Explained: मरीन ले पेन की जबरदस्त जीत से क्यों डरे फ्रांस के मुसलमान?

France Politics: फ्रांस में दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की जबरदस्त जीत ने देश के मुस्लिमों को काफी हद तक डरा कर रख दिया है और पिछले कुछ सालों में जिस तरह से दंगे हुए हैं, उसने फ्रांस की बहुसंख्यक आबादी को मरीन ले पेन के साथ कर दिया है।

रविवार को संसदीय चुनावों के पहले राउंड में दक्षिणपंथी दलों ने भारी बढ़त हासिल की है, हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि 7 जुलाई को जब दूसरे राउंड के चुनाव होंगे, तो मरीन ले पेन का नेशनल रैली पार्टी पहले राउंड जैसा करिश्मा कर पाएगी या नहीं, लेकिन फ्रांस के 60 लाख मुसलमानों में से ज्यादातर उनकी जीत से स्तब्ध हैं।

Marine Le Pen

अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 22 साल की एक लड़की फातिमाता ने कहा, कि "मैं फ्रांस द्वारा धोखा महसूस कर रही हूं। यह जानना दुखद है, कि एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने सार्वजनिक स्थान पर हिबाज पर प्रतिबंध लगाने वाली पार्टी को वोट दिया है।"

मुसलमानों के खिलाफ कैसे हो रहा फ्रांस?

फातिमाता मुस्लिम समुदाय से आती हैं, जिसपर फ्रांस में कई दंगों में शामिल होने, आतंकी घटनाओं को अंजाम देने, बच्चों के पार्क में चाकू बाजी करने, डकैती करने के आरोप लगते रहे हैं और दक्षिणपंथी पार्टियों ने इसके खिलाफ जमकर अभियान चलाया है, खासकर मरीन ले पेन काफी आक्रामक रही हैं और उनकी पार्टी ने मुसलमानों को 'शैतान' तक कहा है।

फातिमाता, हिजाब पहनती हैं और उनके पिता मॉरिंटाना से हैं, तो मां सेनेगल से। दोनों फ्रांस आकर बसे हैं और उनका परिवार पेरिस के नजदीक एक छोट उपनगर बेनली में रहते हैं, जहां भारी संख्या में अप्रवासी और जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर के पास डुएल सिटिजनशिप है।

मरीन ले पेन ने सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है, जबकि उनके राजनीतिक चेले जॉर्डन बार्डेला, जो फ्रांस के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं, उन्होंने हिजाब को "भेदभाव का साधन" कहा है। जॉर्डन बार्डेला ने बेनली उपनगर के खिलाफ कई तरह की बातें कही हैं और वादा किया है, कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो फिर दोहरी नागरिकता वाले लोगों की सरकारी नौकरी में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे सिर्फ 28 साल के आक्रामक नेता बार्डेला ने पिछले महीने कहा था, कि "मैंने अपने ही देश में विदेशी बनने की भावना को गहराई से अनुभव किया है। मैंने अपने पड़ोस के इस्लामीकरण को भी अनुभव किया है।"

जिसपर फातिमाता कहती है, कि "मैं 13 साल की थी, जब मुझे फ्रांस की नागरिकता हासिल हुई थी और मुझे अब डर2 सकती है।"

मुस्लिमों के भविष्य से समझौता?

हाल ही में यूरोपीय संसद के चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टियों के हाथों अपमानजनक हार का सामना करने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस में अचानक चुनाव कराने का ऐलान किया था। लेकिन उनका जोखिम भरा दांव उल्टा पड़ गया और उनकी पार्टी पहले राउंड के चुनाव में बुरी तरह से हार गई है।

रविवार को हुए मतदान में नेशनल रैली को 33.15 प्रतिशत वोट मिले, जबकि वामपंथी गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट 28.14 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों को फिर से शर्मिंदगी उठानी पड़ी है औ उनके मध्यमार्गी गठबंधन को सिर्फ़ 20.76 प्रतिशत वोट ही मिले। लेकिन, पहले राउंड के चुनाव के बाद से हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ रैली निकाल रहे हैं। माना जा रहा है, कि ये समर्थक इमैनुएल मैक्रों की पार्टी के हैं। मैक्रों ने पिछले दिनों चेतावनी दी थी, अगर दक्षिणपंथी पार्टियां जीतती हैं, तो फ्रांस में गृहयुद्ध शुरू हो सकता है।

मार्केटिंग में काम करने वाले 27 साल के एलियास ने कहा, कि अगर नेशनल रैली सत्ता में आती है, तो कई मुसलमान फ्रांस से पलायन करने पर विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में, ला फ्रांस, टू लाएम्स मैस टू ला क्विट्स नामक एक स्टडी के लेखकों ने 1,000 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया था, जिसमें 140 लोगों का विस्तृत साक्षात्कार लिया गया था। उन्होंने "इस्लामोफोबिया के हानिकारक प्रभावों" के कारण विदेश में नौकरी करने के लिए फ्रांसीसी मुसलमानों के "ब्रेन ड्रेन" का हवाला दिया।

भेदभाव या अति दक्षिणपंथ के उदय के खिलाफ "वैध" प्रतिक्रिया के बावजूद, एलियास ने कहा, कि वह "टूटा हुआ" महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, कि "अगर हम सब चले गए, तो कौन विरोध करना जारी रखेगा? मुझे लगता है कि कम से कम आने वाली पीढ़ियों के लिए, यहां रहना जरूरी है।" एलियास अल्जीरियाई मूल के हैं, जो अब फ्रांस में रह रहे हैं।

उन्होंने कहा, कि "जिस बात से मुझे सबसे ज्यादा टेंशन है, कि वह यह है, कि पुलिस हिंसा में वृद्धि हो सकती है। संभवतः नस्लीय भेदभाव और हिंसा में वृद्धि होगी, क्योंकि ऐसे अधिकारियों को नेशनल रैली पार्टी का साया रहेगा।"

उन्होंने कहा, कि "मुझे अपने छोटे भाई के लिए काफी डर है, क्योंकि वो सिर्फ 15 साल का है, जिसकी पहली पुलिस इन्वेस्टिगेशन उस वक्त की गई थी, जब वो सिर्फ 13 साल का था।"

फ्रांस में दोहरी नागरिकता हासिल करने वाले नागरिकों के खिलाफ मरीन ले पेन की पार्टी ने अभियान छेड़ रखा है और बार्डेला, जो देश के अगले प्रधामंत्री बन सकते हैं, उन्होंने अपने चुनावी कैम्पेन में बार बार दोहरी नागरिकता के खिलाफ आवाज बुलंद किया है। उन्होंने एक भाषण में कहा था, कि "क्या कोई कल्पना कर सकता है, कि कोई फ्रांसीसी-रूसी नागरिक यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है।"

जिस पर मुस्लिम शख्स तिजिरी ने कहा, कि "नेशनल रैली कह रही है, कि दोहरी नागरिकता धारकों को 'राज्य में रणनीतिक पदों' पर काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसा करना इस देश में मेरे भविष्य से समझौता होगा। मैं राजनीति विज्ञान का अध्ययन कर रहा हूं और सार्वजनिक मामलों में काम करना चाहता हूं, इसलिए यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो फिर मेरी पढ़ाई व्यर्थ हो जाएगी।"

आपको बता दें, कि दक्षिणी फ्रांस के कार्पेन्ट्रास में, जो तिजिरी का गृहनगर है, वहां नेशनल रैली ने 53.51 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जो साफ तौर मुस्लिमों के खिलाफ बहुसंख्यकों के गुस्से को दर्शाता है।"

आपको बता दें, कि नेशनल रैली को पहले नेशनल फ्रंट के नाम से जाना जाता था, इस पार्टी की स्थापना 1972 में मरीन ले पेन के पिता जीन-मैरी ले पेन ने की थी, जो नस्लवादी घृणास्पद भाषण के लिए जाने जाते थे और इसके लिए दोषी भी करार दिए गये थे।

Marine Le Pen

मुस्लिम कट्टरपंथ को रोकने के लिए कई कानून

फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथ को रोकने के लिए इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने भी कई सख्त कानून बनाए हैं, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध, अलगाववाद कानून और आव्रजन कानून शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने चर्चों की तरह मस्जिदों को भी सरकार के अंदर लाने की कोशिश शुरू कर दी है, जिसके खिलाफ मुस्लिम समुदाय में भारी गुस्सा है।

मौजूदा मैक्रों सरकार का कहना है, कि इस्लामिक देशों से फ्रांसीसी मस्जिदों को फंड किया जाता है और देश में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसकी वजह से आए दिन दंगे होते रहते हैं। लिहाजा, हर एक फंडिंग की जांच की जाएगी। मस्जिद के प्रमुखों को हर एक यूरो का जवाब देना होगा।

जिसको लेकर तिजिर जैसे मुसलमानों का कहना है, "मैक्रों के शासन में भी, हम एक घृणित इस्लामोफोबिक और नस्लवादी माहौल में रह रहे हैं, जहां बलि का बकरा मुसलमान और विदेशी मूल के लोग हैं।"

राजनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है, कि अगर फ्रांसीसी संसद में दक्षिणपंथी पार्टियों को बहुमत मिलता है, तो पुलिस के नेतृत्व में भी भेदभाव बढ़ जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञ टैनटुरियर ने चेतावनी दी है, कि "अगर सत्ताधारी पार्टी यह विचार व्यक्त करती है, कि लोगों के साथ उनके मूल के आधार पर भेदभाव करना स्वीकार्य है, तो यह पुलिस हिंसा को वैध बना सकता है और इस तरह इसे बढ़ा सकता है।"

राष्ट्रपति मैक्रों ने दक्षिणपंथी पार्टियों की संभावित जीत पर गृहयुद्ध की चेतावनी दी है।

फ्रांस में कितने प्रतिशत मुसलमान?

फ्रांस में अभी करीब 9 प्रतिशत मुसलमानों की आबादी है और संभावना जताई गई है, कि साल 2040 तक मुस्लिमों की आबादी बढ़कर 18 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगी। इसके अलावा, रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि फ्रांस में सबसे तेजी से आबादी बढ़ने वाला समुदाय मुसलमान हैं और 2050 तक फ्रांस में 30 प्रतिशत तक मुस्लिमों के होने की संभावना जताई गई है।

2019 में फ्रांसीसी आंतरिक मंत्रालय ने बताया था, कि 2018 में देश में मुस्लिम विरोधी घटनाओं में पिछले साल की तुलना में 54% की वृद्धि हुई है और 154 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस्लामोफोबिक घटनाओं में 53% की वृद्धि देखी गई और 235 घटनाएं दर्ज की गईं। मुस्लिम महिलाओं को अनुपातहीन रूप से 81% इस्लामोफोबिक घृणा अपराधों का सामना करना पड़ता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+