प्रतिबंध लगाएंगे या देश बचाएंगे? पुतिन के आगे घुटनों पर आए यूरोपीय देशों की आपातकालीन बैठक
यूरोप के कई देश हैं, जिनकी गैस सप्लाई रूकने पर उनकी पूरी अर्थव्यवस्था ही पूरी तरह से ठप हो सकती है, लिहाजा वो रूस से सीधे तौर पर कोई पंगा नहीं लेना चाहते हैं।
नई दिल्ली, मई 02: पुतिन ने पोलैंड और बुल्गारिया में गैस की सप्लाई क्या रोकी, पूरे यूरोप में हड़कंप मच गया है और यूरोपीय देश के ऊर्जा मंत्रियों के बीच आपातकालीन बैठक की गई है, जिसमें इस बात पर बात की गई है, कि अगर मॉस्को अचानक तेल और गैस की सप्लाई रोक देता है, तो फिर यूरोप क्या करेगा। रूस साफ कर चुका है, कि वो तेल के बदले सिर्फ अपनी करेंसी रूबल में ही भुगतान स्वीकार करेगा और जो देश रूबल में भुगतान नहीं करेंगे, उन्हें तेल और गैस की सप्लाई रोक दी जाएगी।
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रूस से क्यों डरा यूरोप?
रूस ने पिछले हफ्ते यूरोप के दो अहम देश बुल्गारिया और पोलैंड को गैस की आपूर्ति रोक दी थी, क्योंकि उन्होंने रूस की करेंसी रूबल में तेल और गैस आयात का प्रभावी रूप से भुगतान करने की उसकी मांग को पूरा करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इन देशों ने पहले से ही इस साल के अंत तक रूसी गैस का उपयोग बंद करने की योजना बनाई है और कहा है, कि वो इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यही स्थिति हर यूरोपीय देश के साथ नहीं है। यूरोप के ज्यादातर देश पूरी तरह से तेल और गैस के लिए रूस पर निर्भर हैं और जर्मनी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिससे आशंका जताई गई है, कि यूरोप के गैस-निर्भर आर्थिक बिजलीघर जर्मनी सहित अन्य यूरोपीय संघ के देश रूस के अगले निशाने हो सकते हैं।

यूरोपीय देशों में पड़ रही फूट?
यूरोप के कई देश हैं, जिनकी गैस सप्लाई रूकने पर उनकी पूरी अर्थव्यवस्था ही पूरी तरह से ठप हो सकती है, लिहाजा वो रूस से सीधे तौर पर कोई पंगा नहीं लेना चाहते हैं। लिहाजा, अब ऐसे यूरोपीय देश दबी जुबान में रूस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, जिससे यूरोपीय गठबंधन में ही दरार पड़ने लगे हैं। इस महीने के अंत में कई यूरोपीय कंपनियों को रूस को गैस आयात के लिए भुगतान करना है और इन देशों के पास रूबल की किल्लत है। लिहाजा, अब यूरोपीय संघ के राज्यों को यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि, क्या यूरोपीय तेल कंपनियां यूक्रेन में आक्रमण पर रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना ईंधन खरीदना जारी रख सकती हैं। जबकि, मॉस्को ने स्पष्ट तौर पर कहा है, कि विदेशी गैस खरीदारों को निजी स्वामित्व वाले रूसी बैंक गज़प्रॉमबैंक के खाते में यूरो या डॉलर जमा करने होंगे, जो उन्हें रूबल में बदल देगा।

रूस के आगे कैसे फंसे यूरोपीय देश?
यूरोपीय आयोग ने कहा है कि, कि अगर यूरोपीय देश रूस की बात मानते हैं और रूसी बैंक में डॉलर या यूरो जमाकर रूस की स्थानीय करेंसी रूबल से उसे बदलते हैं, तो वो रूस के खिलाफ लगाए गये यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है। यानि, यूरोपीय देश अब दोहरी स्थिति में फंस गये हैं। अगर वो रूस से यूरो के बदले रूबल एक्सचेंज करते हैं, तो वो प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा और ऐसा नहीं करने पर उन्हें तेल और गैस की सप्लाई रोक दी जाएगी। लिहाजा, बुल्गारिया, डेनमार्क, ग्रीस, पोलैंड, स्लोवाकिया समेत कई यूरोपीय देश नया मसौदा तैयार कर रहे हैं।

रूस ने कहा-कोई समस्या नहीं
वहीं, रूस ने शुक्रवार को एक बार फिर से कहा है, कि उसे अपनी डिक्री में कोई दिक्कत नहीं दिख रही है और रूस का मानना है, कि खरीददार के दायित्व को तभी पूरा किया जाएगा, जब मुद्रा को रूबल में परिवर्तित किया जाएगा। जबकि बुल्गारिया और पोलैंड ने मास्को की इस योजना के साथ जुड़ने से इनकार कर दिया। जबकि, जर्मनी ने अपनी कंपनियों को रूस की स्थानीय मुद्रा में भुगतान करने की मंजूरी दे दी है, और हंगरी ने कहा है कि और खरीदार रूस के तंत्र के साथ जुड़ सकते हैं।

आर्थिक संकट में फंसने से बचा रूस
रूस भले ही यूक्रेन के अंदर युद्ध में फंसा हुआ हो, लेकिन रूस ने खुद को आर्थिक संकट में फंसने से बचा लिया है। रूबल में भुगतान होने से रूसी अर्थव्यवस्था अपने पैरों पर मजबूती से टिकी रहेगी और उसे राजस्व की प्राप्ति होती रहेगी और रूस का यूक्नेन के खिलाफ ‘सैन्य अभियान' चलता रहेगा। 24 फरवरी, जिस दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, उस दिन के बाद से यूरोपीय संघ के देशों ने गैस और तेल के लिए रूस को 45 अरब यूरो (47.43 अरब डॉलर) से अधिक का भुगतान किया है। अनुसंधान संगठन सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने पाया है कि, रूस 40%गैस और 26% तेल यूरोपीय संघ को आपूर्ति की है। जिससे रूस के खजाने में जितना पैसा आया है, उससे वो ना सिर्फ यूक्रेन में लड़ाई जारी रख सकता है, बल्कि वो देश में महंगाई कंट्रोल करने के साथ साथ अपने सरकारी कर्मचारियों को सैलरी भी लगातार दे सकता है और इस तरह से देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर चोट लगने से बचा सकता है।

यूरोपीय देशों की आपातकालीन बैठक
पिछले हफ्ते के अंत में यूरोपीय कमीशन और यूरोपीय देशों के बीच काफी अहम और आपातकाली बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने की तरफ विचार-विमर्श किया गया है। वहीं, इस हफ्ते यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच बुधवार को एक और बैठक होने वाली है, जिसमें यूरोपीय आयोग रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के छठे पैकेज का ऐलान कर सकता है। वहीं, यूरोपीय आयोग के नेता सोमवार को गैर-रूसी गैस आपूर्ति को तत्काल सुरक्षित करने और भंडारण भरने की आवश्यकता पर भी चर्चा करेंगे, क्योंकि देश आपूर्ति के झटके के लिए तैयार हैं। रूसी गैस पर निर्भरता देशों के बीच भिन्न होती है, लेकिन विश्लेषकों ने कहा है कि रूसी गैस की तत्काल कुल कटौती जर्मनी सहित कई देशों को मंदी की ओर ले जाएगी और अचानक से सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं, जिसे रोकने के लिए आपातकालीन उपाय करने की जरूरत होगी।












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