श्रीलंका संकट के बीच लोगों के लिए ‘देवदूत’ बना ये क्रिकेटर, खुद पेट्रोल पंप पर बांट रहे चाय नाश्ता

आर्थिक संकट ने विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, कृषि, आजीविका और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बुरी तरह से प्रभावित किया है। पिछले फसल के मौसम में खाद्य उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 40-50 प्रतिशत कम हो गया है।

कोलंबो, जून 20: श्रीलंका पिछले कुछ महीनों से भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है और देश में ईंधन खत्म हो चुके हैं। जिसकी वजह से श्रीलंका के पेट्रोल पंपों पर कई किलोमीटर की लंबी लंबी कतारें लगी रहती हैं और लोगों को पेट्रोल लेने के लिए कई-कई घंटे लाइन में लगे रहते हैं। स्थिति ये है, कि घंटों लाइन में खड़े रहने की वजह से लोग बेहोश होकर गिर भी जा रहे हैं। इस बीच श्रीलंका के एक पूर्व क्रिकेटर खुद पेट्रोल पंपों पर लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और संकट के समय एकजुटता दिखाने के लिए चाय और नाश्ता बांट रहे हैं।

चाय-नाश्ता बांटते रोशन महानामा

चाय-नाश्ता बांटते रोशन महानामा

देश में अभूतपूर्व ईंधन संकट के बीच, श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर रोशन महानामा को ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर लाइनों में इंतजार कर रहे लोगों को चाय और बन परोसते हुए देखा जा रहा है। रोशन महानामा ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'हमने वार्ड प्लेस और विजेरामा मावथा के आसपास पेट्रोल पंप के पास लगी कतारों में लोगों को कम्युनिटी मिल्स की टीम के साथ चाय और भोजन बांटा है। कतारें दिन ब दिन लंबी होती जा रही हैं और कतारों में रहने वाले लोगों के बीमार पड़ने की संभावनाए हैं'। श्रीलंका के इस पूर्व बल्लेबाज ने लोगों से एक-दूसरे की देखभाल करने का आग्रह किया और उन्हें घंटों लाइन में इंतजार करते हुए पर्याप्त तरल पदार्थ और भोजन लाने की सलाह दी।

रोशन महानामा की लोगों से अपील

पूर्व श्रीलंकन क्रिकेटर रोशन महानामा ने ट्वीट करते हुए लोगों से खुद की देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि, 'कृपया, ईंधन की कतारों में खड़े लोग एक-दूसरे की देखभाल करें। पर्याप्त तरल पदार्थ और भोजन लाएं और यदि आप ठीक नहीं हैं, तो कृपया अपने निकटतम व्यक्ति तक पहुंचें और उनसे मदद मांगे या 1990 को कॉल करें। इन कठिन समय के दौरान हमें एक-दूसरे की देखभाल करने की आवश्यकता है'। इस साल मार्च के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक कि माचिस जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी पैदा कर दी है। इसे देखते हुए श्रीलंका सरकार ने शनिवार को लंबे समय तक बिजली कटौती के कारण आने वाले सप्ताह के लिए सभी स्कूलों और संस्थानों को बंद करने की घोषणा कर दी है। श्रीलंका के शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को अनावश्यक आवागमन से बचने और ईंधन बचाने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने की सलाह दी है।

श्रीलंका के आम लोग बुरी तरह प्रभावित

श्रीलंका के आम लोग बुरी तरह प्रभावित

आर्थिक संकट ने विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, कृषि, आजीविका और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बुरी तरह से प्रभावित किया है। पिछले फसल के मौसम में खाद्य उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 40-50 प्रतिशत कम था, और वर्तमान कृषि मौसम भी संकट में है, क्योंकी श्रीलंका के पास बीज, उर्वरक, ईंधन और कर्ज की कमी है। देश के लोग ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर घंटों लाइन में लगने को मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक उच्च-स्तरीय अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका की कुल 22 प्रतिशत आबादी या करीब 49 लाख लोगों को फौरन खाद्य सहायता देने की जरूरत है। वहीं, लेटेस्ट रिपोर्ट में पता चला है कि, श्रीलंका के 86 प्रतिशत लोगों ने आर्थिक संकट के बीच कम खाना या सिर्फ एक वक्त ही खाना शुरू कर दिया है या फिर दैनिक सामानों का इस्तेमाल कम करना शुरू कर दिया है।

सरकार की लापरवाह नीतियां

सरकार की लापरवाह नीतियां

कोविड महामारी और राजपक्षे सरकार की लापरवाह आर्थिक नीतियों ने श्रीलंका की स्थिति को बुरी तरह से प्रभावित किया है और श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो चुका है, इसीलिए श्रीलंका तेल और गैस समेत कई जरूरी सामान अब नहीं खरीद सकता है। पिछले तीन महीनों से लगातार भारत की मदद से श्रीलंका में अभी भी लोगों के घरों के गैस चूल्हे जल रहे हैं। राजपक्षे परिवार ने श्रीलंका में तानाशाह नीतियों को चलाया और उन्होंने पिछले साल अचानक श्रीलंका में 100 प्रतिशत जैविक खेती करने और रासायनिक उर्वरक पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया, जिससे श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई और करीब 50 से 60 प्रतिशत खेती ही खत्म हो गई। वहीं, पर्यटन भी कोविड की वजह से बर्बाद हो चुका है।

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