्य नहीं हो सकता है।

ये दोनों देशों की सरकारों के गठन का स्वरूप ही है, जो दोनों देशों को विचारधारा के स्तर पर विभाजित करते हैं और उन्हें एक दूसरे का प्रतिद्वंदी बनाते हैं।

जैसे चीन, शक्ति के जरिए शासन करना चाहता है, जिसमें ताइवान पर कब्जा, एशिया में प्रभाव की स्थापना, विश्व पर एक हजार साल से ज्यादा वक्त कर शासन करने की सोच शामिल है, जो चीनी लोगों को विरासत से मिली है।

लिहाजा, चीन पूरे दक्षिण चीन सागर को अपना कहता है, पूर्वी चीन सागर पर अपना दावा ठोकता है, भारतीय क्षेत्रों को अपना बताता है, हिंद महासागर पर प्रभुत्व चाहता है, भारत को घेरना चाहता है, यूरोप को अपंग बनाना चाहता है और दुनिया के सामने वो शहंशाह बनना चाहता है, जिसकी मर्जी के बगैर एक पत्ता तक नहीं हिले।

चीन की ये सोच दुनिया को उस टकराव के रास्ते पर ले जाती है, जिसके किसी भी मोड़ पर शायद शांति संभव नहीं है, जबतक कि किसी एक का मकसद पूरा ना हो जाए।

Joe Biden Xi Jinping Meeting

बाइडेन-शी जिनपिंग की मुर्ख बनाने वाली मुलाकात?

तो क्या जो बाइडेन और शी जिनपिंग की मुलाकात, क्या सिर्फ दुनिया को मुर्ख बनाने के लिए नहीं है? ऐसा इसलिए, क्योंकि जो बाइडेन और शी जिनपिंग की मुलाकात जिन बैकग्राउंड में की गई है, उसमें सिर्फ ये पता चलता है, कि तनाव को मैनेज करने के लिए किसी एक ऐसे समझौते तक पहुंचने की कोशिश है, जहां कुछ देर के लिए ठहरा जा सके।

जैसे 15 नवंबर को, बाइडेन और शी जिनपिंग ने चीन में घातक दवा फेंटेनाइल के उत्पादन पर अंकुश लगाने और दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय, सैन्य-से-सैन्य संवाद बहाल करने पर सौदों की घोषणा की।

लेकिन, फेंटेनाइल घोषणा काफी हद तक वैसी ही है, जैसी शी जिनपिंग ने 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दी थी। अमेरिकी प्रशासन ने बाद में चीन पर समझौते से मुकरने का आरोप लगाया था।

इतिहास ऐसे मौकों से भरा पड़ा है, जब संकट के समय में बीजिंग और वाशिंगटन के बीच खुली रेखा का कोई खास मतलब नहीं रहा है।

2001 में, जब एक अमेरिकी सर्विलांस विमान हैनान द्वीप के ऊपर एक चीनी जेट से टकरा गया, तो बीजिंग ने वॉशिंगटन का फोन नहीं उठाया। इसी तरह, तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के दौरान, तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने तत्काल अपने समकक्ष डेंग जियाओपिंग को फोन करने की कोशिश की, लेकिन चीनी राष्ट्रपति ने उनका फोन नहीं उठाया।

तो फिर इस बार की बैठक में दोनों नेता क्या चाहते थे और समझौता क्यों संभव नहीं है?

चीन चाहता है, कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचना बंद कर दे। लेकिन वाशिंगटन का ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि वह जानता है, कि ऐसा करने का मतलब ताइवान को थाल में सजाकर चीन के सामने परोसना होगा।

तो फिर वाशिंगटन चाहता है, कि चीन, ताइवान जलडमरूमध्य पर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन फौरन बंद कर दे, लेकिन बीजिंग जानता है, कि ऐसा करने से ताइवान को स्वतंत्रता की ओर बढ़ते हुए देखने का जोखिम है।

Joe Biden Xi Jinping Meeting

अमेरिकी नीति निर्माताओं ने लंबे समय से कहा है, कि वे चाहते हैं कि चीन "परिवर्तन" करे, जिसका अर्थ है चीन अपनी शासन प्रणाली को उदार बनाए। लेकिन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी जानती है, कि ऐसा करने का मतलब आत्म-समर्पण है और कम्युनिस्ट शासन अपने बराबर किसी भी राजनीतिक विचारधारा को बर्दाश्त नहीं कर सकती है और इतिहास गवाह है, इसके लिए कम्युनिस्ट नेता लाखों लोगों का खून करने से भी नहीं हिचके हैं।

चीन के पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन ने एक बार टिप्पणी की थी, कि अमेरिका की चीन से इंगेजमेंट करने की कोशिश का मतलब सिर्फ एक होता है, चीन की समाजवादी व्यवस्था को समाप्त करना।

लिहाजा, इस बार भी शी जिनपिंह ने चीन को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आगे लाने के अमेरिका के प्रयासों को खारिज कर दिया है।

चीनी नेता ने देखा है, कि जब सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने 1980 के दशक के अंत में सोवियत संघ को पश्चिमी व्यवस्था में एकीकृत करने की कोशिश की तो क्या हुआ - इससे समाजवादी इकाई का अंत ही तेज हो गया और अंतत: सोवियत संघ को कई हिस्सों में टूटना पड़ा।

लिहाजा, शी जिनपिंग बड़े पैमाने पर सैन्य निर्माण, चीन पर कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण को और सख्ती से लागू करने और पश्चिम से चीन की निर्भरता खत्म करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से नये ग्लोबल ऑर्डर का निर्माण होता हुआ दिख रहा है।

लिहाजा, इस मुलाकात के बाद यही कहा जा सकता है, कि शांति के लिए आयोजित इस मुलाकात का नतीजा यही है, कि दोनों देशों की हार हुई है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+