Event Horizon: क्या Black Hole में समा जाएगा सबकुछ? वो खास 'आंख' जिसमें कैद हुआ 'काला सच'

आस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड के यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय के एक्पर्ट्स ने इवेंट होराइजन टेलीस्कोप को लेकर खास रिसर्च की है।

Event Horizon Telescope

Event Horizon Telescope: पृथ्वी पर निरंतर वैज्ञानिक प्रयोगों के आधार पर एक नई तकनीकी विकसित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। दुनिया भर के साइंटिस्ट्स रीयल दुनिया से हटकर एक ऐसी दुनिया बना रहे हैं, जिसमें इंसानों का हर काम होगा लेकिन जरूरत इंसानों की नहीं होगी। इसकी कल्पना एआई तकनीकी (Artificial Intelligence) के दम पर की जा रही है। पृथ्वी तो क्या अब ब्रह्मंड में भी कोई ऐसा ग्रह यह उपग्रह नहीं बचेगा जिसका डेटा दुर्लभ हो। पृथ्वी के आभासी आकार के खास टेलीस्कोप (इवेंट होराइजन टेलीस्कोप) से ली गई ब्लैक होल की पहली तस्वीरों ने पूरे साइंस जगत को चौंका दिया है।

पृथ्वी के आकार का स्पेस डिटेक्टर
आस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड के यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नेक्स्ट जेनेरेशन के टेलीस्कोप इवेंट होराइजन टेलीस्कोप (Event Horizon Telescope) की मदद से ली गई खास तस्वीरों को लेकर विश्लेषण किया है। ईएचटी के संस्थापक निदेशक, हार्वर्ड एस्ट्रोफिजिसिस्ट शेप डोलमैन ने इस तरह के स्पेस साइंस की तुलना एक टूटे हुए दर्पण से की है। उन्होंने कहा कि उस समय को ट्रैक करने की आवश्यकता है जब टूटे शीशे का प्रत्येक टुकड़े पर प्रकाश पड़ता और फिर अलग- अलग दिशाओं में उनका डिफ्रेक्शन होता है। डोलमैन ने दावा किया कि इस डेटा को एक सुपरकंप्यूटर में एकत्रित करके पृथ्वी के आकार का एक डिटेक्टर बनाया जा सकता है।

ब्लैक होल निगल लेता है सबकुछ
दुनिया में अब तक डेटा एनालिसिस से प्राप्त ब्लैक होल की छवियों की तुलना में इवेंट होराइजन टेलीस्कोप की तस्वीरों को बेहद अहम माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि वास्तव में नीली लपटें नारंगी या पीली दिखने वाली लपटों की तुलना में अधिक गर्म होती हैं। लेकिन सैजिटेरियस ए- मिल्की वे के केंद्र में स्थित ब्लैक होल - की उपरोक्त छवि में नारंगी-लाल रंगों के रंग पैलेट को चुना गया था क्योंकि यह माना जाता था कि नारंगी रंग लोगों को बताएगा कि चमकदार सामग्री कितनी गर्म है, जो ब्लैक होल के आसपास है। साइंटिस्ट्स की मानें तो भविष्य में ब्लैकहोल और आक्रामक हो सकता है। ऐसे में इसे डिटेक्ट करने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं।

Black Hole के लिए टेलीस्कोप साइटिंग
टेलीस्कोप या टेलीस्कोप साइटिंग के लिए स्थानों का चुनाव, मौसम, वायुमंडलीय स्पष्टता, पहुंच और लागत सहित ऐतिहासिक रूप से तकनीकी और आर्थिक सिद्धांतों के आधार पर करना होता है। एक्सपर्ट्स ने माना है कि ये प्रयास एक रोमांचक और महत्वाकांक्षी योजनाएं सामने लाएगा। जिसका नवीन दृष्टिकोण के आधार पर अधिक मांग है। ये 21वीं सदी में साइंस की एक नई दुनिया को दिखाएगा। ब्लैक होल की 2019 की पहली छवि छह स्थलों पर मौजूदा टेलीस्कोप के डेटा से बनाई गई थी। वर्तमान में टेलीस्कोप साइटों की संख्या को लगभग 20 तक बढ़ाने के लिए, दुनिया भर में स्थलों के चयन की प्रक्रिया चल रही है।

कैसे बदलेगी दुनिया?
दुनिया के तमाम साइंटिस्ट आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) की तकनीकी के प्रयोग के जरिए काफी आगे बढ़ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दशकों में दुनिया का भविष्य कुछ अलग दिखने वाला है। अब इंसानों का लगभग सारा काम मशीनें करने लगी हैं। ऐसे में 21वीं सदी बड़े बदलाव का दौर है। जहां साइंटिस्ट्स एआई के जरिए एक वर्चुअर वर्ल्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

EHT दिखाएगा असली तस्वीर
टेलीस्कोप का आकार जितना बड़ा होता है, उससे अंतरिक्ष की चीजें उतनी ही स्पष्ट और बेहतर दिखाई देती हैं। ईएचटी के जरिए पृथ्वी ही नहीं ब्रह्मंड के अन्य ग्रहों के साथ ब्लैक होल की छवियां कैप्चर की जा सकेंगे। इसके लिए लगभग पृथ्वी के आकार के एक टेलीस्कोप की आवश्यकता होती है। साइंटिस्ट्स ने ऐसे में ईएचटी (इवेंट होराइजन टेलीस्कोप) महत्वपूर्ण माना है, जिसमें आभासी पृथ्वी के आकार का टेलीस्कोप बनाने के लिए दुनिया भर में फैले कई टेलीस्कोप और टेलीस्कोप सरणियों का उपयोग किया जाता है।

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