अगर मैं राजनीति में आईं तो तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा- इंदिरा नूयी

न्यूयॉर्क। पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी को मंगलवार को गेम चेंजर अवार्ड से नवाजा गया और उस दौरान उन्होंने कहा कि उनके राजनीति में प्रवेश करने से तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है। एशिया में शिक्षा पर फोकस करने वाले एनजीओ एशिया सोसायटी ने नूयी को उनके बिजनेस अचीवमेंट, मानवतवादी रिकॉर्ड और दुनिया में महिलाओं व लड़कियों के लिए अक्सर वाकालत करने के लिए उन्हें इस अवॉर्ड से नवाजा गया। इसी साल फरवरी में नूयी को आईसीसी की पहली महिला डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था।

मैं बहुत ही बेबाक हूं...

मैं बहुत ही बेबाक हूं...

कार्यक्रम में सवाल-जवाब के दौरान भारतीय मूल की अमेरिकी बिजनेस वुमन इंदिरा नूयी से जब पूछा गया कि क्या आप ट्रंप (डोनाल्ड ट्रंप) कैबिनेट को ज्वाइन करेंगी? नूयी ने अपने जवाब में कहा, 'मेरा और पॉलिटिक्स के साथ मेल-जोल नहीं है। मैं बहुत ही बेबाक हूं, मैं डिप्लोमेटिक नहीं हूं। मुझे मालूम तक नहीं है कि डिप्लोमेसी होती क्या है। मैं तीसरे विश्व युद्ध की वजह बन जाऊंगी। मैं यह नहीं करुंगी।' नूयी ने 2 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से पेप्सिको के सीईओ के रूप में पद छोड़ दिया था, लेकिन वह 2019 के शुरुआत तक चेयरमैन बनी रहेंगी।

पेप्सिको के आगे भी जिंदगी है

पेप्सिको के आगे भी जिंदगी है

पेप्सिको के साथ 40 साल तक जुड़े रहने और रोजाना 18 से 20 घंटे काम करने वाली नूयी ने कहा कि फ्री टाइम निकालना मुश्किल होता है। नूयी ने कहा, 'जब मैंने पद छोड़ा तो लगा कि यह कठिन होने वाला है। 40 साल तक रोज सुबह 4 बजे उठकर 18 से 20 घंटे काम करने के अलावा कुछ नहीं किया।' नूयी ने कहा कि पद छोड़ने के बाद पता चला कि काम के अलावा भी जिंदगी है। नूयी ने कहा कि पेप्सिको अभी भी उनके दिल के करीब है, लेकिन सीख रही है कि पेप्सिको के आगे भी जिंदगी है।

लाइफ में एशियन मॉडल जरूरी

लाइफ में एशियन मॉडल जरूरी

काम के साथ परिवार को मैनेज है, उसके बारे में नूयी ने कहा वह हमेशा 'एशियन मॉडल' को साथ लेकर चली। उन्होंने जीवन में अपने काम के साथ अपनी बेटियों को भी सही से मैनेज किया। उन्होंने कहा कि यही मॉडल पश्चिम में भी होना चाहिए। एशियन मॉडल को अपनी जिंदगी में सर्वोच्च मानने वाली नूयी ने कहा कि हमें यहां भी एशियन मॉडल को लाने की जरुरत है। नूयी ने कहा कि हमें और एक साथ रहने वाली मल्टी-जनरल परिवारों की जरुरत हैं। हमें अपने बच्चों की केयर के लिए बुजुर्गों की मदद लेनी चाहिए। नूयी और उनके पति ने अपने बच्चों को कभी भी किसी डे केयर वर्कर के भरोसे नहीं छोड़ा। नूयी ने अपने परिवार में भारत से कभी उसके पेरेंट्स तो कभी अंकल, आंटी, ससुराल के सदस्यों और दादा-दादी को 3-4 महीनों के लिए अमेरिका बुलाकर अपने बच्चों के साथ रखा।

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